बांग्लादेश में चरमपंथ के ख़िलाफ़ 'सरकारी ख़ुतबा'

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बांग्लादेश में धार्मिक मामलों से जुड़ी एक सरकारी संस्था ने इस्लाम के नाम चरमपंथ को बढ़ावा देने के ख़िलाफ एक ख़ुतबा तैयार किया है.
इस्लामिक फाउंडेशन ने देश की सभी मस्जिदों से इसे जुमे की नमाज़ के दौरान पढ़ने को कहा.
फाउंडेशन ने उम्मीद जताई कि सभी इमाम इसका उपयोग करेंगे या इससे प्रेरणा लेंगे.

ये अभी साफ़ नहीं है कि कितनी मस्जिदों ने इस ख़ुतबे का उपयोग किया. बांग्लादेश में हाल के दिनों में कई बड़े चरमपंथी हमले हुए हैं.
इस ख़ुतबे में पैगंबर मोहम्मद की कही बातें भी शामिल हैं.
इसके मुताबिक़, "किसी इंसान को मारना सबसे बड़ा गुनाह है, हर मां-बाप को चाहिए वह अपने बच्चों ख्याल रखें ताकि कोई उनको बरगलाए ना.'

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फाउंडेशन के प्रमुख शमीम मोहम्मद अफज़ल के अनुसार वह देश में चरमपंथ के प्रभाव को रोकना चाहते हैं. इसीलिए उन्होंने इसे देश की लगभग तीन लाख मस्जिदों तक इस लिखित संदेश को भेजा है.

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अफज़ल के मुताबिक, "इस संदेश को मानना या नहीं मानना इमामों की इच्छा पर है. यह निर्देश नहीं संदेश है. पर हमें उम्मीद है कि लोग इससे प्रेरणा लेंगे. हमारा साफ संदेश है कि इस्लाम में चरमपंथ के लिए कोई जगह नहीं है."
कई इस्लामिक पार्टियां इस खुतबे की आलोचना कर रही हैं.
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