अफ़ग़ानिस्तान: जख़्म अभी भरे नहीं

- Author, संजॉय मजूमदार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, काबुल से
पिछले साल दिसंबर में अमरीकी सीनेट ने हिरासत में लिए गए अल क़ायदा के संदिग्धों से सीआईए की पूछताछ की रिपोर्ट जारी की थी.
हिरासत के दौरान संदिग्धों को प्रताड़ित भी किया गया था. इन संदिग्धों को विभिन्न जेलों में रखा गया था जिनमें बगराम जेल भी शामिल थी.
मैंने साल 2010 में बगराम जेल से छूटे दो बंदियों से बात की.
मैं एक सर्द सुबह नियाज़ गुल और सरदार ख़ान से काबुल के नज़दीक एक पार्क में मिला. यह पार्क एक सुनसान इलाक़े में था. शायद ही कोई इसके बारे में जानता हो.
दोनों पूर्वी कुनार प्रांत से आए थे और रातभर के सफ़र के बाद काबुल पहुंचे थे.
दोनों शख़्स 30 साल से कुछ अधिक के थे लेकिन देखने में उम्रदराज लगते थे. चार साल पहले वे बगराम जेल से छूटे थे. बगराम जेल काबुल के उत्तर में स्थित है.
आपबीती

चाय की चुस्की के साथ दोनों ने मुझे अपनी आपबीती बताई.
नियाज़ गुल ने बताया, "मैं आधी रात को उस वक़्त सोया हुआ था जब अमरीकी फ़ौज मेरे घर में घुसी थी."
उन्हें उनके भाई और पिता के साथ गिरफ्तार किया गया था.
उन्होंने बताया, "हमारे हाथ पीछे की ओर बंधे हुए थे. हमें गाड़ी में बैठाया गया और फ़ौज के कैंप में ले जाया गया. तब हमें वहां से बगराम लाया गया."
सरदार ख़ान को भी उनके घर से अमरीकी फ़ौज ने उठाया था.
उन्होंने अपने माथे को दिखाते हुए बताया, "मेरे सिर को दीवार पर ज़ोर से पटका गया. जब मुझे गाड़ी में बांध कर डाला गया तो मेरे माथे से खून बह रहा था."
कुनार प्रांत पाकिस्तान सीमा पर स्थित है. वहां तालिबान और अल क़ायदा के चरमपंथी काफ़ी सक्रिय है. अकसर वहां फ़ौज और विद्रोहियों में मुठभेड़ होती रहती है.
सरदार ख़ान ने बताया, "उन्होंने मुझ पर नेटो फ़ौज पर गोली चलाने का आरोप लगाया. यह सच नहीं था और ग़लत सूचना पर आधारित था."
बेगुनाही

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सरदार ख़ान को भी बगराम जेल ले जाया गया जहां उन्हें अगले 18 महीने तक हिरासत में रखा गया.
उन्होंने आगे बताया, "वे मेरे ऊपर लगे आरोप को कभी साबित नहीं कर पाए. इसलिए उन्हें मुझे आख़िरकार छोड़ना पड़ा."
इन्हें कभी-कभी अलग छोटी कोठरियों में रखा गया तो कभी सबके साथ बड़े क़ैदखाने में.
सरदार बताते है कि उनसे लगातार पूछताछ की गई.
उन्होंने बताया, "हम जब सोना चाहते थे तो वे तेज़ आवाज़ में संगीत बजाते थे. वे हमें आराम नहीं करने देते थे."
नियाज़ उस अनुभव को याद करके सिहर उठे.
उन्होंने बताया, "हमें बहुत छोटी सी जगह पर रखा जाता था. हमें पता नहीं चलता था कि दिन है या रात. वे हमें टॉयलेट नहीं जाने देते थे. कई क़ैदी अपने कपड़ों में पेशाब कर देते थे."
कभी उन्हें बहुत ठंडे पानी तो कभी बहुत गर्म पानी से नहाने के लिए मज़बूर किया जाता था.
सदमा

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नियाज़ कहते हैं, "हमें सज़ा देने के लिए वे हमें एयरकंडीशन कमरे में डाल देते थे और कंबल छीन लेते थे. हम ठंड से जमने लगते थे."
दोनों ने अक्सर दूसरे क़ैदियों को अपने ऊपर होने वाले जुल्मो सितम के बारे में बाते करते हुए सुना.
बेगुनाह साबित होने से पहले नियाज़ गुल ने बगराम जेल में 22 महीने बिताए. लेकिन उन दोनों के लिए ज़िंदगी अब इतनी आसान नहीं रही.
दोनों का कहना है कि वे मानसिक सदमे और अक्सर होने वाले सिरदर्द से गुजर रहे हैं.
नियाज़ कहते हैं, "मैं अब अपने परिवार और दूसरों पर जल्दी ग़ुस्सा हो जाता हूं. मेरी ज़िंदगी अस्त-व्यस्त हो गई है."
बातचीत के बाद नियाज़ और सरदार ने हाथ मिलाया और मुझे अफ़ग़ानी सलीके के साथ गले से लगा लिया. उसके बाद वे चले गए.
दोनों ने क़रीब-क़रीब दो साल हिरासत में गुजारे. वे अब ये जानना चाहते हैं कि क्यों उन्हें ले जाया गया था और उनके साथ जो कुछ गुजरा उसके लिए कौन ज़िम्मेदार है.
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