नेपाल: हिलती धरती कांपते कलेजे

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- Author, दिव्या आर्या
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, काठमांडू से
नेपाल में शनिवार को आए भूकंप के बाद भी झटके लगातार महसूस किए जा रहे हैं जिसकी वजह से लोग काफी डरे हुए हैं.
कल बारिश की वजह के राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुआ है. आम लोगों को पहले से कहीं अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

बिहार की रहने वाली पूजा पोद्दार काम की तलाश में 15 साल पहले नेपाल आई थीं.
वो फिलहाल यहां दिहाड़ी पर काम करती हैं. उनके पति और बेटियों समेत उनके परिवार में 16 लोग हैं जो अपने छोटे से घर में दोबारा जाने से डर रहे हैं.
इसीलिए उनका पूरा परिवार बाहर रहने को मजबूर है. उन्होंने बाहर ही टेंट लगा लिया है और खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर और स्टोव ख़रीद लिया है.
हालांकि शौचालय या बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है. सरकार ने भी उन्हें कोई मदद मुहैया नहीं कराई है.
अस्पतालों को भी नुक़सान

अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास मौजूद गोल्फ कोर्स पर ही लोगों ने टेंट बना लिए हैं और उसी में रह रहे हैं.
हालांकि यहां लोगों के आने पर प्रतिबंध था लेकिन भूकंप आने के बाद यहां लगे कंटीले तार टूट गए जिसके बाद लोग अंदर घुस गए.

कुछ लोगों ने पशुपतिनाथ मंदिर के कॉम्पलेक्स में रहना शुरू कर दिया है. उनका मानना है कि यह इलाका शुभ है और वो यहां अधिक सुरक्षित रहेंगे.

अस्पतालों के लॉन में भी कई लोगों ने डेरा जमा लिया है.
इसमें से कई लोग ऐसे हैं जो किसी के इलाज के लिए नहीं बल्कि खुली जगह में रहने के लिए आए हैं.
साथ ही उनका मानना है कि अगर कोई आपात स्थिति होती है तो उन्हें यहां जल्द इलाज भी मिल जाएगा.
हालांकि कई अस्पताल तो ऐसे हैं जिनकी खुद की इमारतों को नुकसान पहुंचा है.
लोगों में दहशत

लोग घरों में रहने से इतने ज़्यादा डरे हुए हैं कि सड़कों पर या फिर किसी भी खुली जगह पर बैठने को तैयार हैं.

भूकंप पीड़ितों का दावा है कि सरकार अभी तक राजधानी काठमांडू में फंसे लोगों को किसी तरह की राहत सामग्री नहीं पहुंचा सकी है.
स्थानीय लोग अपनी तरफ से ही एक दूसरे की मदद कर रहे हैं.
एक रेस्टोरेंट के बाहर पार्क में मौजूद 100 लोग सभी पड़ोसी हैं. बच्चों के लिए यह समय बहुत ही मुश्किल है.
वहीं सरकार का कहना है कि उन्होंने दूर-दराज़ के इलाकों में मदद के लिए हेलीकॉप्टर रवाना कर दिए हैं.
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