वहां महिलाओं को अपने ही मार डालते हैं..

- Author, कैंडिस पीट
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, ग्वाटेमाला सिटी
पूरी दुनिया में हर साल 66,000 महिलाएं मारी जाती हैं. उनके ख़िलाफ़ सर्वाधिक हिंसा वाले देशों में है ग्वाटेमाला. पर ऐसा क्यों?
ग्वाटेमाला सिटी की रहने वाली महिला रैपर रेबेका लेन कहती हैं, ''हम अपने ही पिता, भाइयों, सौतेले पिताओं के हाथों मारे जा रहे हैं..ये वही हैं जिन्हें माना जाता है कि वो हमारी रक्षा करेंगे.''
वो बताती हैं, ''हममें से अधिकांश चुपचाप हिंसा सहती हैं और जब कोई हमें मारता है या हम पर चिल्लाता है तो हम अपनी आंखें बंद कर लेती हैं. उसे यूं ही जाने देती हैं. हमें दूसरी महिलाओं से मिलना होगा और बताना होगा कि ये ठीक नहीं है.”
जब लेन 15 साल की थीं तभी उनका संबंध एक बड़ी उम्र के आदमी से हुआ, जो न केवल उन पर हुक्म चलाता था था बल्कि शारीरिक और यौन हिंसा करता था.

वे बताती हैं, ''वह जानता था कि वह क्या कर रहा है. उसने मुझे मेरे परिवार और दोस्तों से बिल्कुल काट दिया था. मैं जानती हूँ कि कम उम्र में हिंसा के साथ जीना कैसा होता है.''
उनका संबंध तीन साल चला. अब वह अपने संगीत को महिला अधिकारों के अभियान चलाने में इस्तेमाल कर रही हैं.
उनका सबसे बेहतरीन गीत है 'मुजेर लूनार' यानी 'चांद की महिलाएं'. इसमें महिलाओं के शरीर, ज़िंदगी और उनकी आज़ादी का सम्मान करने का आह्वान है.
महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने और हिंसा से निपटने के गुर सिखाने के लिए ग्वाटेमाला सिटी में नौजवान माँओं के लिए रेबेका एक हिप-हॉप वर्कशाप चलाती हैं.
पूरी दुनिया में महिला हत्या दर के मामले में ग्वाटेमाला तीसरे स्थान पर है (पहले और दूसरे स्थान पर अल सल्वाडोर और जमैका हैं.).
नेशनल ग्वाटेमालन पुलिस के मुताबिक़, साल 2007 से 2012 के बीच प्रति लाख महिलाओं पर 9.1 हत्याएं दर्ज हुईं.

सरकारी अभियोजन कार्यालय के अनुसार, पिछले साल डेढ़ करोड़ की आबादी वाले इस देश में 846 महिलाओं की हत्याएं हुई.
ऐसा लगता है कि इसका कारण देश के बर्बर अतीत में छिपा है.
लेन के महिला अधिकारों के लिए काम करने के पीछे मुख्य प्रेरणा थीं उनकी बुआ, जिनके नाम पर उनका नाम रखा गया था.
वे कभी अपने पिता की इस बहन से नहीं मिलीं, पर उनकी कहानी ने उन्हें मौजूदा समाज और 36 साल के गृहयुद्ध के बीच लकीर खींचने को प्रेरित किया.
लेन की बुआ सैन्य सरकार से लड़ने वाले एक वामपंथी गुरिल्ला दस्ते में थीं और 1981 में ग़ायब हो गई थीं.
जब लेन की बुआ की मौत हुई तब हज़ारों महिलाओं और लड़कियों से बलात्कार, यंत्रणा और हत्याओं की ख़बरें छन-छनकर बाहर आने लगीं थी. ये महिलाएं मायन समुदाय से थीं, जिस पर गुरिल्लाओं के समर्थन का आरोप था.

