जिसने ख़ुद के लिए 'असंभव' घुटना बनाया

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    • Author, रोज इवेलेथ
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

जब ब्रायन ब्राटलेट 24 साल के थे तो वे बेहतरीन स्कीइंग करते थे और अमरीकी ओलंपिक टीम में शामिल होने की राह पर थे.

लेकिन एक दिन कार की टक्कर के कारण उनके दाहिने पैर को काटना पड़ा. यह सब इतना अचानक हुआ कि ब्रायन उसे याद भी नहीं करना चाहते.

वे कहते हैं, "आप इसे तब तक समझ नहीं सकते जब तक आपके साथ ऐसा कुछ हुआ न हो."

उनका 25वां जन्मदिन अस्पताल में बीता. जब वे अस्पताल से निकले तो कृत्रिम पांव लगा था. लेकिन वे अपने पुराने जीवन में लौटना चाहते थे.

वे स्कीइंग की दुनिया में लौटना चाहते थे. ये बात 1998 की है, पैरालंपिक एथलीट ऑस्कर पिस्टोरियस के ओलंपिक में आने से कई साल पहले...

उन्होंने प्रोस्थेटिक डॉक्टर से इस बारे में पूछा तो डॉक्टर को यकीन नहीं हुआ. उसने ब्रायन से कहा," आप ऐसा नहीं कर पाएंगे, पहले जैसे स्कीइंग नहीं कर पाएँगे."

स्कीइंग करने का सपना

लेकिन हादसे के एक साल के बाद ही ब्रायन स्कीइंग ट्रैक पर पहुंच गए. इस बार वे विकलांग लोगों की स्कीइंग टीम के साथ हिस्सा लेने पहुंचे थे.

पहले ही साल उन्होंने इंटरनेशनल पैरालंपिक कमेटी के एल्पाइन स्कीइंग वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया और उसमें सातवें स्थान पर रहे. लेकिन यह काफी नहीं था.

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ब्रायन बताते हैं, "ऐसा नहीं है कि मुझे विकलांग लोगों के खेल पसंद नहीं हैं, लेकिन मेरी जरूरत पूरी नहीं हुई थी."

इसके बाद ब्रायन ब्राटलेट ने नए तरह के घुटने का आविष्कार करने का फैसला लिया. आज ब्राटलैट टेंडन यूनिवर्सल नी (बीटीके) को लोग म्यूज़ियम में रखते हैं और इसे कृत्रिम पैरों के इस्तेमाल में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है.

लेकिन तब ब्राटलेट के लिए स्कीइंग स्लोप पर वापसी करने भर का मसला था.

2001 में ब्राटलेट को सभी ने कहा था कि जो वो चाहते हैं वो संभव नहीं है. ये कोई पहली बार नहीं हो रहा था जब किसी विकलांग को अपने कृत्रिम अंग से परेशानी हो रही थी.

1861 से जारी सफ़र

कृत्रिम अंगों की तकनीक और विज्ञान में प्रगति भी इसीलिए हुई क्योंकि विकलांग लोगों ने असुविधाजनक कृत्रिम अंगों को इस्तेमाल करने पर एतराज़ जताया.

इसकी शुरुआत 1861 से ही हो गई थी. पहली जून, 1861 को 18 साल के जेम्स ई हैंगर अमरीकी सेना में भर्ती हुए थे. वे वाशिंगटन कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग के ड्रॉप आउट थे.

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अगले दिन युद्ध में उन्हें अपना बायां पांव गंवाना पड़ा. अमरीकी सिविल वार में चार साल के दौरान 60 हज़ार लोग विकलांग हुए. जेम्स उनमें पहले थे.

जेम्स को लकड़ी का बना पांव पसंद नहीं आया. अगले दस साल उन्होंने बेहतर पांव ईजाद करने में लगा दिए. आज की तारीख में हैंगर प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स अमरीका में कृत्रिम अंगों का सबसे बड़ा उत्पादक है. 2013 में उन्होंने एक अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार किया.

