गज़ा: क्या हासिल करना चाहता है इसराइल

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- Author, जोनाथन मार्कस
- पदनाम, बीबीसी कूटनीतिक संवाददाता
गज़ा में इसराइल की ज़मीनी सैन्य कार्रवाई कितनी भी बड़ी हो या फिर कितने भी दिन चले एक बात तो साफ़ है कि न ही इससे गज़ा पर हमास का शासन ख़त्म होगा और न ही गज़ा इसराइल के क़ब्ज़े में आएगा.
ये गतिरोध मिस्र जैसे बाहरी देशों के प्रयासों से होने वाली शांतिवार्ता से ही ख़त्म होगा. हालात फिर वैसे ही हो जाएंगे जैसे इस ताज़ा हिंसा से पहले थे, कम से कम अगली बार फिर से तनाव बढ़ने तक.
सवाल उठता है कि फिर इसराइल गज़ा में इस कार्रवाई से क्या हासिल करना चाहता है?
ज़मीनी कार्रवाई को हरी झंडी देने का सीमित उद्देश्य हमास और अन्य संगठनों के सुरंगों के नेटवर्क को नष्ट करना होगा. हमास ने ये सुरंगें भारी हथियारों से लैस लड़ाकों को इसराइल में घुसाने के लिए खोद रखी हैं.
हमास के ऐसे ही एक प्रयास को गुरुवार सुबह नाकाम किया गया था. गज़ा पट्टी के पूर्वी इलाके में केरेम शैलोम और किबुत्ज़ सुफ़ा के बीच तेरह फ़लस्तीनी लड़ाके सुरंग से बाहर निकलने की कोशिश कर ही रहे थे कि इसराइली सुरक्षाबलों की नज़र उन पर पड़ गई. जबावी कार्रवाई में कुछ मारे गए और बाक़ी को वापस सुरंग में जाना पड़ा.
नई रणनीति

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समुद्री या सुरंगी रास्ते से इसराइल में घुसने की कोशिशें फ़लस्तीनियों की नई रणनीति है. इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू ने ज़मीनी कार्रवाई को हरी झंडी देते हुए सुंरगों का ख़ासतौर पर ज़िक्र किया.
यदि ज़मीनी कार्रवाई का शुरुआती उद्देश्य यही है तो सैन्य कार्रवाई सीमावर्ती क्षेत्र तक ही सीमित रहेगी. साथ ही समुद्र की ओर से भी हमले किए जाएंगे.
हालांकि ज़मीन पर लड़ने के बड़े ख़तरे भी हैं. सबसे पहले तो इसराइली सुरक्षाबल स्वयं निशाने पर हो सकते हैं. फ़लस्तीनी लड़ाकों के पास उन्नत टैंक रोधी मिसाइलें हैं.
उन्होंने व्यापक भूमिगत नेटवर्क भी तैयार कर रखा है. वे सुरक्षाबलों पर हमले कर सकते हैं या सैनिकों का अपहरण कर सकते हैं.
भारी हथियारों के साथ ज़मीनी कार्रवाई का सबसे बड़ा ख़तरा आम नागरिकों को होने वाले नुक़सान को लेकर है. इस वजह से इसराइल को इस कार्रवाई के लिए समय सीमा तय करनी पड़ सकती है.
अंतरराष्ट्रीय दबाव
जैसे-जैसे मृतकों में आम नागरिकों की संख्या बढ़ेगी, इसराइल पर ऑपरेशन को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जाएगा.

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इसराइल का ज़ोर हमास की क्षमता को ख़त्म करने पर है. ऐसे में सेना घनी आबादी में घुसने से पीछे हट सकती है.
पुराने अनुभव से सबक लेते हुए इसराइल गज़ा के मुख्य मार्गों को रोक कर शहर को कई हिस्सों में बाँट सकता है.
इस कार्रवाई का मूल उद्देश्य हमास और अन्य संगठनों को शांति वार्ता करने के लिए दबाव बनाना है.

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इसराइल दोबारा गज़ा पट्टी पर नियंत्रण करना नहीं चाहता है, बल्कि वह शांति से रहना चाहता है.
इसराइल के सैन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समय हमास पीछे हटा हुआ है. हमास के रॉकेट हमलों के ज़रिए युद्ध को इसराइल के भीतर ले जाने के प्रयास नाकाम हो गए हैं.
कारण जो भी रहे हैं फ़लस्तीन और इसराइल के बीच अभी कोई समझौता नहीं हो सका है.
लेकिन ये संघर्ष सिर्फ़ शांति समझौते से ही समाप्त हो सकता है. लेकिन इससे भी शायद ऐसा न हो पाए क्योंकि फ़लस्तीनियों की पीड़ा और मन की कड़वाहट तो बरक़रार है.
शत्रुतापूर्ण रवैये वाले इसराइल और मिस्र के बीच फँसे गज़ा की यह असंभव स्थिति बनी रहेगी. सीमा पर शांति की कोई संभावना दिखाई दे नहीं रही है. ऐसे में एक बार जब यह ऑपरेशन ख़त्म होगा तो अगली हिंसा के लिए उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी.
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