फ़ोन, आई पैड के बाद, एप्पल की कार?

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    • Author, जैक स्टीवर्ट
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

इस समय ये केवल कयास भर हैं और इसको लेकर खूब सारे अफ़वाह भी चल रहे हैं. ये अफ़वाह दुनिया भर में अपने लैपटॉप, आईपैड, आई पॉड और आईफोन से धूम मचाने वाली कंपनी एप्पल से जुड़ी है.

इस अफ़वाह के मुताबिक एप्पल अब कार भी बनाएगी. वैसे हकीकत यही है कि एप्पल को लेकर ये अफ़वाह कोई पहली बार नहीं उड़ी है. पहले भी ऐसी रिपोर्ट्स आ चुकी हैं जिनके मुताबिक एप्पल अपने यहां इंजीनियरों की नियुक्तियां कर रहा है, वो भी कार की बैटरियां बनाने के लिए.

एप्पल गोपनीय ढंग से कार बनाने पर काम कर रहा है, इस प्रोजेक्ट के बारे में पहले भी कयास लगते रहे हैं.

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इस बार ब्लूमबर्ग का दावा है कि कंप्यूटर क्षेत्र की दिग्गज कंपनी 2020 तक कार का उत्पादन शुरू कर देगी. इसके अलावा टेक ब्लॉगर ग्रुबर ने पहले तो इसे खारिज किया था, लेकिन बाद में अपनी राय बदल ली है.

कुछ ना कुछ सच्चाई

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ग्रुबर ने अपनी राय तब बदली जब उन्हें पता चला कि एप्पल ने काफ़ी लोगों की नियुक्तियां की हैं. ग्रुबर ने बताया, "पहले तो मैं इसे अफ़वाह ही मान रहा था लेकिन जहां आग होती है वहीं धुआं उठता है. और अचानक से हवा में धुआं काफ़ी तेजी से बढ़ गया है."

वहीं कुछ विश्लेषक के मुताबिक आने वाले दिनों में कार नया स्मार्टफ़ोन साबित होने वाला है. इसी साल लास वेगास में आयोजित कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स शो के दौरान कार निर्माताओं ने जिस तरह के मॉडल पेश किए हैं उससे इसके संकेत मिलते हैं.

ड्रेट्रायट ऑटो शो से कुछ ऐसा ही ज़ाहिर हुआ था. इस शो से साफ़ है कि आने वाले दिन कार की तकनीक और ड्राइविंग टेक्नॉलॉजी की दुनिया में काफ़ी बदलाव होंगे.

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एमआईटी ऐजलैब के रिसर्च साइंटिस्ट और न्यू इंग्लैंड यूनिवर्सिटी ट्रांसपोर्टेशन के एसोसिएट डायरेक्टर ब्रायन रेमर का कहना है, "आने वाले दिनों में मोबिलिटी और परिवहन की दुनिया में काफ़ी बदलाव होंगे जो शुरू हो चुके हैं."

ब्रायन रेमर की विशेषज्ञता परिवहन, सुरक्षा और चालक से जुड़े मसले पर है. यानी कार और उसे चलाने वाले के व्यवहार पर उनकी पैनी नज़र है.

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वे कहते हैं, "कार ओनरशिप मॉडल्स में आने वाले कुछ सालों में काफ़ी बदलाव होने वाले हैं. मोबिलिटी के नजरिए से कार शेयरिंग सेवा का जोर बढ़ेगा. कार कंपनियां उबर और गूगल जैसी सेवाओं के बढ़ते महत्व को ध्यान में रख रही हैं."

एप्पल से उम्मीद

रेमर मानते हैं कि एप्पल ऐसे कंज्यूमर प्रॉडक्ट बनाने के लिए मशहूर है जो लोगों को खूब पसंद आते हैं, ऐसे में कार निर्माण क्षेत्र में भी वे कुछ अलग कर सकते हैं. रेमर ने कहा, "एप्पल अगर कार निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा तो अपनी क्षमता और वित्तीय स्थिति के चलते वे कुछ अलग कर सकते हैं."

