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इराक़ के भविष्य पर संयुक्त राष्ट्र की बैठक
इराक़ के राजनीतिक भविष्य के बारे में चर्चा के लिए सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में एक अहम बैठक हो रही है. इस बैठक में इराक़ में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर और अंतरिम शासकीय परिषद के सदस्य भी भाग लेंगे. बैठक में इराक़ी संप्रभुता का वापसी आगामी जून में करने और वहाँ संयुक्त राष्ट्र की भूमिका के बारे में चर्चा की संभावना है. अमरीका चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र सत्ता हस्तांतरण को समर्थन दे और फिर वहाँ ज़िम्मेदारी संभाले. लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान सुरक्षा स्थिति पर चिंता जता चुके हैं. राजधानी बग़दाद में पिछले साल संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर भारी हमला हुआ था जिसमें बीस लोग मारे गए थे. लगातार हमले दूसरी तरफ़ इराक़ में अमरीकी सैनिकों पर लगातार हमले हो रहे हैं. रविवार को भी राजधानी बग़दाद में एक ज़बरदस्त हमला हुआ जिसमें बीस लोग मारे गए और सौ से ज़्यादा घायल हो गए. अमरीकी सैनिकों की एक गश्ती टुकड़ी पर भी रविवार को हमला हुआ और इराक़ में अब तक मारे गए अमरीकी सैनिकों की संख्या 500 के आँकड़े पर पहुँच गई है. ऐसे में सवाल पैदा हो रहा है कि अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की इराक़ योजना आख़िर किस तरफ़ जा रही है. 500 का आँकड़ा पेंटागन में बीबीसी संवाददाता निक चाइल्ड का कहना है कि तमाम हमलों और राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद पेंटागन अपनी सेना की तैनाती की समीक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है जबकि इराक़ में अमरीकी सैनिकों की संख्या में कमी की उम्मीद की जा रही है. पेंटागन को इराक़ में अपने सैनिकों की मौजूदा संख्या एक लाख़ पच्चीस हज़ार में अगले कुछ महीनों में कम से कम बीस हज़ार की कमी करनी चाहिए.
लेकिन पेंटागन इस पर कड़ी नज़र रखेगा कि सत्ता का स्थानांतरण सुरक्षा स्थिति को किस तरह प्रभावित करता है. अमरीकी कमांडरों कह चुके हैं कि हाल के दिनों में उनके सैनिकों पर हमलों में कमी आई है लेकिन लेकिन पेंटागन में सोच कुछ और है. असलियत ये है कि इराक़ में जैसे-जैसे राजनीतिक प्रक्रिया तेज़ हो रही है वैसे-वैसे असुरक्षा की भावना भी बढ़ती जा रही है. अमरीकी कमांडरों का कहना है कि इराक़ में कुछ नए सैनिक भेजे जा रहे हैं जो होंगे तो थोड़े ही लेकिन अशांत स्थिति का मुक़ाबला करने के लिए बेहतर हथियारों और उपकरणों से लैस होंगे. वे इराक़ी सुरक्षा बलों की बढ़ती संख्या की तरफ़ भी ध्यान दिलाते हैं. लेकिन इराक़ में अब तक मारे गए 500 अमरीकी सैनिकों के आँकड़े को पेंटागन कुछ ग़ैरमहत्वपूर्ण करके पेश करने की कोशिश कर रहा है. लेकिन पेंटागन यह ज़रूर देख रहा है कि यह आँकड़ा लोगों पर क्या असर डालता है ख़ासतौर से चुनाव के माहौल में. |
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