जब कोई आपको 'स्वीटी' कहकर पुकारे...

इमेज स्रोत, Alamy
"क्या हुआ बेटा पप्पू?" ''गुड़िया ज़रा इधर आना." ''तुमको समझ में आ गया न बच्चे.'' हम अक्सर ऐसे जुमले घरों में सुनते हैं, जिसमें लोग दूसरों को कभी प्यार से, कभी मज़ाक़ में, तो कभी तंज़ में इस तरह से पुकारते हैं. ख़ास तौर से बचपन में.
घर में तो ये सब चलता है. मगर, दिक़्क़त तब होती है जब आपको दफ़्तर में ऐसे उपनामों से नवाज़ा जाने लगता है.
कई बॉस अक्सर, अपनी जूनियर महिला कर्मचारियों को स्वीटहार्ट या स्वीटी कहकर बुलाने लगते हैं. अपने से मातहतों को बच्चे, या, कई बार अपमानित करने के लिए पप्पू बुलाते हैं. ये बड़ी मुसीबत की बात होती है.
इससे दफ़्तर में आपकी इमेज को नुक़सान पहुंचता है. आप ख़ास तरह की छवि के शिकार बन जाते हैं. इस बारे में जब सवाल-जवाब वाली वेबसाइट क्वोरा पर पड़ताल की गई तो बड़ी दिलचस्प बातें पता चलीं.

इमेज स्रोत, Thinkstock
सुरेटा विलियम्स नाम की एक लेखिका ने कहा कि वो ज़्यादातर लोगों को स्वीटी कहकर बुलाती हैं. मगर, उनके बोलने के लहजे से लोगों को पता चल जाता है कि कब वो प्यार जता रही हैं, कब उन्होंने व्यंग में स्वीटी कहा और कब किसी को नीचा दिखाने के लिए.
विलियम्स ने लिखा कि जैसे वो दूसरों के साथ बर्ताव करती हैं, वैसे ही दूसरों के नाम रखने को भी उन्होंने इसी तरह लिया है.
वो कहती हैं कि अपने से बड़ों के बोलने के लहजे से ही पता चल जाता है कि वो किसी ख़ास नाम से मान रखने के लिए या मज़ाक़ बनाने के लिए पुकार रहे हैं. लेकिन, अगर उन्हें दफ़्तर के बाहर कोई बेतकल्लुफ़ होकर स्वीटहार्ट कहेगा तो वो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगी.
स्टीव तामुलविज़ नाम के एक प्रोफ़ेशनल लिखते हैं कि आपके साथ दफ़्तर में कैसा बर्ताव होता है, ये आप पर निर्भर करता है. अगर आप ऐसे नाम रखने के चलन को बर्दाश्त करेंगे तो ऐसा करने वालों का मन बढ़ जाएगा.
अगर आपको ऐसे निकनेम रखा जाना बुरा लगता है तो फ़ौरन अपना एतराज़ दर्ज कराएं. हां, अपने सीनियर्स के ओहदे और ताक़त का ख़्याल करते हुए, वरना आपको इस ऐतराज़ की भारी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है.

इमेज स्रोत, THINKSTOCK
आप इस तरह के बर्ताव की शिकायत, एचआर टीम से कर सकते हैं. इसके लिए बेहतर होगा कि आप ऐसी बातों का हिसाब रखें.
वहीं, टोबिया बर्न्स लिखते हैं कि दफ़्तर में सीनियर अक्सर अपने मातहतों को उपनामों से बुलाते हैं. हर बार ऐसा करने का इरादा अपमान करना ही हो, ये ज़रूरी नहीं. हां, अगर ये मज़ाक़ उड़ाने की नीयत से हो, तो इसका पुरज़ोर विरोध किया जाना चाहिए.
मगर, पहले आप ये समझ लीजिए कि ये नाम रखने वाले सीनियर अगर अक्सर आपके काम की तारीफ़ करते हैं तो थोड़ा मज़ाक़ बनाने का हक़ भी है उनको. कई बार सीनियर, ऐसा अपने जूनियर से बेतकल्लुफ़ होने के लिए भी करते हैं. तो इन सब में फ़र्क़ करने की समझ आपको होनी चाहिए.

इमेज स्रोत, Thinkstock
मिशेल रोज़ेज़ ने लिखा कि आप किसी को कुछ भी कह सकते हैं, बशर्ते उन्हें वो ठीक लगता है. अगर किसी को पप्पू या स्वीटहार्ट कहलाने में ऐतराज़ नहीं तो फिर कहने में भी हर्ज नहीं. लेकिन, किसी का अपमान करने की नीयत से कुछ भी कहना ग़लत है.
एगन योहानसन ने लिखा कि दफ़्तर में अक्सर अपना बड़प्पन जताने के लिए लोग, मातहतों के उपनाम रख देते हैं. ये दिक़्क़त की बात हो सकती है.
अगर, ये काम आपके बॉस कर रहे हों. क्योंकि उनका विरोध करने का मतलब, अपने लिए राह मुश्किल करना.
लड़कियों को ये दिक़्क़त ज़्यादा झेलनी पड़ती है. अगर उन्हें बुरा लगता है तो योहासनसन सलाह देती हैं कि उस सीनियर को प्यार से समझाइए कि आपका नाम वो नहीं जो वो ले रहा या रही है.
वहीं, कलाकार क्रिस्टी फॉन ने लिखा कि, जैसे ही आपको कोई भद्दा सा उपनाम दे, आप अपना मज़ाक़ ख़ुद ही बनाते हुए ये कहिए कि आपको इस नाम से दिक़्क़त है. इससे लोगों को ख़ुद ब ख़ुद पता चल जाएगा.

इमेज स्रोत, Thinkstock
क्रिस्टी ये सलाह भी देती हैं कि आप को इस बारे में थोड़ा सब्र से काम लेना चाहिए. कई बार साथी या सीनियर, आपके ऐतराज़ को भूल भी सकते हैं. कुछ दिनों में फिर अपने तरीक़े से उन्हें याद दिला दीजिए कि ऐसे पुकारा जाना आपको पसंद नहीं.
(अंग्रेज़ी में मूल लेख <link type="page"><caption> यहाँ पढ़ें</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20160304-what-to-do-when-nicknames-go-too-far-at-work" platform="highweb"/></link>, जोबीबीसी <link type="page"><caption> कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












