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सुरक्षा बाड़ पर हेग अदालत में बहस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिमी तट में इसराइली सुरक्षा बाड़ की वैधता पर सोमवार को हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत में बहस शुरू हुई. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत को इस मामले पर विचार करने को कहा है. इसराइल इस सुनवाई का यह कहकर बहिष्कार कर रहा है कि यह अदालत के कार्यक्षेत्र से बाहर का विषय है. सोमवार को सुनवाई में शुरुआती टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र में फ़लस्तीनी प्रतिनिधि नसीर अल-किदवा ने की. उन्होंने कहा कि बाड़ सुरक्षा की दृष्टि से नहीं बल्कि इसराइली क़ब्ज़े का इलाक़ा बढ़ाने के लिए बनाया गया है. अल-किदवा ने कहा कि बाड़ ने पश्चिमी तट में फ़लस्तीनी इलाक़े को सीमित कर दिया है. फ़ैसला बाध्यकारी नहीं हेग की अदालत का फ़ैसला सिर्फ़ सलाह देने तक ही सीमित रहेगा. इसराइल के साथ-साथ अमरीका और यूरोपीय संघ का भी कहना है कि यह विषय हेग की अदालत के न्याय क्षेत्र से बाहर का है. लेकिन इन सबके बावजूद इस मामले पर गंभीरता से सुनवाई हो रही है. दूसरी ओर इसराइल में रविवार को हुए आत्मघाती बम हमले की भी गूँज अदालती कार्रवाई में सुनाई पड़ सकती है क्योंकि इसराइल इन्हीं सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सुरक्षा बाड़ बनाने को सही ठहराता रहा है. जबकि फ़लस्तीनी पक्ष इस बात पर ज़ोर देगा कि सुरक्षा बाड़ के नाम पर इसराइल की मंशा पश्चिमी तट के हिस्सों को अपने में शामिल करने की है. फ़लस्तीनियों का कहना है कि वह सुरक्षा बाड़ का उस सूरत में विरोध नहीं करेगा जब वह 1967 में रही इसराइली सीमा पर बने. फ़लस्तीनी अधिकारी यह चेतावनी भी देते रहे हैं कि सुरक्षा बाड़ बनाने के कारण दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ रहा है. जबकि इसराइल का कहना है कि सुरक्षा बाड़ आत्मघाती दस्तों के ख़िलाफ़ एक प्रभावी क़दम है. |
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