पाकिस्तान को चुकानी होगी 'भारी क़ीमत'

यमन में जारी कार्रवाई में सऊदी अरब ने पाकिस्तान से मदद मांगी थी

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    • Author, अशोक कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

यमन के मुद्दे पर पाकिस्तान का 'धर्मसंकट' वहां लगातार उर्दू मीडिया की सुर्ख़ियों में है.

इस सिलसिले में शनिवार को लगभग सभी अख़बारों की पहली ख़बर संयुक्त अरब अमीरात के विदेश राज्यमंत्री अनवर मोहम्मद गरगाश की चेतावनी थी.

रोज़नामा दुनिया, औसाफ़, ख़बरें और एक्सप्रेस समेत कई अख़बारों के पहले पन्ने पर हेडलाइन एक ही जैसी थी- पाकिस्तान को अस्पष्ट रुख़ अपनाने की भारी क़ीमत चुकानी होगी: यूएई.

यूएई पाकिस्तानी संसद में पारित उस प्रस्ताव से नाराज़ है जिसमें सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन की मदद के लिए यमन में फौज भेजने से तो इनकार किया गया है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर सऊदी अरब की रक्षा का संकल्प जताया गया है.

रोज़नामा ख़बरें ने यूएई के मंत्री के हवाले से लिखा है कि यमन की जंग में शामिल छह खाड़ी देशों के साथ सहयोग करने के बारे में पाकिस्तान को रुख़ साफ़ करना चाहिए क्योंकि उसके मौजूदा प्रस्ताव से तो लगता है कि वो खाड़ी देशों के नहीं बल्कि ईरान के साथ है.

नवाए वक्त की रिपोर्ट में गरगाश के ट्वीट के हवाले से लिखा गया है - खाड़ी देश ख़तरनाक स्थिति से गुज़र रहे हैं और उनकी रणनीतिक सुरक्षा दांव पर लगी है, यही वो मौक़ा है जब असली साथियों का इम्तिहान होता है.

औसाफ़ की ख़बर में भी गरगाश की इस दो टूक टिप्पणी का ज़िक्र है कि पाकिस्तान को अपने मौजूदा रुख़ के लिए भारी क़ीमत चुकानी होगी.

'सही फ़ैसला'

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वहीं रोज़नामा एक्सप्रेस ने अपने संपादकीय में फ़िलहाल पाकिस्तानी सेना को न भेजने के क़दम को सही बताया है.

अख़बार के मुताबिक ये अंदेशा अपनी जगह मौजूद है कि अगर पाकिस्तान समेत अन्य इस्लामी देश भी इस लड़ाई में शामिल हो जाएं तो ये लड़ाई ख़त्म होने के बजाय शिया-सुन्नी संकट के रूप में और फैल जाएगी.

अख़बार की राय में अरब लीग और अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक संगठन की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो इस संकट को शांतिपूर्ण तरीके से हल कराएं.

वहीं नवाए वक़्त के संपादकीय में भी राजनयिक संपर्कों के ज़रिए इस मुद्दे को हल कराने के पाकिस्तान के सरकार के रुख़ को सराहा गया है.

जंग लिखता है कि इस संकट का असर मुस्लिम दुनिया की एकता और एकजुटता पर भी देखने को मिल रहा है क्योंकि इस्लाम विरोधी ताक़तें इसे सऊदी अरब और ईरान का परोक्ष युद्ध करार दे रही हैं और मुसलमानों को आपस में लड़ाने का सामान जमा कर रही हैं.

भारतीय अख़बार

रूख़ अगर भारत का करें तो हमारा समाज लिखता है कि पिछले दिनों आंध्र प्रदेश और तेलंगना में हुई मुठभेड़ों का सच सब जानना चाहते हैं. एक तरफ आंध्र प्रदेश में पुलिस ने 20 कथित चंदन तस्करों का मारने का दावा किया तो तेलंगाना में कथित तौर पर पांच मुसलमानों को मार दिया गया.

अख़बार के मुताबिक जहां पांच मुसलमानों की मौत पर मुस्लिम संगठन अदालत का रूख करने वाले हैं वहीं आंध्र प्रदेश में 20 लोगों का मारा जाना और वहां 200 लोगों की मौजूदगी के बावजूद कोई गिरफ़्तारी न होना सवाल खड़े करता है.

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