जब डूब जाएं सारे पैसे तब क्या करें?

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लोग अपने कमाए पैसों में से बचाते भी हैं. कुछ रिटायरमेंट के लिए, तो कुछ बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और शादी के लिए.
मगर ज़िंदगी में कई ऐसे मौक़े आते हैं जब अचानक कोई ख़र्च आ जाता है. इससे हमारी सारी प्लानिंग धरी की धरी रह जाती है.
अमरीका के पेन्सिल्वेनिया के रहने वाले जॉन डुलिन के परिवार के सामने ऐसी ही दिक़्क़त आ खड़ी हुई. उन्होंने रिटायरमेंट के लिए काफ़ी पैसा जुटा लिया था. इमरजेंसी फ़ंड के लिए भी पैसे जोड़ रखे थे.
अचानक उन्हें अपने घर में हर जगह सीलन दिखने लगी. घर की लकड़ियां सड़ने लगीं. मकान की मरम्मत कराना ज़रूरी हो गया. इसका ख़र्च बैठता क़रीब 50 हज़ार डॉलर.
डुलिन बताते हैं कि उनकी बचत की सारी प्लानिंग धरी की धरी रह गई. ये इतनी बड़ी रक़म थी कि उन्हें इमरजेंसी फ़ंड से पैसे निकालने पड़े. इसके चलते उनकी रिटायरमेंट सेविंग्स पर भी असर पड़ा क्योंकि उन्हें अपने इमरजेंसी फ़ंड में फिर से पैसे डालने पड़े. कुल मिलाकर डुलिन का बरसों का बचत प्लान अचानक पटरी से उतर गया.

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हमारी ज़िंदगी में कई ऐसे मौक़े आते हैं जब हम ज़िंदगी भर की बचत गँवा देते हैं. कभी बीमारी, तो कभी अचानक आया डुलिन परिवार जैसा ख़र्च. इसके अलावा शेयर बाज़ार की उठापटक भी कई बार हमारी बचत को साफ़ कर देती है.
साल 2008 में अमरीका में आई मंदी से लोगों को तगड़ा झटका लगा था. शेयर बाज़ार की गिरावट से औसत अमरीकी कामगार की बचत में 24 फ़ीसद की गिरावट देखी गई. अमरीकी मां-बाप ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए जो पैसे जोड़े थे, उसमें उन्हें 30 फ़ीसद का नुक़सान झेलना पड़ा था.
इसी तरह आर्थिक संकट से ब्रिटेन में लोगों की दौलत में 815 अरब पाउंड की गिरावट देखी गई. यानी इस आर्थिक संकट से हर ब्रिटिश परिवार को 31 हज़ार पाउंड का झटका लगा था. उनके पेंशन फ़ंड और घरों की क़ीमतों में गिरावट देखी गई थी.
जानकार कहते हैं जब आपकी बचत अचानक साफ़ हो जाए, तो आप जो अगला क़दम उठाते हैं वह बहुत अहम होता है. आपके पैसे कम हो जाते हैं. जिससे किसी ख़र्च से निपटने में आपको दिक़्क़त पेश आती है.

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इसीलिए ज़रूरी है कि आप ऐसा नुक़सान झेलने के बाद सही फ़ैसला लें. जानकार इस बारे में कुछ मशविरे देते हैं.
पहली ज़रूरत है कि आप सब्र और दूरंदेशी से काम लें. पैसे के नुक़सान से तनाव बढ़ता है. ऐसे में आपको कुछ सख़्त फ़ैसलों की ज़रूरत होती है. ताकि आपकी बचत का सिलसिला जारी रहे. और आप आने वाले वक़्त के लिए ख़ुद को तैयार कर सकें.
ज़्यादातर झटके अचानक लगते हैं. मगर इनसे निपटने के लिए आप कुछ क़दम उठा सकते हैं. जानकार कहते हैं कि आपके पास तीन से छह महीने के ख़र्च के पैसे हमेशा होने चाहिए. इससे आपको आगे की प्लानिंग में बड़ी राहत मिलती है.
अगर आपको शेयर बाज़ार से झटका लगा है. तो वहां से तुरत-फुरत पैसे निकालने का फ़ैसला सही नहीं होगा. आप ठहरकर, थोड़ा सोच-विचारकर फ़ैसला लें क्योंकि गिरावट के बाद कई बार बाज़ार उठता भी है.
कोई भी क़दम उठाने से पहले आप अपने सलाहकार से बात करें. ऐसे मामलों में किसी तीसरे आदमी की राय काफ़ी अहम होती है. वो फ़ौरी नफ़े-नुक़सान के बजाय दूर की सोचकर आपको राय देता है.

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कई बार आप हड़बड़ी में अपने ही कुछ संसाधनों के बारे में सोच नहीं पाते. ऐसे में फ़ाइनेंशिनल एडवाइज़र आपकी सही मदद कर सकता है.
तुरंत के इन फ़ैसलों के बाद आपको शेयर बाज़ार में अपने निवेश के तरीक़ों में बदलाव करना चाहिए. यह कुछ वक़्त के बाद भी किया जा सकता है. जैसे शेयर बाज़ार के ज़्यादा जोखिम वाले माहौल से पैसे निकालकर आप कम जोखिम वाले में निवेश कर सकते हैं. जैसे डेट फ़ंड या पेंशन फ़ंड या फिर सरकारी बॉन्ड्स में निवेश किया जा सकता है. इन पर बाज़ार की गिरावट का असर कम पड़ता है.
फ़ाइनेंशियल प्लानर शैनन सिमंस कहती हैं कि अक्सर लोग ग़लती ये करते हैं कि बाज़ार की गिरावट से परेशान होकर मैदान छोड़ देते हैं पर ऐसा कभी नहीं करना चाहिए.
आपको अच्छे निवेश के रास्ते तलाशकर उसमें पैसे लगाने की कोशिश जारी रखनी चाहिए. वरना, आपको अपने पैसों पर अच्छा रिटर्न नहीं मिलेगा. आगे चलकर आपको पैसे की किल्लत भी झेलनी पड़ सकती है.

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सिमंस यह भी कहती हैं कि आप ऐसा प्लान बनाएं, जिस पर आसानी से अमल कर सकें. बड़े-बड़े लक्ष्य तय करके ख़ुद पर दबाव बनाना भी ठीक नहीं.
आख़िर में सबसे ज़रूरी बात. कभी उम्मीद मत छोड़िए. कोशिश करते रहिए.
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