बीबीसी के 100 साल : वो दस पल, लोग और चीजें, जिन्होंने इसे बनाया

ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन यानी बीबीसी आज अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहा है.
बीबीसी दुनिया का सबसे बड़ा ब्रॉडकास्टर है. 18 अक्टूबर 1922 को लंदन में इसकी औपचारिक तौर पर स्थापना हुई थी.
पिछले सौ साल का इसका लंबा इतिहास काफी विविधता भरा और रोचक रहा है.
आज जब बीबीसी अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहा है तो उन कुछ शानदार पलों, आइकॉनिक चीजों और उन मशहूर लोगों को याद करना जरूरी है, जिन्होंने मिल कर इसे बनाया है.
1. बीबीसी का पहला रेडियो स्टेशन

कुछ शौकिया स्टेशनों के बंद होने के बाद बीबीसी ने 14 नवंबर 1922 को अपना पहला डेली रेडियो सर्विस शुरू किया था. शाम छह बजे पहला प्रोग्राम शुरू किया गया था. ये एक न्यूज़ बुलेटिन था. खबरें न्यूज़ एजेंसियों ने दी थी. इसके बाद मौसम का पूर्वानुमान बताया गया. इसे ब्रिटेन के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने मुहैया कराया था, जिसे मेट ऑफिस कहा जाता है.
ये बुलेटिन अंग्रेजी में पढ़े गए थे. इन्हें डायरेक्टर ऑफ प्रोग्राम्स आर्थर बरोज ने पढ़ा था. बरोज ने बुलेटिन दो बार पढ़ा था. एक बार तेजी से और दूसरी बार धीरे-धीरे ताकि नोट लेने वाले इसे सुन कर नोट कर सकें.
2. वर्ल्ड सर्विस की शुरुआत

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19 दिसंबर 1932 को किंग जॉर्ज पंचम ने ब्रिटेन और दुनिया के दूसरे हिस्सों के लिए पहला रॉयल क्रिसमस मैसेज दिया था. शॉर्टवेव पर इस प्रसारण का मुख्य मकसद पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में फैले अंग्रेजी बोलने वाले लोगों के लिए संदेश देना था.
उन्होंने कहा कि ये सर्विस ऐसी महिलाओं और पुरुषों के लिए है जो बर्फ, रेगिस्तान या समुद्र की वजह से कटे हुए हैं. यह अकेली आवाज़ है, जो उन लोगों तक पहुंच रही है. इस स्पीच के साथ ही बीबीसी की एम्पायर सर्विस की शुरुआत हो गई थी. ( आज इसे ही बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के नाम से जाना जाता है) .

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भौगोलिक इलाके, भाषा चयन और ऑडियंस तक पहुंच के नज़रिये से देखें तो बीबीसी वर्ल्ड सर्विस आज दुनिया का सबसे बड़ा एक्सटर्नल ब्रॉडकास्टर है.
ये अपनी सेवाओं का दुनिया की 40 से अधिक भाषाओं में प्रसारण करता है. इनका प्रसारण ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, टीवी और रेडियो पर भी होता है.
3. बीबीसी का जाना-पहचाना माइक्रोफोन

1930 में बाज़ार में मिलने वाले माइक्रोफोन काफी महंगे थे. लिहाजा बीबीसी ने मार्कोनी कंपनी के साथ मिल कर अपना माइक्रोफोन बनाने का फैसला किया. इस तरह 1934 में टाइप ए माइक्रोफोन आया, जिसने ब्रॉडकास्टिंग की दुनिया में क्रांति कर दी.
बाद में इसे और थोड़ा विकसित और रिफाइन किया और फिर यह क्लासिक बीबीसी माइक्रोफोन के तौर पर जाना गया. कई ब्रिटिश पीरियड ड्रामा और फिल्मों में यह क्लासिक माइक्रोफोन दिखा.
4. बीबीसी अरबी सेवा - पहली भाषाई रेडियो सेवा

बीबीसी अरबी बीबीसी की पहली भाषाई रेडियो सेवा थी और इसे 1938 में शुरू किया गया था. इसके पहले उद्घोषक थे अहमद कमाल सुरूर इफेंदी. उन्हें मिस्र रेडियो सेवा से लाया गया था. सुरूर इस सेवा की आवाज़ थे.
उनके आते ही बीबीसी अरबी सेवा रातोंरात लोकप्रिय हो गई. अरब दुनिया में वह सबसे पसंदीदा उद्घोषक थे.

