अफ़ग़ानिस्तानः पहले तालिबान, अब आईएस?

इस्लामिक स्टेट

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    • Author, बीबीसी मॉनिटरिंग सेवा
    • पदनाम, क्या चर्चित है और क्यों?

अफ़ग़ानिस्तान के पूर्वी शहर जलालाबाद में शनिवार को हुए फ़िदायीन हमले के लिए चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ज़िम्मेदारी ली है.

देश में इस चरमपंथी संगठन के बढ़ते असर का ये सबसे ताज़ा उदाहरण है.

18 अप्रैल को तड़के हुए इस आत्मघाती हमले में कम से कम 33 लोग मारे गए और 100 लोग घायल हैं.

पिछले कुछ महीने में मध्य पूर्व के इस चरमपंथी संगठन ने आहिस्ता आहिस्ता अफ़ग़ानिस्तान में अपना दख़ल बढ़ाया है.

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आईएस तालिबान लड़ाकों को अपने संगठन में भर्ती करने की कोशिश भी कर रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक स्टेट की बढ़ती गतिविधियों से वहां की सरकार के साथ साथ संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी चौकन्नी हो गई हैं.

नीचे उन प्रमुख घटनाओं का क्रमवार ब्यौरा दिया गया है जिससे इस देश में आईएस की बढ़ती मौजूदगी का अंदाजा लगाया जा सकता है.

फ़रवरी

23 फरवरीः दक्षिणी सूबे ज़ाबोल में आईएस की तर्ज़ पर काले कपड़े पहने बंदूकधारियों ने हेरात-काबुल हाईवे पर एक बस रोकी.

उन्होंने ईरान से लौट रहे 31 हज़ारा शरणार्थियों को अग़वा कर लिया. ऐसी खबरें हैं कि नक़ाबपोश बंदूक़धारी विदेशी ज़ुबान में बात कर रहे थे जो फ़ारसी, पश्तो या किसी पाकिस्तानी ज़ुबान से अलग थी.

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25 फ़रवरीः पश्चिमी फराह सूबे के प्रवक्ता जावेद अफ़ग़ान ने बताया कि ख़ाक़-ए-सदीफ ज़िले में पखवाड़े भर पहले आईएस के तक़रीबन 70 से 80 चरमपंथी आए और वे स्थानीय लोगों की भर्ती कर रहे हैं.

28 फ़रवरीः उत्तरी कोंदूज़ सूबे के गवर्नर मोहम्मद उमर सफ़ी ने बताया कि उनके प्रांत में आईएस के 50 से 70 चरमपंथी हैं.

उन्होंने कहा कि कोंदूज़ सूबे में भर्ती किए गए लोगों को बरग़लाया गया है और आईएस कोंदूज़ का इस्तेमाल अन्य देशों में घुसपैठ के अड्डे के तौर पर करता है.

मार्च

पांच मार्चः रूस ने इस क्षेत्र में आईएस की बढ़ती मौजूदगी पर चिंता जताई. रूस के उप-रक्षा मंत्री एनाटोली एंटनी ने कहा कि एशिया प्रशांत क्षेत्र के देशों पर ख़तरा मंडरा रहा है.

उन्होंने बताया कि तालिबान और आईएस के दस से पंद्रह फ़ीसदी लड़ाके इसी क्षेत्र से हैं.

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छह मार्चः मोहम्मद मोहक़ेक का नाम शिया समुदाय के बड़े नेताओं में लिया जाता है. उन्होंने आईएस के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाए जाने की मांग की है.

हालांकि वो पहले तालिबान के ख़िलाफ़ रहे हैं. लेकिन अब उन्होंने आईएस के विरूद्ध जारी लड़ाई में तालिबान को भी शरीक होने को कहा है.

इस बीच तालिबान ने 31 मुसाफ़िरों को अग़वा किए जाने के आरोपों से इनकार किया है.

सात मार्चः पूर्वी काबुल में सूफी समुदाय के एक धार्मिक स्थल पर सशस्त्र हमले में 11 लोग मारे गए. इस घटना में भी आईएस के शामिल होने की बात कही गई है.

