खूबसूरत पर दिल दहला देने वाली सर्दी

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- Author, एंटोनिया क्विर्क
- पदनाम, बीबीसी
ग्रीनलैंड में साल के सबसे छोटे दिन तीन घंटे से कुछ ज़्यादा ही रोशनी रहती है. हालांकि यहां सर्दियां, लंबी, ठंडी और अंधियारी होती हैं- लेकिन एंटोनिया क्विर्के के अनुसार यह ख़ूबसूरत भी हो सकती हैं.
पश्चिमी ग्रीनलैंड के तटीय कस्बे इलुलिस्सात में सर्दी दस्तक दे रही है. जल्द ही डिस्को खाड़ी जम जाएगी और आदमी अपनी भारी, थकी हुई स्लेजों को लेकर बर्फ़ में छेद कर मछली और सील पकड़ेंगे.
लेकिन जब तक समुद्र तरल अवस्था में है विशालकाय बर्फ़ का टुकड़ा हिलता है. यह उत्तरी गोलार्ध में तैरने वाली सबसे बड़ी वस्तु है और उनके बीच से गुज़रती नाव से यह एक जंगल जैसे ही उलझे हुए दिखते हैं.
कुछ रोएं की तरह धुएं के थक्के जैसे लगते हैं, कुछ घाटी में फैली क्रीम की तरह, कुछ एक शक्तिशाली डिटर्जेंट की तरह नीले हैं. पृथ्वी के इतने उत्तर में बर्फ़ नीली या सफ़ेद या काली और हीरे की तरह साफ़ भी हो सकती है.

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यह एक साल पुरानी भी हो सकती है और 2,50,000 साल पुरानी भी, इसका आकार मूंगे की तरह हो सकता है, या मशरूम की तरह या फिर सेब के टुकड़े की तरह.
किले जैसे और आसमान छूती मीनार जैसे हिमखंड हैं- मोती या लावे से निकले कांच की बनावट जैसे पूरे द्वीप हैं जो पानी के अंदर कई गुना बड़े हैं.
जब नॉर्वे के महान खोजी फ़्रिटजोफ़ नान्सेन ने 1888 में ग्रीनलैंड को पार करने की अपनी पथप्रदर्शक यात्रा के बारे में लिखा तो बताया कि ये आश्चर्यजनक, अपरांपरागत निर्माण देखकर उन्हें बचपन और परीलोक का ख़्याल आया- लेकिन साथ ही मौत का भी.
विषाद स्वाभाविक रूप से परिदृश्य में दिखता है. कुछ दिन बाद दूरदराज़ के इसी हिमखंड के नज़दीक, एक बर्फ़ की चोटी के पास, मुझे 1948 में फ्रांसीसी ध्रुवीय खोजदल का बनाया आधार शिविर दिखा.

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यह अब भी अपनी काली चट्टान पर खड़ा था (हालांकि अकेला) और खाना बनाने के बचे खुचे उपकरणों के साथ.
दीवारों पर बने चित्र इस दूरस्थ उत्तरी तट पर अकेले रह जाने का दुख बयां कर रहे थे, किसी ने लकड़ी पर खुरच कर लिखा था, "आह मैं बेकार का बोझ...यहां. बर्फ़ के बीच में. 1949."
बाहर, हिमखंड ख़ुद ही चरमराता है और कराहता है- इससे बर्फ़ रिस रही है. दूर से किसी नज़दीक आती सेना के हथियार या डाइनामाट जैसे धमाके की, गिरने की- निरंतर और अस्पष्ट आवाज़ें आती हैं.
आसमान अंततः एक मौसम भर के लिए धुले हुए बैंगनी रंग का हो जाता है- अंतहीन रात.
मैंने लोगों से पूछा, "आप लोग निराश नहीं हो जाते."
इसके लिए एक ग्रीनलैंडी शब्द है, परलेरोर्नेक,- जिसका अर्थ है बोझ.
मेरी युवा दोस्त निकोलेना मेरी हंसी उड़ाती है. कहती है, "सूरज उबाऊ होता है."
उसे सर्दियां पसंद है. अपने किशोर पड़ोसियों के साथ झुंड बनाकर 10 घंटे तक डरावनी फ़िल्में देखना या एक-दूसरे को जंगल में किसी न किसी वजह से गायब हो गए इंसानों के बारे में कहानी सुनाना, जहां प्रबल इच्छा या अवसाद की वजह से उन्होंने आकार-बदलना सीख लिया है.
निकोलेना कहती हैं कि एक बार उन्होंने एक फटीचर बूढ़े आदमी को अकेले ही बाहरसींगों की भगदड़ के बीच खड़ा देखा था, अचानक वह आगे की ओर उछला, लेकिन आर्कटिक के एक खरगोश की तरह.

