पाकिस्तानी नागरिक पर अमरीका में मुकदमा

एफ़बीआई

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    • Author, सलीम रिज़वी
    • पदनाम, न्यूयॉर्क से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

पाकिस्तानी मूल के एक अमरीकी को चरमपंथियों की सहायता करने के आरोप में पाकिस्तान से अमरीका लाया गया है और उस पर मुकद्दमा चलाया जा रहा है.

अमरीकी जांच संस्था एफ़बीआई ने न्यूयॉर्क में संघीय अदालत में महमूद फारेक नाम के अमरीकी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है.

आरोप पत्र में कहा गया है कि फारेक ने पाकिस्तान में अन्य लोगों के साथ मिलकर चरमपंथियों को मदद करने की साज़िश रची.

चरमपंथियों की मदद

एफबीआई लोगो

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अदालती दस्तावेज़ के मुताबिक महमूद फारेक ने चरमपंथी हमलों के लिए लोग मुहैया कराने की भी कोशिश की जिससे अमरीकी फौजियों और आम लोगों को हमले का निशाना बनाया जा सके.

अमरीकी सरकारी वकील लारेटा लिंच ने महमूद फारेक की गिरफ़्तारी पर कहा, “आज की गिरफ्त़ारी यह दर्शाती है कि वह अमरीकी नागरिक जो अमरीका या आम लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए चरमपंथियों की मदद करेंगे वह कानून की गिरफ़्त से बच नहीं सकते. हम ऐसे लोगों को कानून के कटघरे में लाने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ेंगे.”

एफ़बीआई का कहना है कि फारेक ने चरमपंथियों की मदद इस इरादे से की थी कि वह भी 'शहीद' हो जाएगा.

कनाडा से पाकिस्तान

पाकिस्तानी सेना

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तानी सेना मार्च करते हुए.

अदालती दस्तावेज़ के मुताबिक, सन 2007 में फारेक, फरीद इमाम नाम का एक व्यक्ति और इनका एक अन्य साथी कनाडा से पाकिस्तान इसी इरादे से गए थे कि वहां अमरीकी फौजियों के खिलाफ लड़ाई करें.

दस्तावेज़ के मुताबिक, "उन्होंने अपने परिवार को भी कुछ नहीं बताया था. और पाकिस्तान पहुंचने के बाद एक दोस्त को कनाडा में फोन करके बता दिया था कि अब वह लोग कभी वापस नहीं आएंगे और वह शहीद होना चाहते हैं."

अगर फारेक के खिलाफ़ आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो उनको 15 साल तक की कैद की सजा हो सकती है.

दो महिलाएं गिरफ्तार

पुलिस

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गुरुवार को ही न्यूयॉर्क में चरमपंथ से जुड़े दूसरे अहम मामले में इस्लामिक स्टेट समर्थित दो अमरीकी महिलाओं को भी एफ़बीआई ने गिरफ्तार किया है. इन महिलाओं पर आरोप है कि वह अमरीका में आम लोगों और पुलिसवालों को महाविनाश के हथियारों का निशाना बनाना चाहती थीं.

अदालती दस्तावेज़ के मुताबिक, 27 वर्षीय नोएले वेलांसास और 31 वर्षीय आसिया सिद्दीकी ने कई प्रोपेन टैंक (सिलिंडर) इकठ्ठा कर लिए थे जिससे वह बम बनाकर धमाका करना चाहती थीं. इन दोनों के पास बम बनाने के तरीके भी मौजूद थे.

एफ़बीआई इन दोनों पर करीब एक साल से नज़र रखी हुए थी. दोनों के फोन औऱ टेक्स्ट मैसेज की भी निगरानी होती रही थी.

सहायक एटर्नी जनरल जॉन कार्लिन ने कहा, “वेलेंसास और सिद्दीकी ने अमरीका के अंदर महाविनाश के हथियारों को इस्तोमाल करने की साज़िश रची. देश के अंदर या बाहर, अमरीकी लोगों की जान और संपत्ति को ऐसे हमलों से सुरक्षित रखना हमारी प्राथमिकता है. ”

हमले की साजिश

एफबीआई पिस्तौल

अदालती दस्तावेज़ के अनुसार, "क्वींस के इलाके में रहने वाली इन दोंनों महिलाओं ने आईएस या आईसिस नामक चरमपंथी गुट के साथ जुड़ने की ख्वाहिश जताई थी."

और वो न्यूयॉर्क के हेरल्ड स्क्वायर जैसे भीड़ भाड़ वाले इलाकों में बम से हमला करना चाहती थीं जिससे अधिक से अधिक लोगों को निशाना बनाया जा सके.

इसके अलावा उनका इरादा मृत पुलिसवालों के अंतिम संस्कार में भी हमला करना था.

दस्तावेज़ के मुताबिक आसिया सिद्दीकी बॉस्टन शहर में बम धमाकों में प्रयोग किए गए प्रेशर कूकर को बम बनाकर प्रयोग करने के लिए आतुर थी.

अदालती दस्तावेज़ में कहा गया है कि यह दोनों महिलाएं अल कायदा के मृत चरमपंथी सरगना ओसामा बिन लादेन को हीरो मानती हैं. और यह अपने को आईएस या इस्लामिक स्टेट का नागरिक मानती हैं. इन दोनों महिलाओं का एक मकसद यह भी था कि वह इतिहास बनाएं.

कई मामले

पिस्तौल

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अमरीका में आईएस या इस्लामिक स्टेट से प्रभावित होकर हमला करने की साज़िश रचने के लिए हाल में कई लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

एक आंकड़े के मुताबिक देश में पिछले 18 महीनों में क़रीब 30 ऐसे मामले सामने आए हैं.

अमरीकी सरकार का कहना है कि अमरीका से 100 से अधिक अमरीकी इराक और सीरिया में आईएस या इस्लामिक स्टेट के साथ मिलकर लड़ने के लिए गए हुए हैं.

अगर इन दोनों महिलाओं के खिलाफ़ आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो उन्हें उम्र कैद की सज़ा हो सकती है.

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