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मथुरा से 54 किलोमीटर दूर कोसी शेरगढ़ मार्ग पर फालैन गाँव है जहाँ एक अनूठी होली होती है. यहाँ एक शख्स जलती होली में से निकलता है.
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राजस्थान में होली के अवसर पर पारंपरिक तमाशा अब भी होता है जिसमें राजनीतिक स्थिति पर कटाक्ष भी होता है. लेकिन अब कम लोग ही देखने आते हैं. | जिनकी बनाई पिचकारियां हर साल होली के दिन लोगों को इंद्रधनुषी रंगों से सराबोर कर देती हैं. लेकिन खुद उनके चेहरों का रंग उड़ गया है.
| होली पर नज़ीर अकबराबादी ने भी अपनी कलम चलाई. उन्होंने लिखा-मुँह लाल गुलाबी आँखें हों, और हाथों में पिचकारी हो, तो देख बहारें होली की. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||