बहरीन के 'अल-वसत' अख़बार पर प्रतिबंध

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बहरीन ने अपने देश के इकलौते स्वतंत्र अख़बार माने जाने वाले अल-वसत के प्रकाशन पर फ़िलहाल रोक लगा दी है. बहरीन की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार अल-वसत ने देश का 'क़ानून तोड़ा है'.
रोक से एक दिन पहले बहरीन के सूचना मंत्री इस्सा बिन अब्दुलरहमान अल हम्मादी ने कहा था कि वो देश के बारे में ग़लत जानकारी फैलाने वाले मीडिया के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करेंगे.
वहीं, दूसरी तरफ मानवाधिकार संस्थाओं ने इसे विरोध को दबाने वाला क़दम बताया है. 2011 में भी सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों की ख़बरें छापने के बाद अल-वसत को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया था.
विरोध की आवाज़
इसके मुख्य संपादक मंसूर अल जमरी के ख़िलाफ़ झूठी जानकारियां प्रकाशित करने के आरोप में मुकदमा चलाया गया था और उन पर जुर्माना भी किया गया था.

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इसके सह संस्थापक करीम फकरावी की हिरासत में मौत हो गई थी. आरोप लगे थे कि हिरासत में उन पर अत्याचार किया गया था जिससे उनकी मौत हुई.
मध्य पूर्व क्षेत्र में अल-वसत को एक सम्मानित अख़बार के रूप में देखा जाता है. इसके संपादक मंसूर अल-जमरी को 2011 में सीपीजे इंटरनेशनल प्रेस फ्रीडम अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.
अल-वसत का प्रकाशन 2002 में शुरू हुआ था. बहरीन में लोगों के बीच यह धारणा है कि यह पहला ऐसा अख़बार है जो बहरीन सरकार का पक्ष नहीं लेकर उसके विरोध में भी अपना पक्ष रखता है.
बहरीन में पिछले कुछ साल में लोकतंत्र के समर्थन में कई बार प्रदर्शन हुए हैं. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि 2011 के बाद से सुरक्षाबलों के साथ झड़पों में कम से कम 89 लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोगों को जेलों में डाला गया है.
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