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अल क़ायदा पर संयुक्त राष्ट्र चिंतित
संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अल क़ायदा अगर कोई जैविक या रासायनिक हमला नहीं कर रहा है तो उसकी एकमात्र वजह यह है कि उसके पास तकनीकी जानकारी का अभाव है. अल क़ायदा पर निगरानी रखने के लिए बनी इस समिति की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश अंतराष्ट्रीय आतंकवाद से मुक़ाबला करने के भरसक प्रयास नहीं कर रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अल क़ायदा का बढ़ता प्रभाव और बढ़ते हमलों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र के आधे से अधिक सदस्य देशों ने अभी तक इस बारे में कोई रिपोर्ट नहीं भेजी है कि वो इस प्रकार के संगठनों की गतिविधियों को रोकने के लिए क्या क़दम उठा रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र की इस समिति का संदेश स्पष्ट है कि अल क़ायदा एक गंभीर ख़तरा बना हुआ है और इससे निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र की निगरानी को और सक्षम बनाए जाने की ज़रूरत है. अब तक संयुक्त राष्ट्र की निगरानी समिति सदस्य देशों द्वारा दी जा रही इस जानकारी पर निर्भर करती थी कि यह देश अल क़ायदा से जुड़े गुटों पर कैसे नज़र रख रहे हैं. और ये देश अल क़ायदा को सीमा पार से मिलने वाले धन और हथियारों को रोकने के लिए क्या कर रहे हैं. अब संयुक्त राष्ट्र को चिंता है कि अगर सदस्य देशों को यह जानकारी देने के लिए बाध्य करने वाला प्रस्ताव पारित नहीं किया गया तो आंतकवाद से लड़ने में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका कमज़ोर पड़ जाएगी. |
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