इराक संकटः 'साथ आए' अमरीका और ईरान

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इराक़ में सेना और इस्लामी चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट इन इराक़ ऐंड अल-शाम या आईएसआईएस के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच इराक़ के सहयोग के लिए आखिरकार अमरीका और ईरान साथ आ गए हैं.
लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ के जोसेफ़ डेम्प्सी ने इराक़ी अधिकारियों की ओर से जारी विमानों के वीडियो को ध्यान से देखा है.
उन्होंने बीबीसी को बताया कि उनके अनुसार इस्तेमाल हुए विमानों में से कुछ एक सुखोई सू-25 'फ़्रॉगफ़ुट' हैं और वे ईरानी हैं.
अमरीका पहले ही मदद के लिए इराक में अपने विमान भेज चुका है.
इधर इराक़ के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने चेतावनी दी है कि आईएसआईएस की ओर से 'इस्लामी राज्य' की घोषणा पूरे क्षेत्र के लिए खतरा है.
आईएसआईएस ने इराक़ और सीरिया के अपने कब्ज़े वाले इलाक़े में इस्लामी राज्य का ऐलान किया है.
इराक के प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने कहा कि वह सुन्नी कबीले के उन लड़ाकों को भी माफ करने के लिए तैयार हैं जो संघर्ष में चरमपंथियों के साथ रहे, बशर्ते वे किसी खून-खराबे में शामिल न रहे हों.

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कुर्द के स्वायत्त क्षेत्र को पूरी तरह अपने कब्ज़े में लेने के कुर्द नेताओं के क़दम की भी उन्होंने आलोचना की.

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इराक़ के प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी को इलाके में घट रहे ताजा घटनाक्रम का फायदा उठाने का अधिकार नहीं है.

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इस बीच कुर्द नेता मसूद बरज़ानी ने इराक़ के वरिष्ठ शिया धार्मिक नेता अयातुल्लाह सिस्तानी से अपील की है कि वह मलिकी के तीसरे कार्यकाल के लिए समर्थन न करें.
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