हालांकि गूगल के अनुभव से हम जानते हैं कि कार बनाना इतना आसान भी नहीं है. बीबीसी फ्यूचर की टीम ने पिछले साल गूगल के लैब का दौरा करके ये पाया था कि चलाने लायक कार बनाने में कई साल तक उसके रिसर्च और डेवलपमेंट में लगते हैं.

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गूगल की बेहतरीन दिखने वाली कार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. उसमें मैनुएल कंट्रोल के सिस्टम को शामिल करना पड़ा जबकि मूल डिज़ाइन में कार को केवल एक बटन से चलने वाला डिज़ाइन किया गया था.

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इंस्टीट्यूट ऑफ़ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियर्स के सदस्य और दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग प्रैक्टिस के प्रोफ़ेसर जेफ़्री मिलर ने कहा, "एप्पल कार के बाज़ार में दिलचस्पी दिखाए, इसकी संभावना मुझे नहीं दिखती."

गूगल को चुनौती

हालांकि मिलर मानते हैं कि एप्पल वाहनों के लिए उत्पाद बनाने में दिलचस्पी दिखा सकती है लेकिन खुद ही वाहन बनाने में शायद दिलचस्पी नहीं ले.

मिलर कहते हैं, "गूगल ने जिस तरह से कार कंपनियों के साथ मिलकर सेल्फ़ ड्राइविंग सोल्यूशन बनाने का काम शुरू किया, एप्पल भी इसी तरह के सोल्यूशंस बना सकता है और दूसरे फ़ीचरों के ज़रिए गूगल को चुनौती दे सकता है."

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मिलर ये भी बताते हैं, "एंड्रायड और आईओएस के लेवल पर गूगल और एप्पल एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. दोनों सॉफ़्टवेयर कंपनियां हैं और स्मार्ट इंजीनियरों की बदलौत दोनों चालकरहित वाहन के बाज़ार में आ सकती हैं."

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हालांकि इस राह में तकनीकी चुनौतियां सामने हैं. मिलर वीकल टू वीकल और वीकल टू इंफ्रास्ट्रक्चर कम्यूनिकेशन पर दशकों से काम कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, "सड़क की चुनौतियों की पहचान के लिहाज से कंप्यूटर विजन में सुधार की जरूरत है. फ़ैसला तो दी गई सूचनाओं के आधार पर होगा और कानूनी प्रावधान का भी ध्यान रखना होगा. हालांकि बड़े कारपोरेट समूह को छोटे समूह की तुलना में ऐसे फ़ैसले लेने में आसानी होती है."

जब आएगी आई कार?

लेकिन ये चुनौती यहीं खत्म नहीं होती. रेमर कहते हैं, "एप्पल के साथ मुश्किल ये है कि अभी तक रेगुलेटेड एनवायरनमेंट में काम करने का मौका नहीं मिला है." रेमर के मुताबिक कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री और ऑटोमोटिव सेक्टर काफ़ी अलग है और अलग अलग देशों में इसके लिए अलग अलग कानून होते हैं.

रेमर कहते हैं, "हालांकि संभावनाएं हैं, लेकिन सवाल यही है कि वे ऑपरेटिंग स्पेस को लेकर किस तरह रिएक्ट करते हैं."

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एप्पल की पहचान बाजार में औसत उत्पाद के बजाए परफैक्ट उत्पाद के साथ पहुंचने की रही है. एक कंपनी के तौर पर एप्पल लीडर बनने के बजाए इंतज़ार करके बेहतरीन डिज़ाइन वाला उत्पाद बनाने वाली कंपनी है.

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एप्पल इसी नजरिए से कार बनाएगी. हालांकि ये काफ़ी प्रतिस्पर्धी है. हालांकि एक रास्ता ये भी हो सकता है कि कंपनी किसी परंपरागत कार निर्माण यूनिट को ख़रीद ले और उसे अत्याधुनिक बनाए.

कुछ भी असभंव नहीं है. हो सकता है कि आई कार के लिए लोग उसी तरह डीलरों के बाहर कैंप लगाएं जैसे, अत्याधुनिक आई फ़ोन के लिए अभी लगती है.

<bold><italic>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20150220-could-apple-really-make-cars" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</italic></bold>

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