मिस्र: मुस्लिम ब्रदरहुड के मोहम्मद मुर्सी की जीत

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मिस्र में 30 साल तक बिना रोकटोक शासन करने वाले होस्नी मुबारक के सत्ता से हटने के बाद पहली बार हुए राष्ट्रपति पद के चुनावों में मुस्लिम ब्रदरहु़ड के मोहम्मद मुर्सी को जीत हासिल हुई है.
उन्हें 51.73 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शफीक को 48.2 प्रतिशत वोट मिले हैं.
इस बीच मोहम्मद मुर्सी ने अपने वादे के मुताबिक, मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ ही फ्रीडम इन जस्टिस पार्टी के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया है.
चुनाव से पहले मुर्सी ने वादा किया था कि वे चुनाव जीतेंगे तो इन पदों से इस्तीफा दे देंगे.
इससे पहले, राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों की जैसे ही घोषणा हुई, वैसे ही तहरीर चौक में आतिशबाजी और पटाखे फूटने शुरु हो गए. अनेक लोगों ने ढोल बजाकर और हॉर्न बजाकर अपनी खुशी का इजहार किया.
<link type="page"><caption> कौन हैं मोहम्मद मुर्सी?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/06/120624_mursi_profile_va.shtml" platform="highweb"/></link>
लेकिन मुस्लिम ब्रदरहुड की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धताओं के बारे में संदेह रखने वाले अनेक लोग इन नतीजों से सहमें हुए थे.
कट्टरपंथी माने जाने वाली संस्था मुस्लिम ब्रदरहुड के मोहम्मद मुर्सी को कुल एक करोड़ 32 लाख मत मिले और पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक़ को एक करोड़ 23 लाख मत मिले.
<link type="page"><caption> क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/06/120624_profile_muslim_brotherhood_ml.shtml" platform="highweb"/></link>
पिछले साल फरवरी में कई महीनों तक लोकतंत्र के समर्थन में हुए प्रदर्शनों के बाद 30 साल का होस्नी मुबारक का शासन तब खत्म हुआ था जबकि उन्हें राष्ट्रपति पद छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था. इस तरह से उस घटनाक्रम में जनांदोल के सवा साल बाद मिस्र में पहले लोकतांत्रिक चुनाव हुए हैं.
अमरीका में पढ़े इंजीनियर मुर्सी
राष्ट्रपति चुनावों में विजयी घोषित हुए मोहम्मद मुर्सी 60 वर्षीय इंजीनियर हैं जिन्होंने अपनी शिक्षा अमरीका में पाई.
वे वर्ष 2001 से 2005 तक निर्दलीय सांसद थे. वे जनवरी 2011 में मुस्लिम ब्रदरहुड की फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी के अध्यक्ष बने थे.

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उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तब बनाया गया था जब ब्रदरहुड के प्रभावशाली नेता खैरात अल-शातेर को चुनावी दोड़ से बाहर कर दिया गया क्योंकि उनके खिलाफ़ होस्नी मुबारक के शासनकाल के दौरान आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे.
रैलियाँ और तनाव
मिस्र की राजधानी काहिरा में शनिवार देर रात से ही लाखों मतदाताओं की भीड़ 'अरब क्रांति' के प्रतीक तहरीर चौक पर जमा थी और रविवार को नतीजों की घोषणा का इंतजार कर रही थी.
ये घोषणा चुनाव आयोग के मुख्यालय में खासी सुरक्षा, सशस्त्र सुरक्षाकर्मियों और टैंकों की मोजूदगी के बीच हुई.
मिस्र के चुनाव आयोग ने कई घंटे तक नतीजों की घोषणा में देरी की क्योंकि उसका कहना था कि उसे उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की ओर से कथित अनियमित्ताओं की अपील का निपटारा करना था.
लेकिन इस बीच देश में खासा तनाव था और प्रतिद्वंद्वियों के समर्थकों की बीच कई तरह की अफवाहें उड़ रही थीं.
चुनाव आयोग ने नतीजे की घोषणा से पहले अपने विस्तृत बयान में इन सैकड़ों शिकायतों की चर्चा की और कहा कि दोनों पक्षों ने खुद ही चुनाव के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया की पारदर्शिता की पुष्टि की है.
जहाँ मुस्लिम ब्रदरहुड के अधिकतर समर्थक काहिरा के तहरीर चौक में जमा हुए, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शफीक काहिरा के उत्तरी इलाके नासर सिटी में रैली कर रहे थे.
संवाददाताओं के अनुसार दोनों ही जगहों पर माहौल शांतिपूर्ण लेकिन तनाव से भरा हुआ था.
अनेक लोगों को सत्ताधारी सैन्य अधिकारियों की मंशा के बारे में शंका है क्योंकि पिछले ही हफ्ते उन्होंने खुद को व्यापक अधिकार दे दिए थे जब सर्वोच्च संवैधानिक अदालत ने कहा था कि इस्लामी सांसदों की बहुमत वाली संसद को भंग कर देना चाहिए.












