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अमित शाह के भाषण में आंबेडकर पर जिस टिप्पणी के लिए हो रहा है विवाद
संविधान पर संसद में चल रही बहस के दौरान मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणियों पर कांग्रेस ने सख़्त एतराज़ जताया है.
अमित शाह अपने भाषण के दौरान डॉ बीआर आंबेडकर की विरासत पर बोल रहे थे.
अमित शाह ने कहा कि आजकल आंबेडकर का नाम लेना एक फ़ैशन बन गया है.
उन्होंने कहा, "अब ये एक फ़ैशन हो गया है. आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर… इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता."
अमित शाह के पूरे भाषण के एक अंश को लेकर काफ़ी विवाद हो रहा है. अमित शाह के इस बयान पर कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आपत्ति जताई है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने लिखा, "मनुस्मृति मानने वालों को आंबेडकर जी से तकलीफ़ बेशक होगी ही."
बुधवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अमित शाह के भाषण के बारे में लंबा पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि अमित शाह ने संसद में आंबेडकर को अपमानित करने के काले अध्याय को एक्सपोज़ किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के आंबेडकर के प्रति पापों की लंबी फ़ेहरिस्त है जिसमें उन्हें दो बार चुनावों में हराना भी शामिल है.
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अमित शाह ने आंबेडकर पर क्या कहा?
अपने भाषण में अमित शाह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट से आंबेडकर के इस्तीफ़ा का ज़िक्र कर रहे थे.
कांग्रेस की ओर इशारा करते हुए अमित शाह ने कहा कि अब चाहे आंबेडकर का नाम सौ बार ज़्यादा लो लेकिन साथ में आंबेडकर जी के प्रति आपका भाव क्या है, ये वह बताएंगे.
अमित शाह ने कहा, "आंबेडकर ने देश की पहली कैबिनेट से इस्तीफ़ा क्यों दे दिया? उन्होंने कई बार कहा कि वह अनुसूचित जातियों और जनजातियों के साथ होने वाले व्यवहार से असंतुष्ट हैं. उन्होंने सरकार की विदेश नीति से असहमति जताई थी अनुच्छेद 370 से भी सहमत नहीं थे. आंबेडकर को आश्वासन दिया गया था, जो पूरा नहीं हुआ, इसलिए कैबिनेट से इस्तीफ़ा दे दिया था."
अमित शाह ने कहा, "जिसका विरोध करते हो उसका वोट के लिए नाम लेना कितना उचित है?"
अमित शाह के भाषण के बाद कांग्रेस के नेताओं ने उन पर आंबेडकर के अपमान के आरोप लगाए.
कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुल खड़गे ने एक्स पर किए एक पोस्ट के ज़रिए गृह मंत्री के बयान पर हमला बोला.
खड़गे ने कहा, "गृह मंत्री अमित शाह ने जो आज भरे सदन में बाबा साहेब का अपमान किया है, उससे फिर एक बार सिद्ध हो गया है कि BJP/RSS तिरंगे के खिलाफ़ थे. उनके पुरखों ने अशोक चक्र का विरोध किया, संघ परिवार के लोग पहले दिन से भारत के संविधान के बजाय मनुस्मृति को लागू करना चाहते थे."
उन्होंने कहा कि आंबेडकर मनुस्मृति के ख़िलाफ़ थे, इसलिए उनके प्रति इतनी घृणा है.
उन्होंने चेतावनी वाले अंदाज़ में कहा, "मोदी सरकार के मंत्रीगण ये कान खोलकर समझ लें कि मेरे जैसे करोड़ों लोगों के लिए बाबा साहेब डॉ आंबेडकर जी भगवान से कम नहीं हैं. वे दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और ग़रीबों के मसीहा हैं और हमेशा रहेंगे."
'पूरा भाषण सुनिए...'
कई कांग्रेस नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट के बाद बीजेपी ने आंबेडकर के अपमान के आरोपों को ख़ारिज करते हुए एक कहा कांग्रेस ने अमित शाह के भाषण का जो वीडियो पोस्ट किया है, वो अधूरा है.
अमित शाह के भाषण लंबा अंश पोस्ट करते हुए पार्टी ने लिखा, ''अमित शाह जी ने कांग्रेस को आईना दिखाया है. नेहरू जी ने आबेंडकर जी के बारे में क्या कहा था."
पार्टी के अन्य नेताओं ने भी कहा कि कांग्रेस जिस हिस्से पर आपत्ति जता रही है, वो अधूरा है और लोगों को पूरा वीडियो सुनना चाहिए.
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी अमित शाह के भाषण का वीडियो शेयर करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला.
अमित मालवीय ने कहा, "कांग्रेस की विश्वसनीयता शून्य हो गई है. इसलिए अब भ्रम फैलाने की राजनीति का सहारा लेना पड़ रहा है. गृह मंत्री अमित शाह जी का पूरा बयान कांग्रेस की बाबा साहेब आंबेडकर और दलित समाज के प्रति नफ़रत को उजागर करता है. पूरा भाषण सुनिए."
अमित शाह का बयान 'अक्षम्य'
संविधान को स्वीकार करने के 75 वर्ष पूरे होने पर लोकसभा में संविधान पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लंबा भाषण दिया था.
अपने पूरे भाषण में नरेंद्र मोदी ने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी से लेकर कांग्रेस के लंबे शासन पर निशाना साधा था.
क़रीब एक घंटा 50 मिनट लंबे भाषण में पीएम मोदी ने कांग्रेस का नाम लिए बिना एक ख़ानदान के 55 साल लंबे शासन पर तीखा हमला किया था.
उससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सावरकर का नाम लेते हुए संविधान के प्रति उनकी धारणा पर सवाल उठाए थे जबकि पहली बार संसद पहुंचीं उनकी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार को घेरा था.
प्रियंका गांधी ने कहा था, "प्रधानमंत्री जी ने एक नई चीज़ नहीं बोली और बोर कर दिया पूरी तरह से. मुझे दशकों बाद अहसास हुआ कि जो स्कूल में मैथ का डबल पीरियड होता है, उसमें बैठी हुई हूं. मैंने सोचा था कि पीएम कुछ नया बोलेंगे, अच्छा बोलेंगे. लेकिन उनके खोखले 11 संकल्प बताए. भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टॉलरेंस की बात की तो फिर अदानी पर चर्चा करिए..."
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव कहा था, "बहुत लंबा भाषण था. पत्रकारों से बेहतर कौन जानता होगा कि जुमले से किसको जाना जाता था. आज हमको 11 जुमलों का संकल्प सुनने को मिला."
उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने भी अमित शाह के बयान को आंबेडकर के संघर्ष का अपमान बताया है.
उन्होंने एक्स पर लिखा, "गृह मंत्री अमित शाह का बयान परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के ऐतिहासिक योगदान और सामाजिक न्याय के लिए उनके संघर्ष का अपमान है. परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी नाम लेना कोई "फ़ैशन" नहीं, बल्कि समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक परिवर्तन की उस क्रांति का प्रतीक है, जिसने करोड़ों दबे-कुचले लोगों को न्याय और अधिकार दिलाए."
चंद्रशेखर ने कहा कि यह न केवल असंवेदनशीलता, बल्कि सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अनादर का परिचायक है.
अमित शाह के बयान को अक्षम्य बताते हुए कहा कि आंबेडकर को मानने वाले इस अपमान का बदला जरूर लेंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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