अमरीका क्षेत्र में असंतुलन न बढ़ाए : पाक

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पाकिस्तान का कहना है कि नवाज़ शरीफ़ की अमरीकी नेताओं और अधिकारियों से मुलाक़ात के दौरान बुनियादी मुद्दा पाकिस्तान का राष्ट्रीय हित और सुरक्षा होगा जिस पर किसी तरह का कोई समझौता नहीं हो सकता है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ 20 अक्तूबर (मंगलवार) को अमरीका जा रहे हैं जहां वो राष्ट्रपति बराक ओबामा के अलावा कई अन्य मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाक़ात करेंगे.
नवाज़ शरीफ़ की अमरीका यात्रा पर बीबीसी उर्दू से बातचीत करते हुए पाकिस्तान के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने कहा कि अमरीका को चाहिए कि वो ऐसा कोई क़दम न उठाए जिससे दक्षिण एशिया में पहले से मौजूद असंतुलन में और इज़ाफ़ा हो.

सरताज अज़ीज़ ने कहा कि इस दौरे पर अमरीका से जो मुख्य बातें होंगी उनमें भारत से संबंध, आर्थिक सहयोग और अफ़ग़ानिस्तान में शांति की बहाली शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि अमरीका, भारत के साथ जैसे संबंध रखना चाहता है वो रख सकता है, लेकिन ऐसे समय में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव है तो अमरीका को चाहिए कि वो सामरिक असंतुलन को इतना न बढ़ाए कि वो इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए ख़तरा बन जाए.
भारत-पाकिस्तान संबंध

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भारत-पाकिस्तान संबंधों में अमरीका के रोल के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सिर्फ़ अमरीका ही नहीं दुनिया के बाक़ी देश भी यही चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान अपने सारे मसले बातचीत से हल करें लेकिन इसके लिए सबसे बुनियादी शर्त यही है कि क्षेत्र में शक्ति संतुलन न बिगड़े.
पाकिस्तान और अमरीका के बीच असैन्य परमाणु समझौते की संभावना को अमरीका के ज़रिए ख़ारिज किए जाने के बारे में सरताज अज़ीज़ ने कहा कि इस पर बातचीत काफ़ी सालों से चल रही है.
उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान ने जो क़दम उठाए हैं उससे पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय संतुष्ट है.
सरताज अज़ीज ने कहा कि परमाणु शक्तियों के मुख्यधारे में पाकिस्तान को शामिल करने की कोशिशें जारी हैं.
उन्होंने कहा कि इनमें कुछ अंतरराष्ट्रीय चीज़े हैं, और कुछ का संबंध अमरीका से है.
भारत-अमरीका असैन्य परमाणु समझौते के बारे में सरताज अज़ीज़ ने कहा कि भारत के साथ अमरीका ने जो समझौता किया था वो एक ख़ास सिलसिले में किया था और उसका भी कोई ख़ास अच्छा नतीजा नहीं निकल सका है.
उन्होंने कहा कि भारत अभी तक न्युक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) यानी परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह देशों का सदस्य नहीं बन पाया है और उनके अनुसार पाकिस्तान और भारत साथ ही उसके सदस्य बनेंगे.
अफ़ग़ानिस्तान

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अफ़गानिस्तान के बारे में सरताज अज़ीज़ ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को तय करना है कि उसे क्या करना है.
अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना के बने रहने के बारे में उन्होंने कहा कि ये अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान का मसला है, इससे पाकिस्तान का कोई सीधा ताल्लुक़ नहीं है.
उन्होंने कहा कि अगर अफ़ग़ानिस्तान में शांति नहीं रहेगी और सीमा पर अस्थिरता रहेगी तो ये पाकिस्तान के लिए भी ख़तरा है.
सरताज अज़ीज ने कहा कि बराक ओबामा ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वो अफ़ग़ानिस्तान में बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन इसमें असल फ़ैसला अफ़ग़ानिस्तान सरकार को करना है. अगर अफ़ग़ानिस्तान चाहता है कि पाकिस्तान इसका हिस्सा बने तो पाकिस्तान इसमें अपना सहयोग देने के लिए तैयार है.

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हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान में कुंदूज़ पर तालिबान के हमले में पाकिस्तानी हाथ होने के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले ही सफ़ाई दे चुका है.
उन्होंने कहा कि कुंदूज़ तो पाकिस्तानी सीमा से बहुत दूर है.
उनके अनुसार जो लोग पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान के बीच रिश्ते नहीं चाहते वो ऐसी बात करते रहते हैं, लेकिन दुनिया को पता है कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा और वहां शांति बहाली चाहता है.
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