द. अफ्रीकी पुलिस पर उठे गंभीर सवाल

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दक्षिण अफ्रीका में एक जांच आयोग ने 2012 में हड़ताल के दौरान 34 खनिकों की मौत के मामले में पुलिस के ख़िलाफ़ आपराधिक जांच की सिफ़ारिश की है.
राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा का कहना है कि आयोग की जांच में निष्कर्ष निकला है कि मारिकाना खान पर हड़ताल को ख़त्म कराने की पुलिस की योजना सही नहीं थी और इस पर अमल करना एक ग़लती थी.
पुलिस हमेशा से ये दावा करती रही है कि वेतन बढ़ाने को लेकर हो रही हड़ताल के दौरान उसने खनिकों पर गोली सिर्फ़ आत्मरक्षा में चलाई.
दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद ख़त्म होने के बाद से ये सबसे हिंसक घटना थी.
भूमिका पर सवाल

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इस मामले में खनिकों की मौत ने पुलिस, खनन कंपनियों, यूनियनों और सरकार की भूमिका पर कई सवाल खड़े किए.
हड़ताल के दौरान खनिक कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे और घटनास्थल पर 10 लोगों की पहले ही मौत हो चुकी थी, जिनमें हड़ताल न करने वाले कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और दो पुलिस अफसर भी शामिल थे.
लेकिन इस तनाव की परिणति 16 अगस्त 2012 को गोलीबारी की घटना के रूप में सामने आई जिसमें 34 खनिकों की मौत की हुई.
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