एक अनोखा नाइट क्लब...

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क्या आपने कभी ऐसा नाइट-क्लब देखा है जहां लोग संस्कृत गीतों पर थिरकते हैं.
सुनकर बड़ी हैरानी होती है लेकिन एक भारतीय राजनयिक विश्वनाथन की मानें तो उन्होंने अपनी आंखों से ऐसा नाइट क्लब देखा है.
विश्वनाथन हाल ही में अर्जेंटीना गए थे. वे कहते हैं कि ब्यूनस-आयर्स में ग्रोव नामक एक नाइट-क्लब है जहां बज रहे गीतों के बोल होते हैं...जय-जय राधा रमन हरी बोल, जय कृष्ण हरे, गुरुदेवा गुरु ओम, गणेश शरणम, गोविंदा-गोविंदा, जय शिव-शंभू.
ये कोई छोटा-मोटा क्लब नहीं है. यहां एक साथ 800 लोग थिरकते हैं.
देह का आत्मा से मेल
विश्वनाथन अपना जो दूसरा अनुभव बताते हैं, वो भी कम दिलचस्प नहीं है.
वे कहतें हैं कि मैं जब बार गया और वहां मैंने शराब मांगी तो बैरा ने कहा, ''माफ करें, शराब नहीं है. यहां धूम्रपान भी निषेध है, ड्रग्स की भी मनाही है, मांस नहीं मिलता. सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक्स, फलों का रस और शाकाहारी भोजन मिलता है.''
विश्वनाथन कहते हैं कि वे पहले झटके से उबर नहीं पाए थे कि तभी उन्हें दूसरा झटका तब लगा जब उन्होंने नाइट क्लब में अनूठे संगीत के साथ लोगों को योग की भांति-भांति मुद्राओं में देखा.
इस नाइट क्लब में गाने वाले रोड्रिगो कहते हैं, ''योगा-पार्टी एक अलग पार्टी है. ये नई अवधारणा है. इसमें मौज है लेकिन शराब नहीं, मस्ती है लेकिन सिगरेट और ड्रग्स नहीं हैं.''
वे कहते हैं, ''यहां मंत्रों, योग, ध्यान, संगीत और नृत्य के जरिए देह का आत्मा के साथ संबंध स्थापित कराया जाता है.''












