पूर्व ग्वांतानामो क़ैदी ने कहा, 'देश छोड़ें चरमपंथी'

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ग्वांतानामो बे की जेल में ब्रिटेन के आख़िरी क़ैदी रहे शकर आमिर ने चरमपंथियों की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें 'देश छोड़ कर चले जाने को कहा है'.

आमिर क्यूबा की ग्वांतानामो बे जेल में 14 साल काटने के बाद इसी साल अक्टूबर में लंदन लौटे हैं.

उन्होंने ब्रितानी अख़बार 'मेल' से बातचीत में चरमपंथी हमलों की निंदा करते हुए कहा, "आप यूं ही किसी को नहीं मार सकते हैं."

उन्होंने कहा, "आप इस देश में रहने के हक़दार कैसे हैं जब आप यहाँ सामान्य जीवन जीते हुए सड़क पर जाकर लोगों की जान लेने की कोशिश करते हैं? यदि आप इस देश से इतने ख़फ़ा हैं तो देश से चले जाएँ. यदि कुछ भी करने से पहले आप किसी को आतंकवादी की तरह देखते हैं तो आप उसको हिंसा की ओर धकेल देंगे. ये उनकी (चरमपंथियों की) ही मदद करेगा."

उनका कहना था कि इस्लाम के बारे में उनकी जानकारी तो ये है कि आम नागरिकों को मारने की अनुमति नहीं है.

आमिर ने ये भी बताया कि ब्रिटेन में वापस अपने परिवार के पास आना उनके लिए बेहद भावुक रहा.

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपनी पत्नी को देखा तो उनकी बरसों की पीड़ा 'धुल गई'.

आमिर की ये तस्वीर ग्वांतानामो बे में क़ैदी बनाए जाने से पहले की है

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इमेज कैप्शन, आमिर की ये तस्वीर ग्वांतानामो बे में क़ैदी बनाए जाने से पहले की है

आमिर चार बच्चों के पिता हैं और अपने सबसे छोटे बेटे से वो वापस ब्रिटेन आने के बाद पहली बार मिले.

48 वर्षीय आमिर को तालिबानी इकाई चलाने और अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन से मुलाक़ात करने के आरोपों में ग्वांतानामो बे की जेल में रखा गया था.

लेकिन इस बारे में उन पर कभी आरोप तय नहीं किए गए.

'मेल' को दिए इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि ग्वांतानामो बे की अमरीकी जेल में उनसे पूछताछ के दौरान बार बार लंदन में जिहादी गुटों में लोगों की कथित भर्ती में उनकी भूमिका के बारे में पूछा गया.

उन्होंने इससे हमेशा इनकार किया.

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उन्होंने कहा कि 14 साल के दौरान उनसे 200 लोगों ने पूछताछ की थी.

आमिर का दावा है कि इस दौरान उनका उत्पीड़न भी किया और उन पर सोने से वंचित रखने और शून्य डिग्री से नीचे तापमान में फर्श से बांध देने जैसे तरीके भी आज़माए गए.

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