दलाई लामा पर अमरीका को चीन की चेतावनी

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अमरीकी अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रपति बराक ओबामा तिब्बती धार्मिक गुरू दलाई लामा से शुक्रवार को व्हाइट हाउस में मिलेंगे.

चीन ने अमरीका को यह कहते हुए मुलाकात रद्द करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि इस मुलाकात का असर चीन और अमरीका के बीच संबंधों पर गंभीर रूप से पड़ेगा.

चीन दलाई लामा को अलगाववादी नेता के रूप में देखता है जबकि इस अध्यात्मिक नेता का कहना है कि वे केवल तिब्बत के लिए अधिक स्वायत्तता की बात करते हैं ना कि आजादी की.

अधिकारियों का कहना है कि अमरीका तिब्बत की आजादी का समर्थन नहीं करता है लेकिन चीन में मानवाधिकारों को लेकर चिंतित जरूर है.

इन दोनों की मुलाकात पिछली बार 2011 में हुई थी जिसने चीन को नाराज़ कर दिया था. चीन में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के रूप में शासित होता है.

तिब्बत में राजनीति और धार्मिक स्वतंत्रता को दबाने का इल्ज़ाम चीन पर लगता रहा है. चीन इन आरोपों से इनकार करता रहा है और कहता है कि आर्थिक विकास तिब्बती लोगों के जीवन में सुधार लाया है.

अमरीकी अधिकारियों ने कहा कि ओबामा शुक्रवार की सुबह व्हाइट हाउस के मैप रूम में एक निजी मुलाकात में दलाई लामा की मेजबानी करेंगे.

परंपरागत रूप से ओबामा विदेशी नेताओं से ओवल ऑफ़िस में मुलाकात करते हैं इसलिए इसकी जगह मैप रूम का इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि मुलाकात को कम महत्व देने की कोशिश की गई है.

सम्मानित नेता

चीनी सरकार दलाई लामा पर विरोध भड़काने का आरोप लगाता रहा है.

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राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की प्रवक्ता कैटलीन हैडेन ने कहा कि ओबामा, दलाई लामा से अंतरराष्ट्रीय स्तर के धार्मिक और सांस्कृतिक नेता के तौर पर मिलेंगे.

उन्होंने आगे कहा, "हम तिब्बत के आजादी के समर्थक नहीं है लेकिन चीन में मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता का मजबूती के साथ समर्थन करते हैं. हम चीन के तिब्बती क्षेत्र में बढते तनाव और मानव अधिकारों के स्थिति में गिरावट से चिंतित है."

इस बीच चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चनींग ने कहा, "चीन कठोरता से इस बैठक का विरोध करता है. "

उन्होंने एक बयान में कहा, "दलाई लामा के साथ अमरीकी नेता की मुलाकात चीन के आंतरिक मामलों में एक घोर हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कोड का एक गंभीर उल्लंघन है और इससे चीन और अमरीका के संबंध गंभीर रूप से ख़राब होंगे,".

हाल के वर्षों में 110 से अधिक तिब्बतियों जिसमें ज्यादातर युवा भिक्षुओं और तिब्बत के बाहर के क्षेत्रों में रहने वाले नन थे, बीजिंग के शासन के खिलाफ विरोधस्वरूप आत्मदाह किया है.

चीनी सरकार दलाई लामा पर विरोध भड़काने का आरोप लगाता रहा है जिसे वे खारिज करते रहे हैं.

चीनी सैनिकों के तिब्बत में विद्रोह कुचलने की कोशिश किए जाने के बाद दलाई लामा 1959 में भारत आ गए थे.

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