क्या राष्ट्रपति ओबामा को अमरीका से प्यार है?

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
वैलेंटाइंस डे को गुज़रे एक दो हफ़्ते हो गए लेकिन अमरीका में अभी भी प्यार-मोहब्बत की बहस छिड़ी हुई है. और वो भी राष्ट्रपति ओबामा को लेकर.
ये मामला किसी ऐसे वैसे प्रेम का नहीं, देश प्रेम का है. न्यूयॉर्क के मेयर रह चुके रूडी जूलियानी ने पिछले दिनों बयान दिया, “मैं जानता हूं कि ये काफ़ी कड़वी बात है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि राष्ट्रपति को अमरीका से प्यार है. वो आपसे नहीं प्यार करते, वो मुझसे नहीं प्यार करते. जिस तरह से आप और हम बड़े हुए हैं, इस देश को प्यार करते हुए, उनका पालन-पोषण वैसे हुआ ही नहीं है.”
प्यार पर सर्वे
इस बयान से सोशल मीडिया पर तो जो बावेला मचना था वो तो मचा ही, हफिंग्टन पोस्ट ने तो एक सर्वे भी करवा डाला कि ओबामा को अमरीका से प्यार है या नहीं. सैंतालीस प्रतिशत लोगों का कहना था कि प्यार है, बाकियों ने कहा प्यार नहीं है या फिर वो यकीन के साथ कुछ नहीं कह सकते.
बिल्कुल सही कहा है जूलियानी साहब ने और जो अमरीकी उनकी बात से सहमत हैं वो भी सही हैं.
अब चार जुलाई की परेड पर, जब अमरीका अपनी आज़ादी मनाता है, या फिर जंग में अमरीकियों के मारे जाने की ख़बर पर ओबामा को आंसू बहाते तो मैंने भी नहीं देखा.
बुश का देशप्रेम

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न ही मैने जूलियानी साहब को, जिन्होंने ग्यारह सितंबर के हमले के बाद न्यूयॉर्क को संभाला और खुद को सबसे बड़े देशभक्तों में शुमार करने लगे, कभी जॉर्ज डब्ल्यू बुश या डिक चेनी के देशप्रेम पर सवाल उठाते सुना.
अब इराक़ में बुश और चेनी के फ़ैसले से कुछ अमरीकी मर गए, उनकी हुकू्मत के दौरान अमरीकी बैंकों में इतने बड़े घोटाले हुए कि दुनिया में आर्थिक मंदी आ गई तो क्या हुआ. जिस तरह बुश सीने पर हाथ रखकर अमरीकी झंडे के सामने खड़े होते थे उसकी बात ही कुछ और थी, ओबामा तो बिल्कुल अनमने से नज़र आते हैं.
तो जूलियानी साहब जो कह रहे हैं ठीक ही कह रहे होंगे.
प्रेम के मायने

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इतना ही नहीं ओबामा ईरान से समझौते की कोशिश कर रहे हैं, क्यूबा पर बरसों से लगे प्रतिबंध हटाकर दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं, सीरिया के बशर अल असद के खिलाफ़ हैं लेकिन उन पर बम नहीं बरसा रहे हैं, क्या कोई भी राष्ट्रपति जिसे अमरीका से प्रेम है वो ऐसा कर सकता था?

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और तो और कुछ दिनों पहले उन्होंने चरमपंथ पर एक कांफ़्रेंस किया लेकिन उसे इस्लामी चरमपंथ नहीं कहा और ऊपर से लेक्चर दे डाला कि चरमपंथ हर धर्म में रहा है. मिस्र में जाकर कह दिया कि अमरीका को इस्लामी दुनिया के साथ एक नई शुरूआत करनी होगी जिसमें एक दूसरे की इज़्ज़त की जाए, एक दूसरे का फ़ायदा देखा जाए. क्या कोई भी राष्ट्रपति जिसे अमरीका से प्रेम है वो ऐसा कह सकता था?
उन्होंने सरेआम ये भी कह दिया कि अमरीका को सही मायने में दुनिया का नेता बनना है तो उसे मिसाल कायम करनी होगी, काले-गोरे-भूरे का फ़र्क खत्म करना होगा, मर्द और औरत को एक जैसी तनख्वाह देनी होगी, जो लाखों लोग बरसों से अमरीका में ग़ैर-कानूनी तरीके से रह रहे हैं उनमें से बहुतों को अपनाना होगा. क्या कोई भी राष्ट्रपति जिसे अमरीका से प्रेम है वो ऐसा कह सकता था?
प्रेम का फॉर्मूला

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ये सारी बातें अमरीका में देशप्रेम के फ़ार्मूले में फ़िट बैठती ही नहीं हैं. आठ-नौ साल पहले एक सर्वे हुआ था जिसमें पाया गया कि अमरीकियों का मानना है कि दुनिया भर में वो सबसे ज़्यादा देशभक्त हैं. 2011 में एक और सर्वे हुआ जिसमें पाया गया कि स्पेन, फ़्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के मुक़ाबले अमरीकी ये कहने में सबसे आगे होंगे कि हमारी संस्कृति दुनिया में सबसे बेहतर है.
अब ऐसे माहौल में ओबामा जिस तरह की बातें कर रहे हैं तो लोगों का शक होना तो लाज़िमी है.

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सही मायने में तो वही राष्ट्रपति अमरीका से प्रेम करता है जो एंपायर स्टेट बिल्डिंग पर चढ़कर गाए, “मैं दुनिया हिला दूंगा...तेरी चाहत में.”
दरअसल, न्यूयॉर्कर पत्रिका में कॉलम लिखने वाले ऐंडी बोरोवित्ज़ की मानें तो ओबामा को अपने हफ़्तेवार रेडियो भाषण में कुछ यूं कहना चाहिए: “ मुझे अमरीका से बेहद प्यार है--उसके जाहिलों से भी. अमरीका हर तरह के लोगों से बना है, बच्चे-बूढ़े, ताकतवर-कमज़ोर, दिमागवाले और बिना दिमागवाले. और जब बिना दिमागवाले कुछ बोलते हैं, बेवकूफ़ों की तरह बर्ताव करते हैं तब भी मैं उनसे प्यार करता हूं क्योंकि वो अमरीका का हिस्सा हैं. सच मानिए तो बहुत बड़ा हिस्सा.”
गॉड ब्लेस अमेरिका.
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