'भारतीय पुरुषों का यौन उत्पीड़न पर चौंकाने वाला रुख़'

- Author, शालू यादव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
एक अंतरराष्ट्रीय संस्था के अध्ययन में पाया गया है कि भारत में चार में से एक पुरुष ने महिलाओं को यौन उत्पीड़न का शिकार बनाया है.
यही नहीं, अध्ययन में ये भी पाया गया है कि पांच में से एक पुरुष ने अपनी पत्नी या पार्टनर को यौन संबंध बनाने पर मजबूर किया है.
इंटरनेशनल सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन विमैन' ने अपने 'अंतरराष्ट्रीय पुरुष और लैंगिक समानता' शीर्षक के सर्वेक्षण में ऐसा पाया है.
ब्राज़ील में ऐसे पुरुषों की संख्या सिर्फ़ दो प्रतिशत और चिली, क्रोएशिया, मैक्सिको और रवांडा जैसे देशों में यौन उत्पीड़न करने वाले पुरुषों की संख्या भारत के 24 फ़ीसदी के मुकाबले में नौ प्रतिशत पाई गई है.
लैंगिक समानता और इसके प्रति समाज के रुख़ को जानने के मक़सद से ये सर्वेक्षण छह विकासशील देशों में किया गया है.
भारत और अमरीका में स्थित 'इंटरनेशनल सैंटर फॉर रिसर्च ऑन विमैन' और ब्राज़ील के 'इंस्टीटयुटो प्रोमुन्दो' के इस सर्वेक्षण में 18 से 59 साल के 8000 से ज़्यादा पुरुषों और 3500 महिलाओं से बात की गई.
लैंगिक समानता से जुड़े मुद्दों पर रवांडा और भारत में पुरुषों का रवैया सबसे ज़्यादा अनुचित पाया गया है.
पारिवारिक शांति
सर्वे के मुताबिक भारत में क़रीब 80 प्रतिशत पुरुषों का मानना है कि गृहस्थी से जुड़े काम और बच्चे संभालने का काम महिलाओं को ही करना चाहिए जबकि रवांडा में 61 प्रतिशत पुरुष ऐसी सोच रखते हैं.
हांलांकि भारत में ये सर्वेक्षण केवल राजधानी दिल्ली और आंध्र प्रदेश के शहर विजयवाड़ा में ही किया गया है.
'इंटरनेशनल सैंटर फॉर रिसर्च ऑन विमैन' के एशिया निदेशक रवि वर्मा ने बीबीसी से बातचीत में ये स्पष्ट किया कि दो शहरों में किये गए इस सर्वेक्षण को पूरे भारत की छवि से नहीं जोड़ना चाहिए.
उन्होंने कहा, "इस रिपोर्ट के आधार पर ये नहीं कहा जा सकता कि भारत के सभी पुरुष ऐसी सोच रखते हैं. हांलांकि अगर मुझसे पूछा जाए, तो जो इस सर्वेक्षण में सामने आई बातें ऐसे किसी भी और सर्वेक्षण से कुछ अलग नहीं हैं."
सर्वेक्षण में पाया गया है कि इन छह देशों में भारत के अलावा सभी देशों में करीब 50 प्रतिशत पुरुष घर के कामकाज में हाथ बंटाते हैं.
भारत में 65 प्रतिशत पुरुषों का ये भी मानना है कि पारिवारिक शांति बनाए रखने के लिए महिलाओं को प्रताड़ना को सहन करना चाहिए. हांलांकि पढ़े-लिखे लोगों में ये रवैया कम ही देखने को मिला.
समलैंगिकों के प्रति रुख़
इस सर्वेक्षण में भारतीय पुरुषों का समलैंगिकों को प्रति रुख़ कुछ असहज पाया गया. क़रीब 92 प्रतिशत भारतीय पुरुषों का कहना है कि वे समलैंगिकों के साथ अटपटा-सा महसूस करते हैं और अगर उनका बेटा समलैंगिक हो तो उन्हें शर्मिंदगी महसूस होगी.
ब्राज़ील में 43 प्रतिशत पुरुष समलैंगिकों के साथ अजीब-सा महसूस करते हैं. हांलाकि युवा वर्ग और शिक्षित पुरुषों में ये रवैया कम पाया गया है.
जहां तक यौन उत्पीड़न की बात है, भारत के 24 प्रतिशत पुरुषों ने ये कबूल किया कि उन्होंने कभी न कभी अपने जीवन में महिलाओं के साथ यौन प्रताड़ना की है.
रवांडा से भी पीछे है भारत
पुरुषों और महिलाओं को समान दर्जा देने के पैमाने पर क्रोएशिया के पुरुष अव्वल दर्जे पर पाए गए हैं. विश्व के सबसे कम विकसित देशों में से एक, रवांडा के पुरुषों की छवि इस सर्वेक्षण में भारतीय पुरुषों की छवि से बेहतर उभर कर आई.
जिन भारतीय पुरुषों पर ये सर्वेक्षण किया गया, उनमें से ज़्यादातर दिल्ली के रहने वाले थे. पिछले साल आए एक सरकारी सर्वेक्षण में पाया गया था कि दिल्ली में हर तीन में से एक महिला किसी न किसी रुप के यौन उत्पीड़न का शिकार हुई हैं.
वॉशिंगटन में रिलीज़ की गई इस सर्वेक्षण रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि जहां भारत विश्व की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यस्था बनने की राह पर है, वहीं लैंगिक समानता के मुद्दे पर भारत की छवि दयनीय है.












