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हिजाब पर विरोध की आलोचना
फ़्रांस के गृह मंत्री निकोलस सार्कोज़ी ने देश के स्कूलों में हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध के विरुद्ध दुनिया भर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों की आलोचना की है. सार्कोज़ी ने कहा कि सरकार के प्रस्तावों का विरोध करने से सिर्फ़ तनाव, ग़लतफ़हमियाँ और ग़ुस्सा ही बढ़ेगा. पेरिस में हुए विरोध प्रदर्शन में लगभग 5,000 लोगों ने हिस्सा लिया और उसमें से भी अधिकतर तो मुसलमान ही थे. वैसे ये संख्या अनुमान से कहीं कम रही. इसके अलावा फ़्रांस में कई और जगहों पर भी विरोध प्रदर्शन हुए. इतना ही नहीं विरोध प्रदर्शन यूरोप, मध्य पूर्व और भारतीय कश्मीर में भी हुए. राष्ट्रपति ज्याक़ शिराक ने पिछले महीने घोषणा की थी कि स्कूलों में बच्चे ऐसा कोई भी निशान नहीं धारण करेंगे जिससे उनके धर्म का पता चलता हो. फ़्रांस में रहने वाले लगभग 50 लाख मुसलमानों में इसे लेकर ये भावना घर कर रही है कि ये उनके धर्म पर हमला और मानवाधिकारों का उल्लंघन है.
इस्लामी हिजाब के अलावा यहूदियों की गोल टोपी, सिखों की पगड़ी और ईसाइयों के सलीब पहनने पर भी प्रतिबंध लगा है. सरकार का कहना है कि उसने ये नया क़ानून फ़्रांस का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप बचाए रखने के लिए किया है. सार्कोज़ी ने विरोध प्रदर्शन करने वालों के जवाब में कहा, "गणराज्य में हर आदमी बातचीत, समझौते और एक दूसरे को सम्मान देकर ही अपनी जगह बना सकता है." वैसे कुछ प्रमुख मुसलमान संगठनों ने इस विरोध प्रदर्शन से ख़ुद को अलग कर लिया है और कहा है कि वे सरकार से बातचीत करना पसंद करेंगे. |
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