इराक़: महिलाओं के ख़तने का फ़रमान

इराक़ी महिलाएं

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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इराक़ के मोसुल शहर में चरमपंथी समूह- इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड अल शाम ने महिलाओं को ख़तना कराने का आदेश दिया है.

आईएसआईएस ने ये आदेश 11 साल की लड़कियों से लेकर 46 वर्ष की महिलाओं के लिए जारी किया है.

संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी जैक्लिन बैडकॉक ने इस फ़तवे पर चिंता जताई है.

मोसुल पर आईएसआईएस के लड़ाकों का नियंत्रण है.

पूरा इराक़ इस समय आईएसआईएस के नेतृत्व में सुन्नी मुसलमानों के विद्रोह का सामना कर रहा है.

सुन्नी लड़ाकों ने देश के उत्तर पश्चिमी इलाक़े पर नियंत्रण कर लिया है.

आईएसआईएस के लड़ाके

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महिलाओं के ख़तने की प्रथा कुछ अफ्रीकी, मध्य-पूर्व के देशों और एशियाई समुदाय में प्रचलित है.

उनका मानना है कि ख़तने से महिलाओं को युवावस्था या शादी लायक बनाया जाता है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2012 में एक प्रस्ताव पारित करके कहा था कि सभी सदस्य देशों को इस अमानवीय प्रथा पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए.

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