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मैंने सोचा कि अकेले अपनी स्लेज में जाने वाले मछुआरों को कभी किविटॉक का डर लगा? 29 वर्षीय फ़ारी अपने पसंदीदा भेड़िये जैसे आधे जंगली कुत्ते मालेसोर्निया की ओर इशारा करते हुए सिर हिलाते हैं, जो गुर्राते हुए अपने मालिक का सुरक्षा कर रहा है.
पिछले साल जब फ़ारी के घर से दूर उनकी स्लेज सीधे बर्फ़ के बीच जा गिरी तो मालसोर्निया उन्हें खींचकर, घसीटते हुए सुरक्षित स्थान पर ले आए... और तब भीगे हुए और सुन्न फ़ारी आठ घंटे तक अंधेरे में पड़े रहे.
वह अब भी हालीबट (एक मछली) के लिए रास्ता बनाते हैं. ज़िद.
ग्रीनलैंडियों को लगता है कि यूरोपीय फड़फड़ाते बहुत ज़्यादा हैं. वह मुझे झिड़कते हैं, इतनी ज़्यादा बातें, इतना ज़्यादा शोर! और तो और ग्रीनलैंडीय भाषा में बहुत ज़्यादा झंझट या अतिरंजना नहीं है. अंक सिर्फ़ 12 तक ही हैं.

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मैंने फ़ारी से पूछा, "बर्फ़ काटकर बनाए गए गड्ढे में से आज तक तुमने सबसे अजीब चीज़ क्या पकड़ी है?"
मुझे उम्मीद थी कि वह बोलेगा एक नरवाल (सफ़ेद व्हेल), जिसके ऊपरी जबड़े से बाहर निकले पेंचदार दांतों को देखकर वाइकिंग्स को लगता था कि ये उसके पेट में फंसे यूनिकॉर्न का होगा.
उनके पैर के पास ही सील के चार मीनपंख पड़े हुए हैं. छोटी पोलोक मछली को कांटे में फंसाते हुए फ़ारी मेरे सवाल पर थोड़ी देर सोचते हैं, "एक आदमी".
थोड़ी देर बाद वह सिर हिलाते हैं और कहते हैं, "एक जमा हुआ आदमी. वह ज़रूर अपनी मछली पकड़ने की नाव से गिर गया होगा."
फिर फ़ारी अपने कंधे झाड़ते हैं. एक समझदार ग्रीनलैंडी के लिए यह सही संतुलन है.

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आप शिकार करते हैं, आप जान लेते हैं और एक दिन बिल्कुल इसी तरह आप अपनी जान दे देते हैं. इसलिए फ़ारी ने अपनी बर्फ़ की कब्र में कैद आदमी को वैसे ही रहने दिया.
एक बार भी दोबारा उसकी ओर न देखकर वह अपनी स्लेज को वहां से ले गए, हिमखंड के उत्तर में ले गए. कस्बे और साथ के सारे विचार धुंधले पड़ते गए. उनके दिमाग में कई दिन तक मछलियों, मालेसोर्निया और लंबी ध्रुवीय रात के सिवा कुछ नहीं था.
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