‘पाक प्रशासित कश्मीर में हिंदुओं से भेदभाव’

पाकिस्तानी सेना

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पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में 'मानवाधिकार उल्लंघन' बंद करने की मांग को लेकर ब्रिटेन की संसद में एक प्रस्ताव पेश किया गया है.

ब्रिटेन के कई सांसदों के अलावा लेबर पार्टी के नवनिर्वाचित नेता जेरेमी कॉर्बिन ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है.

इसमें यह भी कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना बिना शर्त अक्टूबर 1947 से पहले वाली स्थिति में लौट जाए. इसका ये मतलब लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान अपने प्रशासन वाले कश्मीर से सेना हटा ले.

इस प्रस्ताव में ऐसे कई मुद्दे शामिल हैं, जिन्हें भारत समय-समय पर उठाता रहा है. हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी चर्चा नहीं हुई है.

early day motion

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इमेज कैप्शन, इस प्रस्ताव में सीमापार चरमपंथ को रोकने की मांग भी की गई है.

प्रस्ताव लाने वाले साउथ हॉल के सांसद वीरेंद्र शर्मा से बीबीसी संवाददाता अनुराग शर्मा ने बात की.

पढ़ें, बातचीत के मुख्य अंश

वीरेंद्र शर्मा ने कहा कि ब्रिटेन का हमेशा से मानना रहा है कि कश्मीर का मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच का आपसी मामला है. और इस प्रस्ताव का यह क़तई मतलब नहीं है कि दोनों देशों के आपसी मामले में दख़ल दे रहा है.

लेकिन 'हम चाहते हैं कि लोगों के ज़हन में मानवाधिकार को लेकर जो भी धारणा है, उस पर बात की जाए.

'पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहने वाले हिंदू या अन्य अल्पसंख्यक समुदाय भी कहते हैं कि उनके साथ भेदभाव होता है.

जेरेमी कॉर्बिन

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इमेज कैप्शन, कॉर्बिन 12 सितंबर को लेबर पार्टी के नए नेता चुने गए हैं.

हमारा कहना है कि आप मानवाधिकार के दूसरे मामलों पर बात करते हैं तो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जो मामले हैं उस पर भी बात कीजिए.'

'मुख्य एजेंडा नहीं'

शर्मा ने कहा कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हिंदू, ईसाई, सिख, अहमदिया आदि अल्पसंख्यक समुदाय हैं वो हमारे पास आकर भेदभाव किए जाने की बात करते हैं. इस पर संबंधित सरकार को जवाब देना चाहिए.

उन्होंने ये भी साफ़ किया कि हालांकि जेरेमी कॉर्बिन ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि इस मामले को लेकर वो कोई अभियान चलाने जा रहे हैं.

कश्मीर

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इमेज कैप्शन, मानवाधिकार कार्यकर्ता भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं.

भविष्य में भी कश्मीर का मुद्दा कॉर्बिन की विदेश नीति का मुख्य एजेंडा नहीं होने जा रहा है.

चूंकि भारत और पाकिस्तान से बड़ी संख्या में लोग ब्रिटेन में आकर रहते हैं और हमारे मतदाता हैं. इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी आवाज़ को उठाएं.

इस मुद्दे पर बातचीत किए जाने की मांग यहां के लोगों की है, हमारी नहीं है. हम तो अपने नागरिकों की ओर से ये बात कह रहे हैं.

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