पाकिस्तानः पहली बार सिख बने क़बायली मलिक

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में प्रदर्शन करते सिख.

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    • Author, रिफ़तुल्लाह ओरकज़ई
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पेशावर

पाकिस्तान के फ़ेडरली संघ प्रशासित जनजातीय क्षेत्रों (फ़ाटा) में रहने वाले अल्पसंख्यकों को पहली बार क़बायली मलिक का दर्जा मिला है.

क़बायली मलिकों के पास पासपोर्ट और पहचान पत्र बनाने से जुड़े दस्तावेज़ों को प्रमाणित करने का अधिकार होता है.

पेशावर के कमिश्नर ने हाल ही में ख़ैबर एजेंसी इलाक़े के चार ग़ैर-मुसलमानों को क़बायली मलिक का दर्जा दिया है. इनमें दो ईसाई हैं और दो सिख.

क़बायली मलिक का दर्जा पाने वाले ईसाई समुदाय के मलिक विल्सन वज़ीर ने बीबीसी को बताया कि इस फ़ैसले से फ़ाटा में रहने वाले सभी अल्पसंख्यकों में खुशी की लहर दौड़ गई है.

उन्होंने कहा, "फ़ाटा के अल्पसंख्यकों की बहुत पहले से यह मांग थी कि अन्य नागरिकों की तरह उन्हें भी क़बायली मलिक का दर्जा दिया जाए. जिसे सरकार ने स्वीकार कर ही लिया."

विल्सन कहते हैं, "पहले हम एक मामूली से हस्ताक्षर या किसी फार्म की पुष्टि के लिए क़बायली मलिकों के पास जाकर उनकी मिन्नत करते थे. अब उन्हें अपने समुदाय के लिए पहचान पत्र और पासपोर्ट बनवाने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना होगा."

भेदभाव ख़त्म होगा

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विल्सन कहते हैं कि क़बायली मलिक के रूप में वे बेहतर तरीके से अपने समुदाय का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं और उनकी समस्याओं को हल कर सकते हैं.

विल्सन का कहना था कि अल्पसंख्यकों को क़बायली मलिक का दर्जा प्राप्त होने से अब वह राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं और इससे फ़ाटा में भेदभाव का वातावरण भी समाप्त होगा.

क़बायली इलाक़ों में काफ़ी तादाद में अल्पसंख्यकों रहते हैं जिनमें सिख, हिंदू और ईसाई प्रमुख हैं.

पिछले कुछ समय से इन इलाक़ों में चरमपंथियों के ख़िलाफ़ सरकार की कार्रवाई से प्रभावित कई सिख और ईसाई परिवार इन इलाक़ों को छोड़कर पंजाब या दूसरे शहरों में चले गए हैं.

पाकिस्तान के ख़ैबर एजेंसी में एक पुलिस का जवान

फ़ाटा और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में रहने वाले अल्पसंख्यकों में सबसे अधिक संख्या सिखों की बतायी जाती है. दूसरे नंबर पर ईसाई समुदाय के लोग माने जाते हैं.

लोग मानते हैं कि पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा सिख पेशावर में रहते हैं.

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