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गुरुवार, 06 नवंबर, 2003 को 23:37 GMT तक के समाचार
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'युवराज चार्ल्स पर लगे आरोप ग़लत हैं'
युवराज चार्ल्स
युवराज चार्ल्स का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप ग़लत हैं

ब्रिटेन के युवराज चार्ल्स ने उन आरोपों से सख़्ती से इनकार किया है जो एक राष्ट्रीय अख़बार में छपने वाले थे.

यह आरोप सामने नहीं आए हैं क्योंकि लंदन के अख़बार 'मेल ऑन संडे' को चार्ल्स के एक पुराने कर्मचारी के बारे में एक ख़बर छापने से रोक दिया गया था.

चार्ल्स की ओर से खंडन ऐसे समय आया है जब गार्डियन अख़बार ने हाई कोर्ट से शाही परिवार के एक अन्य कर्मचारी का नाम छापने की अनुमति ले ली जो इस आरोपों के प्रकाशन पर रोक का प्रयास कर रहे हैं.

अख़बार का कहना है कि माइकेल फ़ॉसेट इन आरोपों को छापने पर रोक लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

गार्डियन ने अदालत से कहा कि उसका आरोपों को दोहराने का कोई इरादा नहीं है लेकिन उसे फ़ॉसेट का नाम सार्वजनिक करने का पूरा अधिकार है.

युवराज चार्ल्स ने बृहस्पतिवार को एक वक्तव्य जारी करके कहा कि जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे ग़लत हैं.

'आँखों देखी घटना'

हाल के दिनों में मीडिया में छपी कुछ रिपोर्टों में इन आरोपों का ज़िक्र था कि शाही घराने के एक पूर्व कर्मचारी ने कुछ वर्ष पहले एक ऐसी घटना देखी जिससे शाही परिवार के एक वरिष्ठ सदस्य का संबंध था.

 यह आरोप ग़लत हैं. पूर्व कर्मचारी जिस घटना को देखे जाने का दावा कर रहा है वह हुई ही नहीं थी

शाही घराने का बयान

अख़बार लिखता है कि इन अटकलों का समापन होना चाहिए.

एक अटकल यह भी थी कि इस घटना से युवराज चार्ल्स का संबंध है.

शाही परिवार के वक्तव्य में कहा गया है, "यह आरोप ग़लत हैं. पूर्व कर्मचारी जिस घटना को देखे जाने का दावा कर रहा है वह हुई ही नहीं थी".

बयान में कहा गया है कि यह आरोप इसलिए और भी दुख की बात है क्योंकि इसे शाही घराने के एक ऐसे पूर्व कर्मचारी ने लगाया है जो दुर्भाग्य से शराबख़ोरी का शिकार रहा है और फ़ॉकलैंड में सक्रिय भूमिका निभाने की वजह से मानसिक तनाव से गुज़रा है.

"उसने विगत में भी तरह-तरह के आरोप लगाए हैं जिनकी पुलिस ने जाँच की है और उन्हें बेबुनियाद पाया है".

 जो लोग रोक लगवाने का प्रयास कर रहे हैं उनका नाम सार्वजनिक होना चाहिए चाहे उनका ताल्लुक़ शाही परिवार से ही क्यों न हो

गार्डियन

गवाह 'भरोसेमंद' नहीं

बयान में कहा गया है, "जो समाचारपत्र समूह इन आरोपों को छापना चाहता था उसे भी इस बात का पता था और उसने पूर्व कर्मचारी को एक ऐसा गवाह बताया था जो 'भरोसेमंद' नहीं है".

द मेल ऑन संडे शुक्रवार को फिर हाई कोर्ट में अपने ऊपर लगी रोक को चुनौती देने वाला है.

पत्र के संपादक पीटर राइट का कहना है, "हमारे वकीलों ने इस बारे में नोटिस दे दिया है".

गार्डियन का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील भी सोमवार को अस्थाई रोक के आदेश पर बात करने बुधवार को एक न्यायाधीश से मिले थे.

उसके बाद गार्डियन के इस बात पर राज़ी हो जाने पर रोक हटा ली गई थी कि वह पूर्व कर्मचारी का नाम केवल इसी संदर्भ में इस्तेमाल करेगा कि उसने मेल के ख़िलाफ़ रविवार को रोक लगाने में भूमिका निभाई थी.

गार्डियन के संपादक ऐलन रुसब्रिजर ने कहा, "गार्डियन इस नतीजे से बहुत ख़ुश है क्योंकि इसका सीधा असर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पड़ेगा".

"जो लोग रोक लगवाने का प्रयास कर रहे हैं उनका नाम सार्वजनिक होना चाहिए चाहे उनका ताल्लुक़ शाही परिवार से ही क्यों न हो".

माइकेल फ़ॉसेट ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि उनका नाम सार्वजनिक नहीं होना चाहिए क्योंकि इस रिपोर्ट का प्रकाशन उन्हें क़ानूनी दाँवपेच में फंसा सकता है.

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