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भारत-पाकिस्तान बातचीत का स्वागत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की प्रक्रिया की शुरुआत का स्वागत किया है और कहा है कि दोनों देश शांति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर ने कहा है कि "हमें इस बात की ख़ुशी है कि दोनों पक्ष शांति वार्ताओं के रोडमैप पर सहमत हो गए हैं और बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं." पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने घोषणा की है कि कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बातचीत जुलाई या अगस्त में होगी. तीन दिन तक चली संयुक्त और विदेश सचिव स्तर की बातचीत के बाद इस बात पर सहमति हुई कि दोनों देशों को विदेश सचिव और उससे ऊपर के स्तर पर भी वार्ताएँ करनी चाहिए. पिछले वर्ष अप्रैल महीने से ही दोनों देशों के रिश्ते सामान्य होने शुरू हुए हैं और दोनों तरफ़ से बस चलाने और रेल-वायु संपर्क की बहाली जैसे कई क़दम उठाए गए हैं जिनसे तनाव कम हुआ है. पिछले महीने सार्क सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी और परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच हुई मुलाक़ात के बाद संबंधों के सामान्य होने की उम्मीदें और बढ़ गई हैं. अमरीकी रुख़ अमरीका ने पहले ही स्पष्ट किया है कि इन वार्ताओं के पीछे उसकी कोई भूमिका नहीं है लेकिन अक्सर समाचार माध्यमों में यह चर्चा होती रहती है कि अमरीका परदे के पीछे से काम कर रहा है. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बाउचर ने कहा, "दोनों देशों ने शांति की संभावनाओं को न सिर्फ़ खोजा है बल्कि उन पर बहुत ही सकारात्मक ढंग से काम भी किया है." दूसरी ओर, कुछ प्रमुख अलगाववादी कश्मीरी नेताओं ने बातचीत को लेकर ख़ुशी का इज़हार किया है और उम्मीद जताई है कि वार्ताओं में उन्हें भी शामिल किया जाएगा. जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के उप प्रमुख जावेद मीर ने कहा, "हमें वाजपेयी और मुशर्रफ़ पर भरोसा है कि वे विवाद का हल निकालते समय कश्मीरियों को नज़रअंदाज नहीं करेंगे." |
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