दलाई लामा ने माना हो सकते हैं आख़िरी गुरु

दलाई लामा हो सकतो हैं आख़िरी गुरु

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तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने स्वीकार किया कि हो सकता है ये उपाधि पाने वाले वो आख़िरी व्यक्ति हों.

79 साल के दलाई लामा ने बीबीसी से कहा कि सदियों पुरानी परंपरा को 'लोकप्रिय दलाई लामा के समय में' समाप्त कर देना बेहतर होगा.

बीबीसी के न्यूज़नाइट कार्यक्रम में एक <link type="page"><caption> विस्तृत साक्षात्कार</caption><url href="http://www.bbc.com/news/world-asia-china-30510018" platform="highweb"/></link> में दलाई लामा ने कहा कि उनके बाद कोई और दलाई लामा की उपाधि संभालेगा या नहीं ये इस पर निर्भर करेगा कि उनकी मृत्यु के समय कैसी परिस्थितियां रहती हैं और तिब्बत के लोगों पर भी.

हालांकि चीन अक्सर कहता रहा है कि वो अगले दलाई लामा को चुनेगा.

इस बयान को दलाई लामा की उन कोशिशों का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत ये सुनिश्चित किया जाए कि तिब्बती समुदाय का एक चुना हुआ नेता हो जो चीन के प्रभाव से बाहर हो.

नोबेल का शांति पुरस्कार पाने वाले दलाई लामा को चीन 'विभाजन करने वाली' हस्ती मानता रहा है, लेकिन अब दलाई लामा चीन के साथ बीच का रास्ता अपनाने की बात करते हैं. इसके तहत वो तिब्बत के लिए आज़ादी नहीं बल्कि स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं.

दलाई लामा 1959 में उस समय भाग कर भारत आ गए थे जब तिब्बत में विद्रोह की कोशिश को चीन ने दबा दिया था.

नैतिक ज़िम्मेदारी

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दलाई लामा के अनुसार ब्रिटेन ने हांगकांग में चल रहे लोकतंत्र समर्थक विरोध पर चीन के प्रति वित्तीय कारणों की वजह से नरम रवैया अपनाया है.

उन्होंने ये भी कहा कि चीन में लोकतंत्र का समर्थन करने के लिए वैश्विक स्तर पर कोशिशें की जानी चाहिए.

दलाई लामा का कहना था,''चीन वैश्विक अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में शामिल होना चाहता है. उनका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन दुनिया के सभी आज़ाद देशों की ये नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वो चीन को लोकतंत्र की मुख्यधारा में शामिल करें, ये चीन के हित में होगा.''

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