उत्तर प्रदेश के लखनऊ में बुधवार को कांग्रेस मुख्यालय
से विधानसभा घेराव करने जा रहे कांग्रेस के कार्यकार्ताओं और पुलिस के बीच दिन भर
धक्का मुक्की चलती रही.
कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को विधानसभा से पहले ही रोक दिया गया था और कइयों को हिरासत में भी लिया गया.
कांग्रेस के मुताबिक़ विधानसभा की ओर जाने की
कोशिश करते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पुलिस से धक्का-मुक्की के दौरान कांग्रेस
कार्यकर्ता प्रभात पाण्डेय की मौत हो गई है. मृतक गोरखपुर के सहजनवां के रहने वाले
थे.
वहीं लखनऊ पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर किसी भी प्रकार का बल प्रयोग किया ही नहीं गया था.
पुलिस का कहना है कि मृतक को आखिरी बार कांग्रेस प्रदेश पार्टी कार्यालय में देखा गया था, जहां वह बेहोशी की हालत में पाए गए थे. डॉक्टरों के अनुसार, प्रथम दृष्टया उनके शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं. उन्हें मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि उत्तर प्रदेश के अलावा असम में भी
एक कांग्रेस कार्यकर्ता की मौत हुई है.
राहुल गांधी ने लिखा, "भाजपा शासित असम और उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र
और संविधान की फिर से हत्या हुई है. देश भर में कांग्रेस पार्टी बाबा साहेब और
संविधान के समर्थन में सत्याग्रह कर रही है. इस दौरान अत्यधिक पुलिस बल के कारण
गुवाहाटी में मृदुल इस्लाम और लखनऊ में प्रभात पाण्डेय, हमारे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मृत्यु बहुत दुखद और
निंदनीय है."
उन्होंने लिखा, "उनके शोकाकुल प्रियजनों को अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता
हूं. इन परिवारों को पूरे न्याय का अधिकार है. कांग्रेस के बब्बर शेर सत्य और
संविधान के लिए संघर्ष जारी रखेंगे."
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अस्पताल पहुंचकर कहा कि सरकार की संवेदना मृतक के परिवार वालों के साथ है. पाठक ने बताया कि पोस्टमार्टम के आदेश दिए जा चुके हैं, सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है.
पाठक ने कहा, "मेरे पास प्रेस के साथी का फोन आया कि कांग्रेस कार्यालय के कमरे में उनके भतीजे गिरे पाए गए हैं, उसकी तबीयत ख़राब है. तत्काल उनको सिविल अस्पताल लाया गया. लेकिन यहां आने पर पता चला कि उनकी मृत्यु हो गयी है."
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा, "पार्टी के लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने की मंशा से विधानसभा की ओर जा रहे थे. संघर्ष के दौरान पुलिस की बर्बरता से एक युवा कार्यकर्ता की मौत हो गई इसकी ज़िम्मेदारी प्रदेश की योगी सरकार और पुलिस की है."
राय ने मृतक के परिवार वालों के लिए 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है.