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विवाद और बहिष्कार के बीच ईरान में मतदान शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान में शुक्रवार को संसद की 290 सीटों के लिए मतदान शुरू हो गया है. कहा जा रहा है कि कट्टरपंथी पार्टियों को बड़ी जीत मिलने वाली है. वर्ष 2000 के चुनाव में सुधारवादियों को भारी जीत हासिल हुई थी. ईरान के चुनाव पर दुनियाभर की नज़रें इसलिए भी लगी हुई हैं कि चुनाव प्रक्रिया शुरुआत से ही विवादों में घिरी रही है. देश में कई गुटों ने मतदान के बहिष्कार की घोषणा कर रखी है और कई सुधारवादी पार्टियाँ अपना उम्मीदवार भी खड़ा नहीं कर पाईँ. जानकारों का कहना है कि इसका सबसे ज़्यादा असर राजधानी तेहरान पर देखने को मिल सकता है. लेकिन माना जा रहा है कि जनजातीय इलाक़ों में मतदान ज़्यादा हो सकता है क्योंकि यहाँ की राजनीति स्थानीय मुद्दों पर ही होती है. उम्मीद फिर भी सर्वेक्षण बताते हैं कि कुल 30 प्रतिशत मतदान ही होने की उम्मीद है.
इन चुनावों को लेकर बड़ा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कट्टरपंथियों के नियंत्रण वाले शूरा-ए-निगहबान ने क़रीब ढाई हज़ार सुधारवादी उम्मीदवारों का नामांकन रद्द कर दिया. सुधारवादी इसके ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आए और अब एक बड़े गुट ने मतदान के बहिष्कार की घोषणा कर दी है. देश के कई बुद्धिजीवियों और पत्रकारों ने भी मतदान के बहिष्कार का समर्थन किया है. गुरुवार को ईरान की न्यायपालिका ने उन दो शीर्ष समाचारपत्रों को बंद करने का आदेश दिया जिन्होंने देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की आलोचना वाला पत्र छापा था. राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी की अगुआई वाले सुधारवादियों का एक छोटा तबका मैदान में है तो ज़रूर लेकिन उन्हें कितना समर्थन मिलेगा इस पर सबकी नज़र है. |
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