पाकः थर में कब तक भूख से मरते रहेंगे बच्चे

- Author, रियाज़ सुहैल
- पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता
पाकिस्तान के सिंध सूबे का थरपारकर ज़िला पिछड़ेपन, ग़रीबी और सूखे का शिकार रहा है.
इस ज़िले हिंदुओं की अच्छी खासी आबादी है और मेघवाड़ जनजाति के लोग बड़ी तादाद में रहते हैं. कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त थरपारकर में 80 फीसदी हिंदू रहते थे.
थरपारकर इन दिनों अकाल से जूझ रहा है और इसके प्रभावित रेगिस्तानी इलाके थर में बच्चों की मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इसके साथ ही यह विवाद भी जारी है कि कुल कितनी मौतें हुई हैं.
सरकारी अधिकारी मरने वाले बच्चों की संख्या 293 बताते हैं जबकि स्थानीय मीडिया के अनुसार यह संख्या 506 है जो हर रोज होने वाली मौतों के मामले में नाम और पते के साथ खबर दे रहा है.
भूख से मौत

इमेज स्रोत, epa
थरपाकर के डिप्टी कमिश्नर आसिफ जमील कहते हैं दो दिसंबर, 2013 से लेकर 17 नवंबर, 2014 तक पांच साल से कम उम्र के 293 बच्चों की मौत हुई है.
आसिफ जमील बताते हैं कि जब मौत के मामलों की राजस्व विभाग की ओर से पुष्टि कराई गई तो 220 बच्चों के परिजनों का संबंध थर से था.
उन्होंने कहा, "अब मुआवज़ा दिया जाएगा तो कई अन्य दिक्कतें सामने आएंगी. अगर बच्चे की हालत चिंताजनक है तो भी उसे अस्पताल ले लाया जाएगा और अगर बच्चा मर गया तो भी उसकी मौत तो दर्ज होगी ही और इसके बदले में कुछ न कुछ मुआवज़ा मिल जाएगा."
थार के डिप्टी कमिश्नर ने पुष्टि की है कि सात बच्चों की मौत खाने की कमी के कारण हुई है. उल्लेखनीय है कि सिंध के मुख्यमंत्री सैयद कायम अली शाह प्रांतीय विधानसभा में यह दावा कर चुके हैं कि एक बच्चे की मौत भूख से नहीं हुई है.
थार के स्वास्थ्य विभाग के जिला अधिकारी डॉक्टर अब्दुल जलील भरगड़ी का कहना है कि इस महीने 20 बच्चों की मौत हो चुकी है जबकि जनवरी से लेकर अक्तूबर तक यह संख्या 258 थी.
मौत के कारण

डॉक्टर जलील भरगड़ी नवजात बच्चों की हत्याओं के चार कारण बताते हैं. सबसे पहले कम वजन, समय से पहले जन्म, नवजात बच्चों को सांस लेने की तकलीफ और चौथा प्रसव के समय सफाई का ख्याल नहीं रखना.
उन्होंने खाने की कमी को स्वीकार किया और कहा कि मां का स्वास्थ्य अच्छा नहीं होगा तो निश्चित रूप से बच्चा कमजोर पैदा होगा.
वे कहते हैं कि जब बारश नहीं होतीं और अकाल पड़ जाए तो उचित आहार नहीं मिलता जिसकी वजह से मां कमजोर होती है. सरकार के पास केवल अस्पतालों में मरने वाले बच्चों के बारे में जानकारी है.
डॉक्टर अब्दुल जलील का कहना है कि घरों में मरने वाले बच्चों की संख्या बहुत कम होगी.
अनाज वितरण

याद रहे कि थर से प्रांतीय विधानसभा के सदस्य महेश मलानी ने दावा किया था कि जिला अस्पताल में इस साल साढ़े तीन लाख मरीजों का निरीक्षण किया गया.
सरकारी रिकॉर्ड्स के अनुसार मिठी ज़िला अस्पताल से तीन सौ से अधिक बच्चे अन्य शहरों के अस्पतालों की ओर भी रेफर किए गए. इनमें से कुछ की हैदराबाद में मौत हुई लेकिन यह संख्या जिला प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है.
सरकार की ओर से थर में अनाज के मुफ्त वितरण का चौथा चरण जारी है, जिसमें दो लाख 58 हजार में से 2,44 हजार परिवारों में 50 किलोग्राम गेहूं वितरित कर दिया गया है.
हेल्थ चेकअप

अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए एक गैर सरकारी संस्था गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को अतिरिक्त खुराक दे रही है.
उपायुक्त आसिफ जमील के अनुसार गैर सरकारी संस्थाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं का डेटाबेस बनाया जाएगा क्योंकि नवजात बच्चों की जो मौतें होती हैं, इसकी एक वजह इन गर्भवती महिलाओं का चेकअप न होना भी है.
डेटाबेस की तैयारी के बाद शीडयूल बनाया जाएगा ताकि लेडी हेल्थ वर्कर्स या लेडी डॉक्टर गर्भवती महिलाओं का चेकअप और पहचान करें कि कौन सी महिलाओं में स्वास्थ्य से संबंधित जटिलताओं हो सकती हैं.
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