शिकागो में राणा के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरु

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
मुंबई हमलों से संबंधित एक मुक़दमे में, शिकागो की एक अदालत में पाकिस्तान में जन्मे कैनेडियन नागरिक तहाव्वुर राणा के ख़िलाफ़ कार्यवाही शुरु हो गई है.
राणा पर आरोप है कि वे नवंबर 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों की साज़िश में शामिल थे और उन्होंने निशाना बनाए जाने वाली जगहों की पहचान करने में डेविड हेडली की सहायता की थी.
नवंबर 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों में कम से कम 166 लोग मारे गए थे जिनमें छह अमरीकी भी थे. अनेक अन्य लोग इन घटनाओं में घायल हुए थे और भारत-पाकिस्तान समग्र वार्ता पर इसके बाद विराम लग गया था.
ग़ौरतलब है कि किसी समय राणा के दोस्त रहे डेविड हेडली अपने ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप स्वीकार कर चुके हैं और सरकारी गवाह बन गए हैं. वे 50 वर्षीय राणा के ख़िलाफ़ अहम सरकारी गवाह के रूप में पेश होंगे.
हेडली अपने बयान में कह चुके हैं कि मुंबई हमलों में शामिल लोगों को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के लोगों ने प्रशिक्षण दिया था और इसके लिए पैसा जुटाने में भी मदद की थी.
अनेक राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मुक़दमे में मुंबई हमलों में आईएसआई का हाथ होने की बात आती है तो अमरीका-पाकिस्तान के तनावपू्र्ण रिश्ते और ख़राब हो सकते हैं.
जूरी कैसी हो?
वर्ष 2009 में गिरफ़्तार हुए तहव्वुर राणा के ख़िलाफ़ मामले की शुरुआत शिकागों के डर्कसेन फ़ेडरल कोर्टहाउस में जूरी के चयन की प्रक्रिया के साथ शुरु हुई है. ये सुनवाई लगभग एक महीना चलेगी.
इन जूरी सदस्यों को क़रीब 60 प्रश्नों का जवाब देना पड़ेगा जिससे यह पता चल सके कि वे इस्लाम और संबंधित विषयों के बारे में क्या सोचते हैं.
राणा के वकील ने कहा है कि दूसरे अभियुक्त डेविड हेडली ने उन्हें धोखे से हमलों की इस योजना में शामिल किया था.
उनके वकील चार्ली स्विफ़्ट का कहना है कि 'चूंकि ज़्यादातर अमरीकियों की राय मुसलानों के प्रति पूर्वाग्रह से भरी है, इसलिए ये सुनिश्चित करना ज़रुरी है कि राणा को सही जूरी मिले.'
समाचार एजेंसियों के अनुसार उन्होंने कहा, "जूरी में हमें ऐसे लोंगों की ज़रुरत है जो जाति और वंश के लिहाज़ से अलग-अलग हों और ऐसे पुरुष, स्त्री, युवा, बुज़ुर्ग हों जो अपनी भावनाओं को दरकिनार रखते हुए विश्वास और तर्क के आधार पर निर्णय दे सकें."
जबकि राणा के ही एक और वकील पैट्रिक बेलगेन ने कहा, "बहुत संभावना है कि भारत, पाकिस्तान या डेनमार्क का कोई व्यक्ति इस जूरी में शामिल न किया जाए."
'कूटनीतिक संरक्षण मिले, पाक सरकार के लिए काम किया'
राणा के पुराने मित्र हेडली अदालत को बताया चुके हैं कि मुंबई हमलों से दो साल पहले ही वे इस योजना पर काम करे थे और इसके लिए उन्हें पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी के एक अधिकारी ने 25 हज़ार डॉलर की राशि भी दी थी.
उन पर ये भी आरोप हैं कि वे डेविड हेडली और 'मेजर इक़बाल' नाम के एक व्यक्ति के बीच संदेशों का आदान-प्रदान करते थे. भारतीय गृह मंत्रालय मेजर इक़बाल नाम के व्यक्ति को पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का सदस्य मानता है.
हालांकि राणा अपने बयान में हेडली के लगाए आरोपों का खंडन करते हैं.
ग़ौरतलब है कि पिछले महीने राणा ने अदालत में एक अर्ज़ी दी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें रिहा किया जाए और उनके ख़िलाफ़ मुक़दमे को ख़ारिज किया जाए.
राणा का दावा है कि उन्होंने पाकिस्तान की सरकार के लिए काम किया था इसलिए उन्हें कूटनीतिक संरक्षण मिलना चाहिए.
राणा पाकिस्तानी फ़ौज में अफ़सर रह चुके हैं और बाद में वे कैनेडा के नागरिक बन गए थे. हेडली से उनकी दोस्ती अमरीका में हुई.
उनके पिता पाकिस्तानी हैं और माता अमरीकी हैं. मुक़दमे में जूरी के चयन के बाद पहली सुनवाई 23 मई को होगी.