एक दशक से ज़्यादा समय बाद संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया कि ये अपराध आम और योजनाबद्ध थे. इसमें अनुमान लगाया गया कि ग्वाटेमाला के युद्ध के 50,000 पीड़ितों में एक चौथाई महिलाएं थीं.
मर्ना मैक फ़ाउंडेशन की हेलेन मैक के मुताबिक़, ''यौन हिंसा का स्तर बहुत अधिक था और इसे हथियार के बतौर इस्तेमाल किया जाता था.''
''इसके पीछे भरण-पोषण के लिए महिलाओं को सेक्स के लिए इस्तेमाल करने और उन्हें वस्तु के रूप में देखने की रूढ़ि थी जो आज भी जारी है.''
फ़ाउंडेशन का नाम मैक की बहन मर्ना के नाम पर रखा गया है. 1990 में मिलिटरी डेथ स्क्वाड ने मर्ना को एक सड़क पर चाकुओं से गोदकर मार डाला था.
इस घटना ने मायन समुदाय के ख़िलाफ़ बर्बर शारीरिक और यौन हिंसा को उजागर कर दिया.
गृहयुद्ध के दौरान 40,000 लोगों की सेना और क़रीब दस लाख नागरिक सुरक्षा बल के जवानों को महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की ट्रेनिंग दी गई थी.

युद्ध ख़त्म होने के बाद इनका पुनर्वास नहीं हुआ.
मैक का मानना है कि इस हताशा को उन्होंने अपनी पत्नियों, माओं और महिला मित्रों की ओर मोड़ दिया.
बिना सज़ा के डर के, महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की एक संस्कृति आज भी यहां मौजूद है.
मैक कहती हैं, ''इस हफ़्ते हमें एक महिला का फ़ोन आया. उनके पति ने उस पर अपनी कार कई बार चढ़ाई, ये तय करने के लिए वह मरी या नहीं.''
''किसी तरह वो बच गईं और ग्वाटेमाला सिटी में उनका इलाज चल रहा है. मगर उनका पति उसे ऐसे नहीं जाने देगा. उसने अपने पिता को भेजकर धमकी दी, इसलिए उसने इस घटना की रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई.''

मैक का अनुभव बताता है कि ऐसे मामलों में हमलावर हत्या कर देता है.
वे बताती हैं कि नए क़ानून के बावजूद महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा अभी भी घरेलू मामला माना जाता है.
2008 में ग्वाटेमाला पहला ऐसा देश बना, जिसने महिलाओं की हत्या को लैंगिक अपराध माना.
देश की अटॉर्नी जनरल थेलमा एल्डाना बताती हैं, ''ग्वाटेमाला में एक औरत और आदमी की हत्या में अंतर ये है कि महिला मौत के पहले बहुत दर्द झेलती है, उसका बलात्कार किया जाता है, पीटा जाता है और उसके शरीर से बहुत बुरा बर्ताव किया जाता है.''
2011 में जब एल्डाना सुप्रीम कोर्ट की अध्यक्ष थीं, उन्होंने महिला हत्याओं से निपटने के लिए पूरे देश में विशेष अदालतों का नेटवर्क बनाने में मदद की.
वे बताती हैं, ''हर साल देश में महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के 56,000 मामले दर्ज होते हैं. इसमें बलात्कार, यौन हिंसा, शारीरिक और आर्थिक हिंसा और हत्याएं शामिल हैं.''

इमेज स्रोत, BBC World Service
इस समय देश के 22 प्रांतों में 11 में ट्रिब्यूनल हैं, जहां जज और पुलिस अफ़सर लैंगिक अपराध को लेकर जागरूकता के बारे में ट्रेनिंग लेते हैं.
इस साल महिलाओं की हत्या वाले 3,366 मामलों की सफल सुनवाई हुई.
हालांकि पिछले महीने ही शहर में एक सप्ताह के भीतर महिलाओं के पांच शव मिले, पर हेलने मैक के मुताबिक़ ऐसे मामलों में कमी आई है.
वह कहती हैं, ''पिछले 10 साल में हम काफ़ी आगे गए हैं. कम से कम अब महिलाएं इस पर बात तो कर रही हैं.''
उनका इशारा महिला जजों और कार्यकर्ताओं की बढ़ती संख्या की ओर था.
वे कहती हैं, ''मेरी बहन के मामले में मुक़दमा आगे बढ़ा क्योंकि जिन जजों ने साहस दिखाया, वो महिलाएं थीं. ग्वाटेमाला ने दिखाया कि महिलाएं देश की समस्या को हल करने में पुरुषों के मुक़ाबले ज़्यादा साहसी और प्रतिबद्ध हैं.''
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