अरब क्रांति के गढ़ में चुनाव

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2011 की अरब क्रांति के बाद पहली बार ट्यूनीशिया में राष्ट्रपति चुनाव के लिए रविवार को मतदान हो रहा है.
राष्ट्रपति पद की दौड़ में 25 से अधिक उम्मीदवार हैं, लेकिन निवर्तमान राष्ट्रपति मोनसेफ़ मारजोकी और इस्लामी विरोधी नेता बेज़ी कैड एसेबसी दौड़ में आगे देखे जा रहे हैं.
ज़ीन अल आबेदीन बेन अली के सत्ता से बेदख़ल होने के बाद यह चुनाव देश में राजनीतिक बदलाव का वाहक है.
संसदीय चुनाव पिछले अक्टूबर में हुए थे.

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अरब क्रांति की शुरुआत ट्यूनीशिया से ही हुई थी और इसके बाद वह कई अरब देशों में फैली.
इस चुनाव में 50 लाख से अधिक मतदाता अपने नेता का चुनाव करेंगे. बेन अली के अपदस्थ होने के बाद पहली बार होगा जब निर्वाचित नेता देश की कमान संभालेंगे.
यदि उम्मीदवार 50 प्रतिशत से अधिक मत हासिल नहीं कर पाते तो 31 दिसंबर को एक और दौर का चुनाव होगा.
'हम पहले होंगे'

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प्रधानमंत्री मेहदी जोमा के हवाले से कहा गया है, "परिवर्तन की इस प्रक्रिया में शामिल होने वाले हम पहले होंगे. सत्ता परिवर्तन के संक्रमण से आगे जाने में हमारा स्थान पहला होगा और बाक़ी लोग अनुकरण करेंगे."
एसेबसी की पार्टी निदा टोन्स (ट्यूनीशियाज़ कॉल) के इस चुनाव में जीतने की संभावना ज़्यादा है.
दो साल पुरानी यह पार्टी पिछले संसदीय चुनाव में पहले स्थान पर आई थी.
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