अमरीका में होगा मोदी का ‘हार्दिक’ स्वागत

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
दक्षेश पटेल उन हज़ारों लोगों में से हैं जिन्होंने पिछले साल न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में नारे लगाए थे. वो उन गिने-चुने लोगों में भी थे जो मोदी के प्रेम में उन्हें सुनने इस साल कनाडा भी पहुंच गए थे.
वही दक्षेश पटेल इस शुक्रवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर मोदी के ख़िलाफ़ नारे लगाएंगे.
नाराज़ पटेलों की ऐसी ही एक रैली रविवार को कैलिफ़ोर्निया के सैन होज़े में भी हो रही है जहां भारतीय समुदाय पिछले साल की तरह ही फिर से मोदी का भव्य स्वागत करने की तैयारी कर रहा है.
स्वागत बनाम विरोध
पेशे से व्यापारी, दक्षेश पटेल कहते हैं, “मोदी के साथ हमारा हनीमून अब ख़त्म हो गया.”

उनकी नाराज़गी इस बात से है कि पटेल समुदाय के भारी समर्थन के बावजूद मोदी ने उन्हें आरक्षण की सूची में शामिल करवाने में कोई मदद नहीं की है.
<bold>पढ़ें - <link type="page"><caption> 'प्रभावशाली' पटेलों को क्यों चाहिए आरक्षण?</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150828_significance_of_patel_agitation_pm" platform="highweb"/></link></bold>
पटेल समुदाय गुजरात में काफ़ी दबदबा रखता है लेकिन दक्षेश पटेल का कहना है कि उसमें सही मायने में संपन्न परिवारों की तादाद काफ़ी कम है.
वो कहते हैं, “मेरे पिता किसान थे और काफ़ी मेहनत करके उन्होंने मुझे इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवाई. लेकिन मुझे भारत इसलिए छोड़ना पड़ा क्योंकि वहां मेरे लिए कोई नौकरी नहीं थी.”
पटेलों का ग़ुस्सा
अमरीकी पटेलों का ग़ुस्सा इस बात पर भी है कि गुजरात और केंद्र दोनों ही जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार के बावजूद उनके ख़िलाफ़ पुलिस ने “शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान बर्बरता से काम लिया” और उनके ख़िलाफ़ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

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न्यू जर्सी के एडिसन इलाक़े में बड़ी तादाद में गुजराती मूल के लोग रहते हैं और इनमें पटेल भी काफ़ी हैं.
पिछले साल जब मोदी न्यूयॉर्क आए थे तो न्यू जर्सी में नवरात्र की धूम थी लेकिन देवी-देवताओं की मूर्तियों और पोस्टरों को मोदी की बड़ी-बड़ी तस्वीरों से <link type="page"><caption> मुक़ाबला करना</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/international/2014/09/140928_modi_in_america_dil" platform="highweb"/></link> पड़ रहा था.
दुकानों में गरबा की पारंपरिक लंहगा-चुन्नियों की टक्कर मोदी की स्टाइल के रंगबिरंगी कुर्तों और जैकेटों से थी. कुछ लोग तो यहां तक कह रहे थे कि लगता है जैसे भगवान राम वनवास ख़त्म करके लौट रहे हैं.
तेजस पटेल भी उसी इलाक़े में रहते हैं और कहते हैं कि वो अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. वो मोदी की तुलना अब रावण से करते हुए कहते हैं कि रावण साधु के वेश में आया इसलिए सीता का हरण करके ले गया.
कहते हैं, “ये तो हमारी ग़लती है कि हम फिर से एक ऐसे आदमी से धोखा खा गए जो साधु के वेश में हमारे सामने आया था.”
संपन्न पटेल समुदाय

भारत से अमरीका आकर बसने वालों में पटेल समुदाय की गिनती सबसे ज़्यादा संपन्न लोगों में होती है. अमरीका के एक हज़ार सबसे प्रचलित उपनामों में पटेल 172वे नंबर पर आते हैं जो कि ख़ान, अली, सिंह और शाह से कहीं ऊपर है.
एशियन अमेरिकन होटल ओनर्स एसोसिएशन के अनुसार अमरीका के 40 प्रतिशत होटल मालिक भारतीय मूल के हैं और इनमें सबसे ज़्यादा तादाद पटेलों की है. इस उद्दोग में उनका दबदबा कैसा है उसका अंदाज़ा इसी से लग सकता है कि इस एसोसिएशन के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, ट्रेज़रर और सचिव सभी पटेल हैं.
इनमें से कोई वापस भारत जाकर सरकारी नौकरी करेगा इसकी संभावना कम ही है. तो फिर भारत में चल रही जाति की बहस को अमरीकी ज़मीन पर लाना कहां तक सही है?
दक्षेश पटेल कहते हैं कि गुजराती समुदाय अपनी जड़ो से काफ़ी जुड़ा हुआ है और उस विरोध प्रदर्शन के ज़रिए वो उनके साथ एकजुटता दिखा रहे हैं.

कहते हैं, “अगर मोदी विदेशों में जाकर भारतीय राजनीति और वहां के घोटालों का ज़िक्र करने से नहीं चूकते तो हमसे ये उम्मीद क्यों.”
उनका कहना है कि न्यूयॉर्क में शुक्रवार के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए तीन हज़ार से ज़्यादा पटेलों ने हामी भर दी है लेकिन न्यूयॉर्क पुलिस इतने लोगों को वहां जमा होने की इजाज़त शायद नहीं देगी.
पिछले रविवार को पटेल समुदाय के ही कुछ लोगों ने अलबामा राज्य मे सेलमा से माँटगॉमेरी तक पैदल मार्च किया. ये वही ऐतिहासिक मार्ग है जिसपर डॉक्टर मार्टिन लूथर किंग ने काले लोगों के हक़ के लिए पैदल मार्च किया था.
मोदी का समर्थन भी
लेकिन एक बात स्पष्ट है कि प्रदर्शनकारी पटेलों की संख्या उन पटेलों के मुक़ाबले काफ़ी कम है जो मोदी के स्वागत की तैयारी में जुटे हैं और पूरी तरह से उनके साथ हैं.

कई बड़े पटेल संगठनों ने मोदी के समर्थन में बयान जारी किए हैं और समुदाय के अंदर ख़ासा दबदबा रखने वाले होटल ओनर्स एसोसिएशन ने भी मोदी के स्वागत में प्रेस रिलीज़ जारी किए हैं.
होटल ओनर्स एसोसिएशन के पूर्व बोर्ड मेंबर और वाशिंगटन में गुजराती समाज के अध्यक्ष रह चुके पॉल पटेल इस तरह के विरोध प्रदर्शन के बिल्कुल ख़िलाफ़ हैं.
उनका कहना है, “मोदी अमरीका में भारत के हितों की बात करने आ रहे हैं. ये घरेलू मामलों को उठाने की जगह नहीं है.”
उनका कहना है कि पटेल समेत 90 प्रतिशत से ज़्यादा गुजराती समुदाय के लोग मोदी के साथ हैं और अमरीका में उनके स्वागत के लिए तैयार हैं.
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