'आईएस के मुकाबले में तालिबान ज़्यादा बड़ा ख़तरा'

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- Author, सईद अनवर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, काबुल
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में शनिवार को हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 80 लोगों की मौत हुई है.
ये धमाके उस जगह पर हुए हैं जहां हज़ारा समुदाय के हज़ारों लोग प्रदर्शन कर रहे थे. इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है.
आईएस की मौजूदा स्थिति और अफ़ग़ान सरकार की कार्रवाई पर नज़र डालें तो अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय हुए उसे एक साल हो चुका है.
वो अफ़ग़ानिस्तान के प्रांत नंगरहार के तीन-चार ज़िलों में सक्रिय हैं.
तीन महीने से अफ़ग़ानिस्तान की सरकार ने नंगरहार में सुन्नी चरमपंथी संगठन आईएस के ख़िलाफ़ तोबड़तोड़ हमले शुरू किए हैं.
आए दिन सेना दस-पंद्रह आईएस चरमपंथियों को मार रही है और आईएस ने भी सरकार के ख़िलाफ़ जंग की घोषणा की हुई है.
ताज़ा हमला इस्लामिक स्टेट ने इसलिए किया है क्योंकि वह शिया समुदाय के ख़िलाफ़ है. इसीलिए शिया समुदाय की भीड़ को निशाना बनाया गया है.

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तालिबान ने इस हमले की निंदा की है लेकिन अब भी अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के लिए तालिबान से निपटना ही बड़ी चुनौती है.
तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में 20 से ज्यादा सूबों में सक्रिय है और आईएस अभी एक या दो सूबों में ही है.
अफ़ग़ान सरकार का मानना है कि आईएस उतना बड़ा ख़तरा नहीं है. वो मानते हैं कि आईएस को ख़त्म किया जा सकता है, इसीलिए उसके ख़िलाफ़ इतना बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया है.
लेकिन आईएस ने एक-दो सूबों में रहते हुए भी सरकार के ख़िलाफ़ जंग छेड़ रखी है. वो आम लोगों को भी निशाना बनाते हैं और ज़ाहिर तौर पर सरकार और आम लोगों के लिए एक बड़ा ख़तरा हैं.

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आम लोग सुरक्षा बलों के साथ मिलकर आईएस का मुकाबला कर रहे हैं.
इस तरह के हमलों से लोगों के मनोबल पर असर पड़ा है लेकिन उतनी मायूसी नहीं है जितनी तालिबान को लेकर है.
तालिबान के बारे में तो कहा जा रहा था कि इस साल गर्मियों में तालिबान पांच-छह सूबों पर कब्जा कर सकता है और हालात ख़ासे ख़राब हो सकते हैं.
हालाँकि तालिबान किसी भी सूबे पर कब्जा नहीं कर पाया है और हालात उतने ख़राब नहीं हुए हैं.
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