'इससे अच्छा तो बोको हराम के चंगुल में रहती'

17 साल की ज़ारा की कहानी बहुत त्रासदीपूर्ण है. दरअसल यह कहानी है उस क्रूरता की जो चरमपंथी गुट बोको हराम उत्तर-पश्चिम नाइजीरिया और पड़ोस में बसे देशों के हज़ारों लोगों के साथ कर रहा है.
ज़ारा का बोको हराम ने अपहरण कर लिया था. सेना ने उन्हें छुड़ाया था. लेकिन अब कभी-कभी उन्हें लगता है कि वो जंगल में ही रहतीं तो बेहतर होता, कम से कम 'बोको हराम की बीवी' होने का कलंक तो नहीं ढोना पड़ता.
वो बताती हैं, "उन्होंने हमें एक विकल्प दिया- या तो शादी कर लो या ग़ुलाम बन जाओ. मैंने शादी करने का फ़ैसला किया."

फिर वो गर्भवती हो गईं. ज़िंदगी मुशकिल और ख़तरनाक थी.
चरमपंथियों ने सांबिसा जंगल में अपने शिविर बना रखे थे. वायुसेना ने वहां बमबारी की और अंततः सैनिकों ने उन्हें छुड़ाकर उनके रिश्तेदारों के पास पहुंचा दिया.
ज़ारा के चाचा मोहम्मद उमारु ने हमें उनकी बाक़ी की कहानी सुनाई. वो बताते हैं, "परिवार की महिलाओं को अहसास हुआ कि वह तीन महीने की गर्भवती है."
"हमारे परिवार में कुछ ईसाई हैं और कुछ मुसलमान. अपहरण के पहले वह ईसाई थी लेकिन बोको हराम ने शादी करके उसे मुसलमान बना दिया."
परिवार में इस बात को लेकर मतभेद था कि बच्चे का क्या किया जाए. ज़ारा को गर्भपात करवाना चाहिए या बच्चे को जन्म देना चाहिए.
इस पर मतदान हुआ और बहुमत बच्चे को जन्म देने के पक्ष में रहा.
मोहम्मद बताते हैं, "उसने बताया कि उसके पति के पिता का नाम उस्मान था और इसीलिए उसने बच्चे का नाम भी यही रखा."
बस यहीं से ज़ारा के अपमान का सिलसिला शुरू हुआ.

ज़ारा बताती हैं, "लोग मुझे बोको हराम की बीवी कहते हैं और अपराधी बताते हैं. वह मेरे नज़दीक नहीं आना चाहते. वह मुझे पसंद नहीं करते." यह कहते हुए एक आंसू उनके गालों पर लुढ़क जाता है.
अब ज़ारा अपने घर की छोटी सी चहारदीवारी के अंदर बने दालान में बैठी रहती हैं. उन्हें बाहर जाने में डर लगता है क्योंकि अपने माता-पिता से नफ़रत सीखकर पड़ोस के बच्चे उनका अपमान करते हैं.
वो कहती हैं, "उन्हें मेरा बच्चा पसंद नहीं था. जब वह बीमार पड़ा तो कोई भी उसकी देखरेख नहीं करता था."
पिछले हफ़्ते गर्मी की वजह से ज़ारा घर के बाहर दालान में सोई थीं. वहां घुस आए एक सांप ने उस्मान को काट लिया और उसकी मौत हो गई. वह सिर्फ़ नौ महीने का था.
आधे परिवार ने इसे भगवान की मर्ज़ी मानकर जश्न मनाया.
ज़ारा कहती हैं, "कुछ लोग ख़ुश थे कि वह मर गया. वह ख़ुश थे कि बोको हराम का ख़ून परिवार से चला गया."

इमेज स्रोत, AFP
मोहम्मद बताते हैं, "उन्होंने कहा, शुक्र है वह बच्चा मर गया, ख़ुदा ने उनकी दुआ कुबूल कर ली."
वो बताते हैं, "कभी-कभी वह स्कूल जाना चाहती है और डॉक्टर बनकर समाज की मदद करना चाहती है. लेकिन कई बार, जब लोग उसका अपमान करते हैं वह वापस सांबिसा जंगल में चले जाना चाहती है."
"वह हमेशा अपने पति के बारे में बात करती है, जो बोको हराम का एक कमांडर हुआ करता था. वह कहती है कि वह उसके साथ अच्छा बर्ताव करता था और उसके साथ एक नई ज़िंदगी शुरू करना चाहता था."
डबडबाती आंखों से ज़मीन की ओर देखते हुए ज़ारा अपनी कहानी सुनाती हैं तो इस बात की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है कि यह लड़की कितना कुछ झेल चुकी है, वह भी सिर्फ़ 17 साल की उम्र में.
मोहम्मद कहते हैं कि ज़ारा की ज़िंदगी इस क़दर कठिन हो चुकी है कि एक बार तो उसने यह तक कह दिया था कि वह 'आत्मघाती मिशन पर जाना चाहती है'.
वो कहते हैं, "अगर उसे मौक़ा मिला तो वह ज़रूर, ज़रूर, ज़रूर ऐसा करेगी".

इमेज स्रोत,
ज़ारा कहती हैं, "जंगल के प्रति भावनाएं अभी प्रबल हैं, लेकिन यह चली जाएंगी. मैं बोको हराम के साथ बिताया समय भूल जाऊंगी, लेकिन अभी नहीं".
ज़ारा कहती हैं कि वो अपने पति को चाहती हैं हालांकि वह यह भी मानती हैं कि उनके दिमाग में ये भर दिया गया है. उन्हें ऐसा महसूस होता है कि उनके परिवार ने उन्हें छोड़ दिया और समाज ने कलंकित कर दिया है.
ज़ारा दुखी हैं, वह ग़ुस्सा हैं, वह भ्रम में हैं.
उनके चाचा कहते हैं, "लोगों को यह समझना चाहिए कि यह सब इन बच्चों ने नहीं किया है लेकिन अगर हम इन्हें कलंकित करते रहेंगे और इतनी पीड़ा देते रहेंगे तो हो सकता है कि भविष्य में हम बोको हराम से भी बड़ा और बुरा कुछ तैयार कर देंगे."
"मेरी प्रार्थना है कि सरकार कुछ करे. उसे इनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए, इन्हें साथ लेकर चलना चाहिए और प्यार देना चाहिए."

इमेज स्रोत, AFP
ज़ारा की तरह बहुत सी लड़कियों का अपहरण किया गया था, बहुत सारी अब भी क़ैद में हैं.
जो कैद में हैं और छूटने की उम्मीद कर रही हैं वह तकलीफ़ में हैं और जो बच गई हैं, उनके हिस्से में भी दर्द है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> आप यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