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इसके बाद कई भाषाओं में प्रसारण शुरू हो गया. एक के बाद एक इनका कारवां बढ़ता गया. अगले कुछ दशकों में दुनिया भर में बीबीसी ने कई भाषाओं में रेडियो और टेलीविजन सेवाएं शुरू कीं.
बीबीसी ऑनलाइन 1997 में शुरू हुआ. इसके बाद कई भाषाओं में ऑनलाइन सर्विस शुरू हुईं. सोशल मीडिया के आने के साथ ही बीबीसी न्यूज़ और बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की अलग-अलग भाषाओं की ऑनलाइन सेवाओं का कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर प्रसारण होने लगा.
अब बीबीसी वर्ल्ड सर्विस अपना फोकस डिजिटल-फर्स्ट कंटेंट की ओर कर रही है.
5. बीबीसी की पहली ब्लैक महिला प्रोड्यूसर

उना मारसन बीबीसी की पहली ब्लैक महिला प्रोड्यूसर थीं. वह मूल रूप से जमैका की रहने वाली थीं. 1939 में बीबीसी में काम शुरू करने से पहले ही वह पत्रकारिता कर रही थीं.
उनका पहला वर्क रोल असिस्टेंट के तौर पर एलेक्जेंड्रा पैलैस स्टूडियोज में था. लेकिन उन्होंने मार्च 1941 में ' एंपायर प्रोगाम्स' विभाग में प्रोग्राम असिस्टेंट के तौर पर फुलटाइम काम करना शुरू किया.
कविता में उनकी रुचि की वजह से वो 'कैरेबियन वॉयस' जैसा प्रोग्राम बना पाईं. ये 'कॉलिंग द वेस्ट इंडीजट सिरीज के तहत साप्ताहिक फीचर था.
6. दूसरे विश्व युद्ध का खात्मा

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1 मई 1945 को बीबीसी ने एडोल्फ हिटलर की खुदकुशी की घोषणा की. अगले दिन शाम को सात बजे ये खबर देने के साथ ही सारे कार्यक्रम रोक दिए गए कि जर्मनों ने इटली में हथियार डाल दिए हैं. 4 मई को जर्मन सेना ने डेनमार्क में समर्पण कर दिया था. संघर्ष खत्म हो चुका था.
लेकिन अगले कुछ दिनों तक लोगों को इस पर विश्वास नहीं हुआ. फिर 7 मई को भीड़ बकिंघम पैलेस के बाहर जमा हो गई. लेकिन पूरा देश जिस ख़बर का पांच साल से इंतजार कर रहा था वो नहीं आई.
ये पता चला कि ब्रिटिश अधिकारी रूसियों और अमेरीकियों से इस खबर की पुष्टि का इंतजार कर रहे थे कि नाजियों को हरा दिया गया है.
शाम छह बजे बीबीसी ने हैरान-परेशान श्रोताओं को बताया कि प्रधानमंत्री चर्चिल आज रात कोई घोषणा नहीं करेंगे. लेकिन अचानक रात 7 बज कर 40 मिनट पर सारे कार्यक्रम रोक दिए गए. ये कार्यक्रम ये कह कर रोके गए कि अगला दिन यूरोप में पहला फर्स्ट विक्ट्री डे होगा.
यूरोप में युद्ध खत्म हो चुका था. अगले दिन पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में चर्चिल का बयान पहुंच गया. लेकिन लोग इससे इतने खुश हो गए कि उन्होंने जगह-जगह जश्न मनाना शुरू कर दिए.
बीबीसी ने दस दिनों का स्पेशल प्रोग्राम शुरू किया. पूरा ब्रॉडकास्टिंग हाउस 1937 के बाद पहली बार लाइटों से रोशन किया गया.
7. बीबीसी टीवी दुनिया से जुड़ा

1967 में बीबीसी के टीवी प्रोग्राम ''आर वर्ल्ड'' यानी हमारी दुनिया ने इतिहास रच दिया.
इसके प्रसारण से पहले टेलीविजन सेटेलाइट के जरिये कुछ देश दोरफतरा जुड़े हुए थे. लेकिन ये भी सिर्फ प्रयोग के लिए था. मसलन बीबीसी दुनिया का पहला ब्रॉडकास्टर था, जो 1936 में ही 'हाई डेफिनिशन' टेलीविजन सर्विस मुहैया कराता था.
लेकिन 'आर वर्ल्ड' इससे अलग था. इसका मकसद लाइव टीवी प्रोग्राम था. हर महाद्वीप के एक देश से इसे देखा जा सकता था. मनोरंजन के जरिये पूरी दुनिया में लाइव टीवी सेटेलाइट की मदद से पहुंच चुका था.
इस शो में ब्रिटिश योगदान के तौर पर बीटल्स ने अब बेहद मशहूर गाना - 'ऑल यू नीड इज लव' गाया था. 45आरपीएम विनायल पर रिकार्ड ये परफॉरमेंस बाद में रिलीज किया गया और तुरंत हिट हो गया.
यह प्रोग्राम आगे आने वाले टेलीविजन कार्यक्रमों के लिए एक नज़ीर बन गया है. 1985 में ऐसा ही एक मशहूर कार्यक्रम हुआ था लाइव एड.