ऐसे ही बॉब राडोकी थे. वे स्कीइंग किया करते थे. उन्होंने अपना बायां हाथ गंवा दिया. उन्होंने कृत्रिम अंग लगाया लेकिन इससे वे स्कीइंग पोल पर हाथ नहीं बिठा पा रहे थे. तब उन्होंने महीनों तक रिचर्स करने के बाद 1979 में वैसा हाथ बना लिया, जिसकी उन्हें जरूरत थी. वे आज भी स्कीइंग अपने ईजाद किए हाथ की बदौलत कर लेते हैं.

ब्रायन की चुनौती

लेकिन ब्रायन की चुनौती बड़ी थी, उन्हें घुटना चाहिए था. उन्होंने अपने डॉक्टर के साथ मिलकर कृत्रिम घुटने को तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया. उन्होंने गाड़ी चलाने का लाइसेंस लिया और ट्रक चलाने लगे.

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वे अपने ट्रक को तेज़ चलाया करते थे. इससे वक्त बचाकर माउंटेन बाइकिंग करते थे. इसके साथ वे अपने पांव की ज़रूरत को आंकने की कोशिशों में भी लगे हुए थे.

एक साल के बाद उन्हें लगा कि उन्हें कृत्रिम अंगों के बारे में और जानना चाहिए. लिहाजा वे फैबटेक कंपनी में पहुंचे. यहां उनके कृत्रिम अंगों वाले डॉक्टर काम करते थे. वे यहां पार्ट-टाइम काम करने लगे.

लेकिन वे यहां कंपनी के काम के समय के बाद उनके औज़ारों से रिसर्च का काम करते थे. लेहाज़ा उन्हें नौकरी से निकालने की स्थिति कई बार पैदा हुई.

ब्रैटलेट कहते हैं, "वे मुझे निकालना चाहते थे. वे मुझे पसंद नहीं करते थे. मैं अच्छा कर्मचारी भी नहीं था. मैं तो उनके सामान से अपनी जरूरत का उपकरण बनाना चाहता था."

बॉस बने पार्टनर

फैबटेक के सीईओ ग्रेट मैटसन उस वक्त ब्राटलेट के बॉस थे. अब दोनों बिजनेस पार्टनर हैं. मैटसन ने बताया, "ब्रैटलेट ने पेन से एक स्केच बनाया और उसे दिखाते हुए कहा कि मैं ये बनाना चाहता हूं. वह इस तरह का पागल था."

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हालांकि वह समय भी आया जब ब्राटलेट ने फैबटेक कंपनी छोड़ दी. लेकिन इस दौरान वे अपने कृत्रिम पांव के साथ आने वाले घुटने का डिज़ाइन काफी हद तक तैयार कर चुके थे.

उन्होंने रबर का इस तरह का इस्तेमाल किया जो घुटने में नेचुरल प्रतिरोध और तनाव का एहसास करने वाला था. वे मेटल से बने सॉकेट में रबर को इस तरह डालते थे कि उनके पांव को ज्यादा आराम मिलता ब्रायन ब्राटलेट का लक्ष्य ऐसा कृत्रिम घुटना बनाने की थी जो 12 मीटर की ऊंचाई से कूदे और सही रहे.

लेकिन यह सबके लिए उतना ही मुफीद नहीं था. न्यूयार्क के कृत्रिम अंगों के विज्ञान पर काम करने वाले जैफ़ एरेनस्टोन कहते हैं, "वह काफी भारी था. यह सभी खेलों के लिए उपयुक्त भी नहीं था. लेकिन अल्पाइन स्कीइंग और माउंटेन बाइकिंग के लिए ये डिज़ाइन एकदम फ़िट था."

नेचुरल घुटना

2014 के पैरालंपिक में हिस्सा ले चुकी एथलीट निकोल राउंडी के मुताबिक यह प्राकृतिक घुटने जैसा एहसास कराता था.

लेकिन कई साल तक को केवल ब्राटलेट ही अपने कृत्रिम घुटने का इस्तेमाल करते थे. उनकी ख्याति माउंटेन बाइकर के तौर पर दूसरे लोगों तक पहुंचने लगी थी.