12 मार्चः बाल्ख़ सूबे के गवर्नर अट्टा मोहम्मद नूर ने चेतावनी दी कि वो दिन दूर नहीं जब आईएस का काला झंडा तालिबान के सफेद झंडे की जगह ले लेगा.

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15 मार्चः दक्षिण हेलमंद सूबे में सुरक्षा बलों के साथ हुई एक झड़प में हाफिज़ वाहिदी की मौत हो गई. हाफ़िज़ का संबंध आईएस से माना जाता था.

और हाफ़िज़ को नेटो को हवाई हमले में मारे गए मुल्ला अब्दुर्रउफ ख़ादिम का उत्तराधिकारी भी माना जाता है. वो कथित तौर पर अफ़ग़ानिस्तान में आईएस के डिप्टी लीडर थे.

17 मार्चः अफ़ग़ानिस्तान में आईएस की मौजूदगी को लेकर संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भी चिंता जताई गई है.

इस बीच अफ़ग़ानी फ़ौज के अफ़सरों ने कहा कि आईएस से जुड़े बंदूकधारियों ने पारंपरिक हज़ारा समुदाय के एक सैनिक को फराह प्रांत में अग़वा कर लिया है.

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21 मार्चः उपराष्ट्रपति जनरल अब्दुर्रशीद दोस्तम ने सभी अफ़ग़ानों और पूरे क्षेत्र के लिए आईएस को ख़तरा घोषित किए जाने की मांग की है.

23 मार्चः राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने चेतावनी दी कि अफ़ग़ानिस्तान संगठन के रडार पर है.

उप रक्षा प्रमुख हेसमोद्दीन हेसम ने कहा कि आईएस से जुड़े कुछ बंदूकधारी अफ़ग़ान नौजवानों को भर्ती करने की कोशिश कर रहे हैं और कुछ ने तो पहले ही संगठन के प्रति वफ़ादारी की कसमें खा ली हैं.

24 मार्चः मेदान-वारदाग़ सूबे के सयदाबाद ज़िले में सफेद कपड़ों में नकाबपोश बंदूकधारियों ने 12 आम लोगों को मारा. इस हादसे में तीन लोग घायल हुए. प्रांतीय पुलिस के प्रमुख ने बताया कि हमलों के पीछे आईएस का हाथ हो सकता है.

28 मार्चः पूर्वी नांगरहर प्रांत के गवर्नर हाजी गोलाब ने बताया कि बाटीकोट ज़िले में आईएस के चरमपंथियों ने इलाक़े के एक क़बायली सरदार की हत्या कर दी.

अप्रैल

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पहली अप्रैलः इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ उज़बेकिस्तान (आईएमयू) से अलग हुए एक गुट ने संगठन से संबंध स्थापित कर लिया है. इससे पहले ये माना जाता था कि आईएमयू का संबंध तालिबान से है.

छह अप्रैलः टीवी चैनल सीएनएन के वीडियो में दिखाया गया कि दक्षिणी काबुल के एक इलाक़े में आईएस की तर्ज़ पर काले कपड़े पहने कुछ नकाबपोश बंदूकधारी ट्रेनिंग ले रहे हैं.

आठ अप्रैलः फराह प्रांत में पोश्त रोड ज़िले में चरमपंथियों ने अफ़ग़ान सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया लेकिन उन्हें खदेड़ दिया गया. सरकारी अख़बार हेवाद ने लिखा कि हमलावरों में 'कई सौ इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी' थे.

इस्लामिक स्टेट के लड़ाके

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नौ अप्रैलः कोंदूज़ सूबे के क़ला-ए ज़ाल ज़िले में सुरक्षा बलों ने 20 चरमपंथियों को मार दिया. कहा जाता है कि इस हमले में आईएस के पांच चरमपंथी भी थे.

18 अप्रैलः जलालाबाद शहर में काबुल बैंक के बाहर हुए आत्मघाती हमलों की जिम्मेदारी संगठन ने ली है. इस हमले में कम से कम 33 लोग मारे गए और 100 घायल हुए. तालिबाान ने किसी तरह की भूमिका से इनकार किया.

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