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ख़ातमी की मतदाताओं से गुज़ारिश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद ख़ातमी ने देशवासियों से गुज़ारिश की है कि वे संसद में परंपरावादियों का बहुमत बनने से रोकने के लिए बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लें. ईरान में संसद के लिए इसी सप्ताह चुनाव होने वाले हैं. राष्ट्रपति ख़ातमी ने कहा है कि हालाँकि बहुत से उदारवादी उम्मीदवारों पर चुनाव लड़ने की पाबंदी लगा दी गई है लेकिन फिर भी लोग अपने विचारों से मिलता जुलता कोई उम्मीदवार छाँट लें और मतदान ज़रूर करें. उन्होंने कहा है कि अगर मतदान कम संख्या में होगा तो संसद में कुछ चुनिंदा ही प्रतिनिधियों का नियंत्रण स्थापित हो सकता है जो देश के हित में नहीं होगा. लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि चुनाव में लोगों की बहुत ज़्यादा रुचि नज़र नहीं आती. बहुत से उदारवादियों में राष्ट्रपति ख़ातमी के रुख़ पर नाराज़गी है. उदारवादियों को यह उम्मीद थी कि राष्ट्रपति ख़ातमी 20 फ़रवरी को होने वाले इन चुनावों को तब तक अपनी मंज़ूरी देने से इनकार कर सकते थे जब तक कि इनके स्वतंत्र और निष्पक्ष होने की गारंटी न दे दी जाए. शूरा-ए-निगहबान ने हज़ारों उदारवादियों को चुनाव लड़ाने से अयोग्य क़रार दे दिया था जिससे राजनीतिक उथल-पुथल शुरू हो गई थी. अब राष्ट्रपति ख़ातमी ने कहा है, "शूरा-ए-निगहबान के इस फ़ैसले ने कुछ लोगों को तो संतुष्ठ कर दिया है लेकिन बहुत से लोगों को नाराज़ भी कर दिया है लेकिन इससे मतदान पर असर नहीं पड़ना चाहिए." चुनाव की इस प्रक्रिया को पहले से ही तब बड़ा झटका लग चुका है जब उन 550 उम्मीदवारों ने अपनी नामज़दगी वापस ले ली जिन्हें चुनाव के लिए योग्य क़रार दे दिया गया था. एक सर्वेक्षण के नतीजों में अनुमान लगाया गया है कि देश भर में औसतन 30 प्रतिशत मतदान हो सकता है. कुछ विश्लेषकों ने यहाँ तक अनुमान व्यक्त किया है कि राजधानी तेहरान सहित कुछ बड़े शहरों में मतदान सिर्फ़ 10 प्रतिशत तक ही रह सकता है. सुधारवादियों के सबसे बड़े संगठन इस्लामिक ईरान पार्टिसिपेशन फ्रंट के अधिकतर उम्मीदवारों को अयोग्य क़रार दे दिया गया है और इसने चुनावों का बहिष्कार किया है. |
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