उत्तर कोरियाः पंसदीदा 'चॉको पाई' पर पाबंदी

उत्तर कोरिया के लोग अब अपना पसंदीदा चॉकलेट स्नैक, चॉको पाई नहीं खा सकेंगे.
दक्षिण कोरियाई समाचार पत्र चोसुन इल्बो के मुताबिक उत्तर कोरिया में केसोंग संयुक्त औद्योगिक परिसर में दक्षिण कोरियाई कंपनी के कर्मचारियों को दोपहर के खाने के साथ चॉको पाई मिला करता था, लेकिन अब सरकार ने इसे दक्षिण कोरियाई अपसंस्कृति का प्रतीक मानते हुए इस पर पाबंदी लगा दी है.
केसोंग औद्योगिक परिसर के भीतर <link type="page"><caption> चॉकलेट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/institutional/2014/05/140530_malaysia_cadbury_muslim_group_boycott_sk.shtml" platform="highweb"/></link> और मार्शमैलो स्नैक्स उत्तर कोरिया के कर्मचारियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. वे इसे इसके स्वाद के कारण नहीं, बल्कि इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इसे ब्लैक मार्केट में बेचने से अच्छी खासी आमदनी होती है.
यह एक ऐसा चलन है जिसे उत्तर कोरिया की सरकार ख़त्म करना चाहती है.
पिछले महीने लगी इस पाबंदी के बाद, चॉको पाई की जगह कर्मचारियों को सॉसेज, नूडल्स, कॉफी और अन्य चॉकलेट बार मिलने लगे हैं.
समाचार पत्र चोसुन इल्बो का कहना है कि कुछ कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें इसकी कीमत "अमरीकी डॉलर में चुकाई जाए".
पश्चिमी माल पर पाबंदी की कोशिश

इमेज स्रोत, AFP
केसोंग दक्षिण कोरियाई कंपनियों के लिए काफी लाभदायक है क्योंकि एक तो कंपनी को सस्ते दर पर श्रम उपलब्ध हो जाते हैं, दूसरे वह उत्तर कोरिया की दुर्लभ मुद्रा भी कमा रही हैं.
केसोंग की स्थापना साल 2004 में हुई थी. यह परिसर 2013 में उत्तर कोरिया की ओर से दी गई परमाणु हथियार हमले की धमकी के बाद बंद कर दिया गया था.
चोसुन इल्बो ने उत्तर कोरिया के एकीकरण मंत्रालय के हवाले से बताया है कि चॉको पाई पर पाबंदी इसलिए लगाई गई क्योंकि कई कर्मचारी इसे खा-खाकर ऊब चुके थे और इसकी जगह 'कुछ और चाहते थे'.
बीबीसी मॉनीटरिंग के उत्तर कोरिया के विशेषज्ञ के मुताबिक, चॉको पाई उत्तर कोरिया के लोगों के बीच बेहद पसंद किया जाने लगा है. वे बताते हैं कि ऐसी पाबंदी का मकसद चॉको पाई ही नहीं, अन्य पश्चिमी माल को भी यहां से ख़त्म कर देना है.
इसका मतलब खुली बाजार नीति के कारण देश में दबे पांव प्रवेश कर रहे पूंजीवाद पर रोक लगाने का एक सरकारी प्रयास है.
संयुक्त केसोंग औद्योगिक परिसर में 123 दक्षिण कोरियाई फैक्ट्रियां हैं जिनमें उत्तर कोरिया के 50,000 से ज़्यादा कर्मचारी काम करते हैं.
दोनों देशों के बीच यह एकमात्र संयुक्त परियोजना है और उत्तर कोरिया के राजस्व में इसका अहम योगदान है.
<bold>(<link type="page"><caption> बीबीसी मॉनिटरिंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/news/world-18190302" platform="highweb"/></link> दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/bbcmonitoring" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/BBCMonitoring" platform="highweb"/></link> पर भी पढ़ सकते हैं. बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