लोग कहते थे- 'वो बाइकर जो अजीब तरह के कृत्रिम पांव का इस्तेमाल करता है जो उसने खुद ही बनाया है.'

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लोग उनसे इस पांव के बारे में पूछते थे तो ब्राटलेट मना कर देते थे. उन्होंने इसके डिज़ाइन के बारे में शायद ही किसी को बताया हो.

वे अपने लिए हर घुटना हाथों से बनाते, अपने हाथों को वे क्वालिटी कंट्रोल का ज़रिया मानते. वे हर बार इसे टेस्ट भी करते. ब्राटलेट कहते हैं, "मैं नहीं चाहता था कि कोई दूसरा भी इसका इस्तेमाल करे. यह खतरनाक भी था."

लेकिन उन्हें अपने उस दोस्त के सामने झुकना पड़ा जो दोबारा माउंटेन बाइक चाहते थे. अपना कृत्रिम पांव किसी दूसरे को इस्तेमाल करते देखना उनके लिए बहुत ख़ुशी देने वाली और उत्साह बढ़ाने वाली घटना थी.

ब्राटलेट को 2007 में वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर से फोन आया. उन्हें संघीय सरकार की ओर से कृत्रिम पांव बनाने का बड़ा ठेका मिल सकता था. इसके लिए उन्होंने अपनी कंपनी लेफ़्ट साइड (इनकार्पोरेटिड) की स्थापना की.

कारोबार नहीं मदद की भावना

अमरीकी सेना ने उन्हें घायल सैनिकों के लिए कृत्रिम घुटने और पांव बनाने के लिए कहा. ब्राटलेट तब हिचकिचा रहे थे.

लेकिन बाद में वे सेना के लिए काम करने के बारे में तैयार हो गए थे. 2009 में उनके बीटीके प्रॉडक्शन यूनिट से सैनिकों को कृत्रिम घुटने और पांव मिलने शुरु हो गए.

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इसके बाद वे सेना के लिए लगातार काम करते रहे हैं.

लेफ़्ट साइड कंपनी के सेना के साथ अनुबंध के कारण ब्राटलेट का बिज़नेस पहले ही कामयाब हो चुका था. बाद में उन्होंने इसे खुले बाज़ार में भी बेचना शुरू किया.

वैसे रेसिंग का शौक ब्राटलेट ने 2011 में छोड़ दिया. ग्रेग मैटसन बताते हैं, "कुछ साल पहले कुछ बड़े गैप से कूदते हुए वो गिर गए थे. उनका हेलमेट टूट गया. चेहरे पर टांके लगे. मैंने कहा कि तुम अब बस करो..."

लेकिन तब तक ब्राटलेट अपने उत्पाद को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने में कामयाब हो गए थे. लेकिन फिर भी ब्राटलेट खुद को कारोबारी नहीं मानते.

वे कहते हैं, "मैं सारे घुटने हाथ से बनाता हूं. एक बार में 20 के करीब. ये मेरे लिए पैसे कमाने का ज़रिया नहीं है. बल्कि लोगों की मदद करने का तरीका है. उन्होंने अपना कुछ गंवाया होता है. वे उसे वापस चाहते हैं. मैं इसे उत्पाद नहीं मानता."

अपने घुटने को सस्ता बनाने की मैटसन की सलाह को वे कई बार खारिज कर चुके हैं. परफैक्ट घुटना बनाने के लिए ब्राटलेट हर संभव कोशिश करते हैं.

इसलिए उनके बनाए घुटने की कीमत करीब 6 हजार अमरीकी डॉलर है. अब ब्राटलेट दुनिया भर में स्कीइंग कंपीटिशन में हिस्सा लेने वाले विकलांग एथलीटों की मदद करते हैं, अपनी तरह ही वे दूसरों को उनका जीवन लौटाने की मुहिम में जुटे हैं.

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20150609-the-man-who-built-himself-an-extreme-knee" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>

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