'पूरे श्रीनगर में नहीं पहुँच पा रही है सेना'

श्रीनगर में अपने घर की छत से मदद की अपील करते लोग

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    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर से

जम्मू कश्मीर में आई विनाशकारी बाढ़ में एनडीआरएफ़, सेना और वायुसेना राहत और बचाव अभियान चला रही है. सैनिकों ने हज़ारों लोगों को वहाँ से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है.

सैनिक बाढ़ में फंसे लोगों को खाना, पीने का पानी और दवाइयां पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन बहुत से लोगों का आरोप है कि सेना अबतक उनतक नहीं पहुँची है.

लेफ़्टिनेंट जनरल पंकज विनायक ने इस बात को स्वीकार किया कि सेना श्रीनगर के सभी इलाक़ों में नहीं पहुँच पा रही है.

बिजली की क़िल्लत

उनका कहना है कि में बिजली और टेलीफ़ोन लाइनें काम नहीं कर रही हैं. इस वजह से राहत और बचाव के काम में बहुत सी दिक़्क़तें आ रही हैं.

उन्होंने कहा कि श्रीनगर चूंकी शहरी इलाक़ा है इसलिए वहाँ नाव चलाने में सेना के जवानों को दिक़्क़तें पेश आ रही हैं. उन्होंने कहा कि शहर के कई हिस्सों में पानी का बहाव अभी भी तेज़ है इसलिए वहाँ जवानों को भी जाने में परेशानी हो रही है.

उन्होंने कहा कि श्रीनगर में हुई मौतों की जानकारी में बेहतर जानकारी प्रशासन ही दे सकता है, हालांकि हमें अभी तक एक भी शव नज़र नहीं आया है.

श्रीनगर में राहत और बचाव कार्य में लगे सेना के जवान

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लेफ़्टिनेंट जनरल विनायक ने बताया कि सेना का पूरा ध्यान अभी लोगों को बचाने, उनके पास तक खाना-पानी और दवाइयां पहुँचाने पर है.

मृतकों की संख्या

प्रशासन जम्मू में क़रीब दो सौ मौतों की पुष्टि तो कर रहा है. लेकिन श्रीनगर में बाढ़ की वजह से हुई मौतों की जानकारी अभी नहीं मिल पा रही है. लेकिन जम्मू और श्रीनगर को मिलाकर क़रीब 250 लोगों के मरने की आशंका जताई जा रही है.

श्रीनगर में अपने नवजात बच्चे के साथ बाढ़ के पानी से गुजरता एक व्यक्ति

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वहीं लोग अपने सगे-संबंधियों की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं. श्रीनगर में हमें मिले इरशाद अहमद. उन्होंने बताया कि उनकी गर्भवती बहन का प्रसव होना था. उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन जब वो वहाँ गए तो पचा चला कि अस्पताल में पानी भरा है और मरीज़ों को निकाल दिया गया है.

उन्होंने बताया कि अबतक वो कई अस्पतालों में अपने बहन-बहनोई की तलाश कर चुके हैं. लेकिन उनका पता नहीं चल पा रहा है. इससे वो काफ़ी चिंतित हैं.

वहीं बिहार के मधुबनी ज़िले के निवासी साहू का रो-रोकर बुरा हाल था. उनका कहना था कि उनके सभी साथी उन्हें छोड़कर चले गए हैं. वो पिछले 72 घंटे से सेना के श्रीनगर स्थित कार्यालय के पास रह रहे हैं. उनके पास खाने को कुछ नहीं है. वो एक गुरुद्वारे में खाना खा रहे हैं.

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