अमेज़न: नहीं हो सकती नुकसान की भरपाई

इमेज स्रोत, ROEL BRIENEN
- Author, निखिल रंजन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
पिछले महीने दक्षिण अमरिकी देशों के दौरे पर आए चीन के प्रधानमंत्री ली कचियांग ने जब ब्राजील और पेरू के बीच अमेजन से होकर गुजरने वाली रेल लाइन बनाने का प्रस्ताव रखा तो दुनिया के सबसे बड़े वर्षावन की ओर सबका ध्यान गया.
चीन की ये महत्वाकांक्षी परियोजना अमेज़न और पृथ्वी के वातावरण के लिए क्या असर पैदा करेगी इसकी पड़ताल कर रहे हैं बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन.
पृथ्वी पर जितने जीव हैं उनमें से एक तिहाई को अगर एक ही जगह देखना हो तो दक्षिण अमरीका के अमेज़न वर्षावनों में आइए.
अमेज़न नदी से जुड़ा ये जंगल करीब 5.5 करोड़ साल पहले अस्तित्व में आया.
पिछले 21000 सालों में यहां बहुत सारे बदलाव हुए हैं और जंगल का इलाक़ा बहुत सिमट गया है. बावजूद इसके यह पूरी दुनिया के वर्षावनों का आधा से ज्यादा हिस्सा है, जिसके 55 लाख वर्ग किलोमीटर का दायरा नौ देशों की भौगोलिक सीमाओं में बंटा है.
जंगल के 390 अरब वृक्षों में 16000 से ज्यादा प्रजातियां मिलती हैं और साथ ही ये 400 से ज्यादा आदिम जनजातियों का भी बसेरा है जिनमें से ज्यादातर ऐसी हैं जिनका संबंध बाहरी दुनिया से रहा है.
जंगल का संबंध

इमेज स्रोत, Thinkstock
जंगल और जंगल के जीव एक दूसरे का भरण पोषण करते रहे हैं. मानवविज्ञानी टॉम ग्रिफेंथ्स ने जंगल और इंसान के सहजीवन का गहराई से अध्ययन किया है.
वो कहते हैं, "एक अनुमान के मुताबिक यहां 40 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं और आर्कियोलॉजिस्ट बताते हैं कि यह ज़मीन काफी उपजाऊ है जिसे इन जनजातियों ने बहुत अच्छी तरह से अपनी खेती और बागवानी की तकनीकों के जरिए विकसित किया है यह अमेज़न बेसिन का कम से कम 11 फीसदी हिस्सा है."
युगों-युगों से चला आ रहा जीव और जंगल का संबंध अब खतरे में है, असंतुलन बढ़ रहा है क्योंकि इंसान की नज़र जंगल के उस खजाने तक पहुंच गई है जो ऊपर से नज़र नहीं आता.
70 के दशक के बाद यहां भारी पैमाने पर जंगलों की कटाई हुई है और एक रिसर्च के मुताबिक़ 1977 से 2005 के बीच अमेज़न में हर साल 10 हज़ार वर्ग किलोमीटर जंगल काट दिए गए.
टॉम ग्रिफेथ्स का कहना है, "ज्यादातर हिस्सा खनिजों से धनी है, इनमें सोना एक है, तेल और गैस भी बड़ा संसाधन है जिसे हासिल करने के लिए कंपनियां सरकार के साथ काम कर रही हैं और दूरदराज के इलाकों तक जा कर खुदाई कर रही हैं, अमेज़न के 70 फ़ीसदी हिस्से में भारी पैमाने पर खनिज, तेल, गैस, लकड़ी और दूसरी चीजों के लिए मोलभाव हो रहा है."
रेललाइन का प्रस्ताव