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कई जगहों पर हुए रॉक म्यूजिक कन्सर्ट के लिए बॉब जेल्डॉफ और मिज उर ने फंड इकट्ठा किया था और इसे इथोपिया में अकाल राहत कार्य में खर्च किया गया था.
बीबीसी अपनी सफलता के दौर में था. इसके पास दुनिया के सबसे बड़े पैमाने का सेटेलाइट लिंक-अप था. इसके साथ ही ये दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा टीवी ब्रॉडकास्टर बन चुका था,जिसके लगभग 60 देशों में 40 करोड़ दर्शक हो चुके थे. ये दर्शक इसका लाइव ब्रॉडकास्ट देख रहे थे.
8. रहस्यमयी जहरीला छाता

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ऊपर दिख रहा छाता उस हथियार की नकल है, जिसका इस्तेमाल बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के पत्रकार जियोर्जी मारकोव की हत्या के लिए हुआ था.
7 सितंबर 1978 को मारकोव लंदन में बीबीसी दफ्तर बुश हाउस के लिए निकले थे. उसी दौरान उनके पैर के पिछले हिस्से में किसी रहस्यमयी शख्स से छाता घुसेड़ दिया. इसके बाद वो वहां से भाग निकला.
इसके बाद मारकोव गंभीर रूप से बीमार पड़ गए. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. उस दौरान उन्होंने बीबीसी कर्मचारियों से कहा था कि उन्हें इस बात का पक्का विश्वास है कि छाता जहरीला था. इसे बुलगारिया सीक्रेट सर्विस या केजीबी ने जहरीला बनाया है.
इस हमले के तीन दिन बाद 49 वर्ष की उम्र में मारकोव का निधन हो गया. उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो साल की बेटी थी.
दरअसल मारकोव बुलगारिया में कम्युनिस्ट शासन के मुखर आलोचक थे. इस वजह से लंबे समय तक ये संदेह रहा कि उन पर हमला बुलगारिया सीक्रेट सर्विस या केजीबी के लोगों ने किया होगा.
बाद में पुलिस के गोपनीय दस्तावेजों से हत्यारे की पहचान ऐसे शख्स के तौर हुई जिसका कोड नेम ''पिकाडिली'' था.
हालांकि इस हत्याकांड में किसी को सजा नहीं मिल पाई.
9. अफ्रीकन स्पोर्ट्स 'पर्सेनैलिटी ऑफ द ईयर' ट्रॉफी

ये ट्रॉफी हर साल के सर्वेश्रेष्ठ अफ्रीका खिलाड़ी को दी जाती है. इसे जीतने वाले प्रीमियर लीवरपूल के फुटबॉलर मोहम्मद सलह इसमें शामिल हैं. मिस्त्र के इस फुटबॉलर को 2018 में ये ट्रॉफी दी गई थी.
2001 से यह ट्रॉफी फुटबॉलर को देना शुरू किया गया था. लेकिन 2021 में इसे 'अफ्रीकन स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी ऑफ दि ईयर' के तौर पर लॉन्च किया गया. खेल की दुनिया में इसे अफ्रीका के योगदान को रेखांकित करने के लिए शुरू किया गया था.
इस अवार्ड के पीछे भी एक मार्मिक कहानी है. इस ट्रॉफी को सियेरा लियोन के एक पूर्व बाल सैनिक ने बनाया था. इस तरह की ट्रॉफी और दूसरी कलाकृतियों को बनाने के उसके जुनून से उसकी जिंदगी बदल दी गई थी.
10. डेविड एटनबोरो और ग्रीन प्लैनेट

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ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर और प्रकृतिवादी डेविड एटनबोरो बीबीसी वाइल्डवलाइफ डॉक्यूमेंट्रीज के लिए मशहूर हैं. एटनबोरो की मधुर आवाज में पेश किए जाने वाले इस कार्यक्रम के आठ दशक हो चुके हैं.
'ब्लू प्लैनेट', 'द लाइफ कनेक्शन' और 'नेचुरल वर्ल्ड' उनके मशहूर कार्यक्रम रहे हैं. इसे दुनिया भर के दसियों लाख लोगों ने देखा है. इन कार्यक्रमों को एमी और बाफ्टा अवार्ड मिल चुके हैं.
एटनबोरो ने 1960 के दशक में बीबीसी में प्रोग्राम शुरू किए थे और बाद में वो यहां सीनियर मैनेजर बन गए थे. वो बीबीसी-2 के कंट्रोल रहे. उन्होंने बीबीसी टेलीविजन के प्रोग्रामिंग डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया.
जलवायु परिवर्तन के बारे में लोगों को बताने में उनके योगदान के लिए उन्हें यूएन एनवायरनमेंट प्रोग्राम ने 2021 में 'चैंपियन ऑफ अर्थ' का खिताब दिया.
पांच हिस्सों का उनका नया सिरीज- द ग्रीन प्लैनेट में वह पूरी दुनिया में वर्षा वनों से लेकर बेहद बर्फीले उत्तरी इलाके का जायजा लेते हैं. इस दौरान वो इसकी पड़ताल करते हैं कि आखिर हमारी धरती अलग और कभी-कभी बेहद चरम परिस्थिति से कैसे जूझ रह रही है.
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