अमरीकी नौसैनिक अभ्यास की निगरानी सहीः चीन

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चीन का कहना है कि उसे अमरीका के नेतृत्व में किए जा रहे नौसैनिक अभ्यास की निगरानी के लिए जहाज़ भेजने का अधिकार है.

पिछले हफ़्ते अमरीकी मीडिया में हवाई से दूर इस जहाज़ की मौजूदगी की ख़बरें छपी थीं.

चीन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि नौसैनिक जहाज़ों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "अन्य देशों की जल सीमा से बाहर" चलने का अधिकार है.

चीन भी इस अभ्यास में भाग ले रहा है. इसने रिम ऑफ़ दि पेसिफ़िक (रिमपैक) ऑपरेशन में भाग लेने के लिए करीब 1,000 नौसैनिकों के साथ चार जहाज़ भेजे हैं.

इस अभ्यास में 22 देश भाग ले रहे हैं और चीन को इसमें पहली बार शामिल किया गया है.

अमरीका ने स्वीकार किया है कि पहली बार भाग ले रहे किसी देश ने अभ्यास पर नज़र रखने के लिए जहाज़ भेजा है.

'पार्टी क्रैशर'

अमरीका के प्रशांत महासागरीय बेड़े के प्रमुख प्रवक्ता कैप्टन डैरीन जेम्स ने समाचार एजेंसियों को बताया कि चीन ने 2012 में रिमपैक अभ्यास के दौरान भी ऐसा ही एक जहाज़ भेजा था.

उन्होंने कहा कि अमरीका ने "अपनी महत्वपूर्ण सूचनाओं की सुरक्षा के लिए सभी ज़रूरी क़दम" उठाए हैं.

अमरीकी मरीन कॉर्प्स

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अमरीका के कुछ मीडिया संस्थानों ने चीनी जहाज़ की मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं.

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इसे 'पार्टी क्रैशर' करार देते हुए कहा है कि यह "दुनिया के सबसे बड़े नौसैनिक आयोजन में गुप्तचरी के भोज का आनंद ले रहा है."

ब्लूमबर्ग ने एक विश्लेषक के हवाले से कहा कि चीन के इस कदम से एक 'एक ख़राब संकेत' गया है.

दिसंबर 2013 में दक्षिण चीन सागर में अमरीका और चीन एक नज़दीकी भिड़ंत टलने के बाद लड़ने को तैयार हो गए थे.

अमरीका का कहना था कि उसके गाइडेड मिसाइल क्रूज़र यूएसएस काउपेन्स को आक्रामक कदम उठाने पर मजबूर किया गया था. उधर चीनी मीडिया का कहना था कि जब उसका नया एयरक्राफ़्ट करियर, दि लियाओनिंग, जब समुद्र में परीक्षणों के लिए उतरा था तो अमरीका लगातार उसे परेशान कर रहा था.

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