इमेज स्रोत, AP
अमेज़न के जंगलों का करीब 60 फ़ीसदी ब्राजील में, 13 फीसदी पेरू में, 10 फ़ीसदी कोलंबिया और बाकी का हिस्सा थोड़ा थोड़ा करके वेनेज्वेला, इक्वेडोर, बोलिविया, गुयाना, सूरीनाम और फ्रेंच गुयाना में है.
इन जंगलों से निकला सामान यूरोप, उत्तरी अमरीका और एशिया के उभरते बाज़ारों तक जाता है लेकिन चीन की नज़र उससे कहीं आगे है.
चीन के प्रधानमंत्री ली केशियांग ने पिछले महीने की 16 तारीख़ को 5300 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बनाने का प्रस्ताव रखा.
ये रेललाइन ब्राजील से पेरू को जोड़ेगी और लंबाई में भारत की सबसे लंबी रेल सेवा डिब्रूगढ़-कन्याकुमारी से करीब 11 किलोमीटर ज्यादा लंबी है. चीन को आख़िर इस इलाक़े में इतनी लंबी रेल लाइन की क्या जरूरत है.
बीजिंग में रहने वाले भारतीय पत्रकार सैबल दासगुप्ता का कहना है, "चीन अपना माल पूरी दुनिया में फैलाने को बेचैन है, उसके लिए ट्रांसपोर्टेशन चाहिए और वो उस पर ध्यान दे रहा है. लेकिन पेरू और ब्राज़ील के इलाके में वहां पूरा परिवहन पनामा कैनल पर निर्भर है जिस पर अमरीका का कब्ज़ा है. चीन को लगता है कि आगे चल कर अमरीका उसकी राह में बाधा बनेगा क्योंकि उसका कारोबार आख़िरकार पश्चिमी देशों को नुकसान पहुंचाएगा.’’
नुकसान

इमेज स्रोत, Greenpeace
रेल लाइन बनना शुरू होने से ले कर पहली ट्रेन चलने तक में कम से कम एक दशक का समय लगेगा और अनुमान है कि इस रेललाइन पर करीब 10 अरब डॉलर का खर्चा आएगा. लेकिन जंगल इसकी कितनी बड़ी क़ीमत चुकाएगा.
भारत में जल जंगल और पर्यावरण के लिए संघर्ष कर रही मेधा पाटेकर ने बीबीसी से कहा,"अस्सी फ़ीसदी ब्राज़ील की जो बिजली अमेज़न घाटी से बनती है उस बिजली का कितना हिस्सा घाटी के लोगों को मिलता है, कितने घर आज भी अंधेरे में हैं, प्राकृतिक जंगल के बीच से इस तरह का हस्तक्षेप विकास के नाम पर जो जंगल का खात्मा करेगा उसका नुकसान केवल स्थानीय लोग नहीं भुगतेंगे. पर्यावरण में बदलाव देशों की सीमा नहीं मानती तो नदी घाटी की सीमा क्या मानेगी."
चीन दुनिया के हर कोने में अपने कदमों के निशान पक्के कर रहा है, अपने लिए ज़मीन तलाश रहा है और रास्ता बना रहा है.
अगर ये परियोजना अस्तित्व में आई तो दुनिया की सबसे बड़ी रेल परियोजना होगी और किसी भी देश के लिए इससे जुड़ना कारोबार के लिहाज से फायदेमंद होगा लेकिन नुकसान उठाएगा अमेज़न और अमेज़न का नुकसान केवल दक्षिणी अमरीका का नुकसान नहीं है.
भरपाई

इमेज स्रोत, Getty
विशाल वर्षावनों के सिमटने का असर इसकी भौगोलिक सीमाओं से बहुत दूर तक होगा.
भारत में पर्यावरण के लिए काम करने वाले आशीष कोठारी के मुताबिक़, "अमेज़न के जंगल से दुनिया भर की बारिश पर अच्छा असर होता है अगर ये कटे तो इससे बारिश के साथ ही जलवायु परिवर्तन पर बुरा असर होगा. जंगल के कटने से कार्बन का उत्सर्जन तो बढ़ेगा ही उनके ना होने से धरती पर पहुंचने वाली सूरज की किरणों का तेज़ भी ज्यादा होगा और धरती की गर्मी बढ़ेगी."
ये बात अब साबित हो चुकी है कि जंगलों को काट कर नई जगह पेड़ों को लगाने भर से इस नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती.
विकास और विनाश के बीच फर्क करना मुश्किल हो रहा है लेकिन इंसानी कदमों की रफ़्तार थोड़ा ठहर कर सोचने को तैयार नहीं.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












