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रविवार, 23 नवंबर, 2003 को 14:17 GMT तक के समाचार
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सवाल जवाब: जॉर्जिया संकट
राष्ट्रपति
कमज़ोर पड़ते जा रहे हैं राष्ट्रपति

जॉर्जिया में विपक्ष के समर्थकों के संसद में दाख़िल होने और राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े के आपातकाल की घोषणा से राजनीतिक संकट पैदा हो गया है. ये संकट नवंबर में हुए चुनावों के बाद पैदा हुआ है जिनमें धाँधली के आरोप लगाए गए थे. जॉर्जिया के राजनीतिक संकट से संबंधित मुद्दों पर एक नज़र डालते हैं:

विपक्ष की शिकायतें क्या हैं

विपक्ष राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े से इसलिए नाराज़ है क्योंकि जनता से किए गए वायदे पूरे नहीं हुए हैं. जॉर्जिया की जनता को लगता है कि राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े एक असफल नेता हैं जो ग़रीबी, भ्रष्टाचार, ऊर्जा और अलग हुए क्षेत्र अबख़ाज़िया के मुद्दों पर वो सब नहीं कर पाए हैं जिसकी उनसे उम्मीद थी. हाल ही में राष्ट्रपति ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने का वायदा किया था. लेकिन चुनाव वाले दिन दो नवंबर को स्पष्ट हो गया कि ऐसा नहीं हुआ. चुनावों का नतीजा सर्वेक्षणों से भी मेल नहीं खाता था. जब चुनाव के तीन हफ़्ते तक नतीजे घोषित नहीं किए गए तो ये शक और बढ़ गया. नतीजों से बाद से ही सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन होने शुरु हो गए.

जॉर्जिया कि आर्थिक मंदी का क्या कारण है?

जॉर्जिया एक समय बहुत समृद्ध क्षेत्र रहा है. वह 'फ़्रूट बास्केट' यानी फलों के बाज़ार के रूप में मशहूर था. लेकिन स्वतंत्रता के बाद जातीय समस्याओं, 1992 के गृह युद्ध और भ्रष्टाचार के कारण उसकी अर्थव्यवस्था बिगड़ गई है. अब अधिकतर लोग ग़रीबी की रेखा के नीचे हैं.

राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े का क्या रवैया रहा है?

राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े ने सत्ता छोड़ने से साफ़ इनकार कर दिया है. वे कहते हैं कि वे सत्ता 2005 में छोड़ेंगे क्योंकि 1992 की तरह गृह युद्ध से ख़ून-ख़राबे का ख़तरा हो सकता है. उन्होंने विपक्ष से बातचीत की पेशकश की है लेकिन मिखाइल साकाशविली की नेशनल मूवमेंट ने इनकार कर दिया है और चाहते हैं राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े इस्तीफ़ा दें.

राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े को कितना समर्थन हासिल है?

पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावों को छोड़ भी दिया जाए तो राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े के लिए पूरे देश में कोई ख़ास समर्थन नज़र नहीं आता. ये भी लगता है कि सेना और पुलिस भी उनके समर्थन में आगे नहीं आए हैं.

रूस का क्या रवैया है?

राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े ने जॉर्जिया को रूस के प्रभाव से परे रखने की कोशिश की है. दोनो देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. तनाव का कारण है अबख़ाज़िया के अलगाववादियों को दिया जा रहा कथित रूसी समर्थन और चेचन्य के विद्रोहियों की जॉर्जिया में मौजूदगी. दो हफ़्ते पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े को मदद देने का वायदा किया था. लेकिन रूस ने कोई सैनिक समर्थन नहीं दिया है और कहा है कि चुनाव में हुई 'ग़लतियाँ' सुधारी जाएँ.

जॉर्जिया का अंतर्रराष्ट्रीय राजनीति में क्या महत्व है?

दरअसल, जॉर्जिया के उत्तर मे रूस और दक्षिण में तुर्की और इरान के होने से यहाँ हमेशा से किसी न किसी कारण से संघर्ष होते रहे हैं.

लेकिन अब जॉर्जिया अमरीका के लिए भी एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है. अमरीका ने यहाँ तेल की पाइपलाइन बिछाने में काफ़ी पूँजी निवेश किया है. इस पाइपलाइन से अज़ेरबाइजन से कैस्पियन सागर के तेल को तुर्की के भूमध्यसागरीय किनारों तक ले जाया जा सकेगा.

मध्य-पूर्व में अस्थिरता की स्थिति में ये ऊर्जा के एक मजबूत विकल्प के रूप में काम आएगा.

पिछले कई सालों में अमरीका ने राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े को वहाँ स्थायित्व और प्रजातांत्रिक मूल्यों का प्रसार करने वाले नेता के रूप में देखते हुए जॉर्जिया की काफ़ी मदद की.

जॉर्जिया देखते ही देखते इसराइल के बाद विश्व का दूसरा ऐसा देश बन गया जहाँ अमरीका से प्रति व्यक्ति इतनी अधिक आर्थिक मदद मिलती हो.

लेकिन अब जॉर्जिया के राष्ट्रपति एडुवर्ड शेवर्दनाद्ज़े को एक कमज़ोर नेता के रूप में देखा जा रहा है.

इससे अमरीका ने भी अपने फ़ायदे-नुक़सान का जोड़ घटाव शुरु कर दिया है.

बस, उसे ख़तरा इस बात का है कि जॉर्जिया की राजनीति में बहुत बड़े परिवर्तन होने की स्थिति में कहीं जॉर्जिया की निकटता फिर रूस से न बढ़ जाए.

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